Weak Indian Rupee Benefit: ईरान-इजरायल जंग के बीच भारतीय शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है, दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपया अपनी चमक खो रहा है. निवेशक परेशान हैं. बिकवाली का दौर चल रहा है. लेकिन मार्केट एक्सपर्ट और मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर सौरभ मुखर्जिया ने एक ऐसी बात कही है, जिसे सुन मार्केट में पैसा लगाने वाले कुछ हद तक राहत की सांस ले सकते हैं. दरअसल उन्होंने बताया है कि ये स्थिति हर किसी के लिए बुरी नहीं है. गिरता रुपया भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ खास सेक्टर्स के लिए वरदान साबित हो सकता है.
रुपये की कमजोरी बनी ताकत
मुखर्जिया के अनुसार, जब रुपये की वैल्यू गिरती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स दूसरों के मुकाबले सस्ते हो जाते हैं. इसका सीधा फायदा एक्सपोर्ट और फार्मा सेक्टर को मिलता है. एनडीटीवी प्रॉफिट से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, "कमजोर रुपया ग्लोबल मार्केट में भारत के सामान को सस्ता बना देता है, जिससे विदेशी खरीदारों के लिए भारतीय प्रोडक्ट की पहुंच आसान हो जाएगी. फार्मा कंपनियां इसका फायदा उठा सकती हैं, क्योंकि वो अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से हासिल करती हैं."

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गेम चेंजर साबित होंगे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
सौरभ मुखर्जिया ने भारत के यूके और यूरोपीय संघ के साथ होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, अगर ये सौदे सही दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो भारत का एक्सपोर्ट ग्राफ तेजी से ऊपर जाएगा, एफटीए के बाद कस्टम ड्यूटी में कमी आएगी, जिससे भारतीय ऑटोमोबाइल और फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स की पहुंच यूरोप के बड़े बाजारों तक आसान हो जाएगी.
ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग में दिखेगी मजबूती
सिर्फ फार्मा ही नहीं, बल्कि ऑटो सेक्टर भी इस बदलाव में आगे आएगा. मुखर्जिया का मानना है कि भारत अब एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर है. ट्रेड डील होने के बाद, भारतीय ऑटो पार्ट्स और व्हीकल्स की मांग विदेशों में बढ़ेगी, जो कंपनियों के मार्जिन को बेहतर करेगी.
हालांकि किसी भी देश की करेंसी का कमजोर होना आम आदमी के लिए कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स महंगा कर सकती है, लेकिन सौरभ मुखर्जिया की बातों से पता चलता है कि निवेश के लिहाज से ये आईटी, फार्मा और ऑटो एक्सपोर्टर्स पर दांव लगाने का सही समय हो सकता है, बशर्ते आप शेयर बाजार में लंबी अवधि के निवेशक होने चाहिए.
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