मिडिल ईस्ट में फिर से हालात खराब हो गए हैं और इसके सुधार के भी आसार नहीं दिख रहे हैं. अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर बंद हो गया है. इससे तेल निर्यात को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ रही है. अमेरिका-ईरान युद्ध का सीधा असर तेल व्यापार पर पड़ता है. यह पहले भी देखा जा चुका है, अब एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों पर युद्ध का असर दिखने लगा है. क्योंकि कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर रफ्तार पकड़ रही है जो 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है. इस वजह से दुनिया भर के देशों में टेंशन बढ़ते जा रही है.
विदेश से आई डराने वाली चेतावनी
वहीं इन सबके बीच अब कच्चे तेल के दामों को लेकर नई चेतावनी सामने आ रही है. यह चेतावनी विदेश से आ रही है जो काफी डराने वाली है. दरअसल एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर के पार जा सकती है. यह चेतावनी Goldman Sachs की रिपोर्ट में दी गई है.
कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर के पार जाने का अनुमान
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन ने अपने एक नोट के हवाले से बताया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट इसी तरह बंद रहा और तेल निर्यात ठप रहा तो चौथी तिमाही तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. जानकारी के लिए बता दें हाल ही में सीजफायर से पहले जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा था तो मार्च-अप्रैल महीने में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर तक पहुंच चुकी थी. ऐसे में ताजा चेतावनी को लेकर चिंता बढ़ने लगी है.
गोल्डमैन के रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ने और फारस की खाड़ी में अनुमानित तेल फ्लो के युद्ध पूर्व स्तरों के 45 फीसदी से नीचे गिरने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी है. जो होर्मुज में लगातार रुकावट और लाल सागर में निर्यात पर संकट की संभावना को दर्शाता है.
हालांकि इन चिंताओं के बीच गोल्डमैन ने पश्चिमी एशिया में तनाव कम होने की स्थिति में चौथी तिमाही में तेल की कीमत 80 डॉलर और अगले साल 75 डॉलर तक गिरने का भी अनुमान लगाया है.
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