
प्रतीकात्मक चित्र
भोपाल:
मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में देश की पहली ग्लोबल बांस समिट अगले वर्ष 29 से 31 जनवरी तक इंदौर में होगी। यह सम्मेलन 'बैम्बू फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट-ग्लोबल को-ऑपेरशन' पर केंद्रित होगा।
मंगलवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि ग्लोबल समिट का उद्देश्य बांस उत्पादक, कारीगर, उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों को विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्ध कराना, बांस का ऊपार्जन, बांस नीति, बांस नवाचार आदि पर चर्चा करना है।
सम्मेलन में बांस उत्पादन में अंतर्राष्ट्रीय मांग और खपत, बैंकिंग संस्थाओं, डिजाइनर और बांस उद्यमियों के बीच ताल-मेल बढ़ाना है। समिट में ऐसे जिलों में बांस के माध्यम से आर्थिक उन्नति के बारे में भी चर्चा होगी, जिनमें प्रचुर मात्रा में बांस उत्पादन होने के बावजूद उचित आर्थिक दोहन नहीं हो पा रहा है।
समिट में जलवायु परिवर्तन में बांस की भूमिका, इमारती लकड़ी के विकल्प के रूप में बांस उत्पाद की बाजार महत्ता बढ़ाना, बांस शिल्प और बांस उत्पाद के लिए शृंखला प्रबंधन, मेक इन इंडिया में बांस पर भी चर्चा होगी।
भारत बांस उत्पादन में विश्व में द्वितीय स्थान पर है। यहां बांस की 130 प्रजातियां पाई जाती हैं। भारतीय बांस उद्योग प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 2040 करोड़ और देश में 4463 करोड़ रुपये का व्यापार करता है। युक्तिपूर्ण प्रबंधन से बांस को ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था की उन्नति, लकड़ी के वैकल्पिक स्रोत और जलवायु परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में विकसित किया जा सकता है।
मंगलवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि ग्लोबल समिट का उद्देश्य बांस उत्पादक, कारीगर, उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों को विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्ध कराना, बांस का ऊपार्जन, बांस नीति, बांस नवाचार आदि पर चर्चा करना है।
सम्मेलन में बांस उत्पादन में अंतर्राष्ट्रीय मांग और खपत, बैंकिंग संस्थाओं, डिजाइनर और बांस उद्यमियों के बीच ताल-मेल बढ़ाना है। समिट में ऐसे जिलों में बांस के माध्यम से आर्थिक उन्नति के बारे में भी चर्चा होगी, जिनमें प्रचुर मात्रा में बांस उत्पादन होने के बावजूद उचित आर्थिक दोहन नहीं हो पा रहा है।
समिट में जलवायु परिवर्तन में बांस की भूमिका, इमारती लकड़ी के विकल्प के रूप में बांस उत्पाद की बाजार महत्ता बढ़ाना, बांस शिल्प और बांस उत्पाद के लिए शृंखला प्रबंधन, मेक इन इंडिया में बांस पर भी चर्चा होगी।
भारत बांस उत्पादन में विश्व में द्वितीय स्थान पर है। यहां बांस की 130 प्रजातियां पाई जाती हैं। भारतीय बांस उद्योग प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 2040 करोड़ और देश में 4463 करोड़ रुपये का व्यापार करता है। युक्तिपूर्ण प्रबंधन से बांस को ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था की उन्नति, लकड़ी के वैकल्पिक स्रोत और जलवायु परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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