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STG Star Living प्रोजेक्ट निकला अधूरा सपना, पैसा फंसा, घर नहीं मिला, अब खरीदारों पर और पैसे देने का प्रेशर

STG Star Living Stuck Project: ठाणे की 72 मंजिला बिल्डिंग STG स्टार लिविंग का काम 2023 से सिर्फ 10वीं मंजिल तक ही हुआ है. साल 2023 तक पजेशन देने का वायदा था, पर अभी तक काम फिर से शुरु नहीं हो सका है.

STG Star Living प्रोजेक्ट निकला अधूरा सपना, पैसा फंसा, घर नहीं मिला, अब खरीदारों पर और पैसे देने का प्रेशर

STG Star Living Stuck Project: आम आदमी अपनी जिंदगी की पाई-पाई जोड़ता है, अपनी हसरतों का गला घोंटता है, गहने बेचता है और पीएफ का पैसा दांव पर लगा देता है. सिर्फ इसलिए कि उसके पास अपनी एक छत हो. लेकिन क्या हो जब देश के बड़े क्रिकेटर कपिल देव जिस प्रोजेक्ट के ब्रैंड एंबेसडर हों, जिसे ठाणे की सबसे आलीशान और सबसे ऊंची, 72 मंजिला इमारत कहकर बेचा गया हो, वो सिर्फ 10 मंजिलों के बाद कंक्रीट का एक बेजान ढांचा बनकर रह जाए? ये किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि ठाणे के STG स्टार लिविंग प्रोजेक्ट में घर बुक करने वाले परिवारों की हकीकत है. 

मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार ये खबर है महाराष्ट्र के थाने जिले की. साल 2018 के करीब यहां थीम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने 72 मंजिला टावर बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था. भविष्य को देखते हुए खरीदारों ने देर ना करते हुए यहां बुकिंग करनी शुरू कर दी. उन्हें बताया गया था कि साल 2023 तक ये प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा और कई सालों से चला आ रहा अपने घर का सपना पूरा हो जाएगा. पर कुछ ऐसा हुआ कि साल 2021 के बाद से ही ये प्रोजेक्ट रुका हुआ है. खरीदार अपने निवेश किए हुए पैसों और सपने को लेकर परेशान हैं. चलिए इस पूरे मामले की जानकारी आपको देते हैं. 

काम सिर्फ 10वीं मंजिल तक!

थीम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जो महारेरा (MahaRERA) में रजिस्टर्ड है. कागजों पर इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तय की गई है. लेकिन हकीकत ये है कि ये समयसीमा अब एक मजाक नजर आती है. मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार एक खरीदार ने बताया, "हमसे फ्लैट की कुल कीमत का लगभग 45 फीसदी पैसा पहले ही लिया जा चुका है. लेकिन जमीन पर सिर्फ 10 मंजिलों का स्लैब वर्क हुआ है. हमारा पैसा कहां गया? हमें पूरा शक है कि हमारे खून-पसीने की कमाई को किसी दूसरे प्रोजेक्ट में डायवर्ट कर दिया गया." हालत ये है कि बकाया भुगतान ना होने की वजह से ठेकेदारों ने काम छोड़ दिया है और बिजली का बिल ना भरने की वजह से कंस्ट्रक्शन साइट की बिजली तक काट दी गई है.

'गहने बेचे, पीएफ निकाला...'

इस रियल एस्टेट स्कैम ने सिर्फ इमारत को नहीं रोका, बल्कि सैकड़ों हंसते-खेलते परिवारों को बर्बाद कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, एक महिला वकील ने बताया कि, "मेरे परिवार ने साल 2018 में इस उम्मीद के साथ यहां निवेश किया था कि बुढ़ापे में अपना घर होगा. हमने अपना पुराना घर गिरवी रख दिया. सारे गहने बेच दिए और यहां तक कि मेरे पति के प्रोविडेंट फंड में जमा पैसे बिल्डर को दे दिए. हमें 2023 में पजेशन का वादा था. आज हमारे पास ना घर है, ना पैसे, सारे सपने चकनाचूर हो चुके हैं."

ऐसी ही कहानी एक 72 साल के बुजुर्ग की है. उन्होंने 2019 में ही महारेरा (MahaRERA) से इस डेवलपर के खिलाफ ब्याज के साथ 5.3 करोड़ रुपये वापस दिलाने का आदेश जीता था. लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी कंपनी के डायरेक्टरों विनोद दौलतानी और हरेश दौलतानी ने कोर्ट के आदेश को अभी तक नहीं माना है.

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बिल्डर पर आरोप

बिल्डर (Theme Developers) दिवालिया हो चुका है. मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार आरोप हैं कि पैसे दूसरे कामों में डायवर्ट किए गए. इससे प्रोजेक्ट में फंड की कमी हो गई और काम पूरी तरह रुक गया. साथ ही जरूरी रिपोर्ट्स समय पर जमा नहीं किए. इसके अलावा खरीदारों ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट की महारेरा प्रोग्रेस रिपोर्ट सितंबर 2021 के बाद से अपडेट ही नहीं की गई. वित्तीय वर्ष 2022-23 के ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट भी जमा नहीं किए. साथ ही उन्हें बिल्डर के दिवालिया होने की जानकारी 2025 में सोशल मीडिया से मिली. पहले आधिकारिक तौर पर सही जानकारी नहीं दी गई.

पूरे मामले पर डेवलपर की सफाई

जब इस पूरे मामले पर डेवलपर विनोद दौलतानी से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने मामले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में जारी बताते हुए पल्ला झाड़ लिया. उन्होंने केवल इतना कहा कि कोविड और स्लम रीडेवलपमेंट स्कीम से जुड़ी दिक्कतों की वजह से कॉस्ट बढ़ गई.

एक्स्ट्रा पैसे देने से खरीदारों का इनकार

मामला एनसीएलटी में पहुंच चुका है. रेजोल्यूशन प्रोफेशनल मोनिका रमेश शाह ने समाधान प्लान दिया, जिसमें खरीदारों से कहा गया कि 5,000 रुपये प्रति स्क्वायर फीट अतिरिक्त पैसा दो. खरीदारों ने इसे मानने से इंकार कर दिया. खरीदारों का कहना है कि उन्होंने जो गलती की ही नहीं, उसकी सजा वे क्यों भुगतें? पहले ही आधा पैसा दे चुके हैं. अब लाखों रुपये अलग से कहां से लाएंगे?

ये मामला अब सिर्फ एक फ्लैट का नहीं रह गया है, बल्कि उस भरोसे का बन गया है जो आम लोग रियल एस्टेट और कानून पर करते हैं. ठाणे में बना ये अधूरा 72 मंजिला टावर उन सैकड़ों परिवारों की परेशानी दिखाता है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई लगाई, लेकिन आज उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ रहा है.

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