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This Article is From Jan 19, 2017

पीएम नरेंद्र मोदी ने जल्लीकट्टू मामले में दख़ल से किया इंकार, कहा - मामला अदालत में है

पीएम नरेंद्र मोदी ने जल्लीकट्टू मामले में दख़ल से किया इंकार, कहा - मामला अदालत में है
लोग सड़कों पर आकर सु्‌प्रीम कोर्ट द्वारा जल्‍लीकट्टू पर लगाई गई रोक हटाने की मांग कर रहे हैं.
  • जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को लेकर तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन
  • तमिलनाडु सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है
  • पीएम मोदी ने कहा कि मामला अदालत में है इसलिए दखल नहीं दे सकते
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नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम से कहा कि जल्लीकट्टू का मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए वह इसमें दखल नहीं दे पाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह इस वाषिर्क अनुष्ठान के सांस्कृतिक महत्व को समझते हैं. मोदी ने जल्लीकट्टू मुद्दे पर पन्नीरसेल्वम से कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों के प्रति समर्थन का रवैया अपनाएगी. उधर पीएम मोदी से मिलने के बाद सीएम पन्नीरसेल्वम ने कहा है कि केंद्र सरकार इस मामले में राज्य के साथ है. साथ ही AIADMK की महासचिव शशिकला नटराजन ने भी इस मुद्दे पर पीएम को चिट्ठी लिखी. सीएम ने एक बार फिर अपनी मांग दोहराई कि उनकी सरकार इस मामले पर अध्यादेश लाना और जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटाना चाहती है.

जल्‍लीकट्टू पर लगी रोक हटाने का विरोध जनआंदोलन में बदल चुका है. जहां आज (गुरुवार को) लगातार तीसरे दिन चेन्नई के मरीना बीच पर हज़ारों की संख्या में डटे छात्र और अन्‍य लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज तक कर दिया. ये विरोध चेन्नई से लेकर राज्य के मदुरै समेत अन्य ज़िलों तक फैल चुका है, जहां लोग सु्‌प्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक हटाने की मांग कर रहे हैं.

पन्नीरसेल्वम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक हटाने के लिए केंद्र सरकार से एक अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि मरीना बीच पर हो रहे प्रदर्शन वह दख़ल नहीं देगी. आज राज्य के 31 कालेज रोक के विरोध में बंद रहेंगे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जलीकट्टू तमिल परंपरा का हिस्सा है और इस पर रोक जायज़ नहीं है.

दरअसल, बैलों से इंसानों की लड़ाई के परंपरागत खेल जल्लीकट्टू को तमिलनाडु के गौरव तथा संस्कृति का प्रतीक बताते हुए उस पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर विद्यार्थियों, तकनीकी कामगारों, अभिनेताओं तथा राजनेताओं ने हज़ारों की संख्या में बुधवार को भी एक साथ आकर पूरे राज्य में प्रदर्शन किए.

राजधानी चेन्नई के मरीना बीच पर मंगलवार रात से ही लगभग 3,000 लोग इकट्ठा हो गए थे, और इसी तरह राज्य के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन किए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) पर भी पाबंदी लगाए जाने की मांग की है, जिसने इस खेल पर प्रतिबंध लगवाने के लिए जमकर लॉबीइंग की थी.

तमिलनाडु के मंत्रियों जयकुमार तथा पांडियाराजन ने भी कल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और आश्वासन दिया कि सरकार उनसे सहमत है तथा अध्यादेश लाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करेगी. राज्य सरकार ने कहा है कि वह इस मामले में कानूनी विकल्प भी तलाश रही है. (इनपुट भाषा से भी)

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