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SEBI का बड़ा फैसला, लंबे समय से जो मांग रहे थे FPI, पूरी हो गई वो मुराद! अब फायदे ही फायदे  

SEBI ने यह भी स्पष्ट किया कि फंड भले ही नेट किए जा सकें, लेकिन शेयरों का सेटलमेंट पहले की तरह अलग-अलग (ग्रॉस बेसिस) पर ही होगा. इसके अलावा, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और स्टाम्प ड्यूटी जैसे टैक्स पहले की तरह ही लागू रहेंगे.

SEBI का बड़ा फैसला, लंबे समय से जो मांग रहे थे FPI, पूरी हो गई वो मुराद! अब फायदे ही फायदे  
SEBI New Rule: सेबी के इस नियम से विदेशी निवेशकों को राहत

मार्केट रेगुलेर SEBI यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने FPI यानी विदेशी निवेशकों को एक ही दिन के कैश मार्केट ट्रेड में फंड को एडजस्ट (नेट) करने की अनुमति दे दी है. इस कदम का उद्देश्य कामकाज को आसान बनाना है. साथ ही खासकर इंडेक्स रीबैलेंसिंग के समय, लागत कम करना है. नए नियम के तहत, अब FPI एक ही दिन में किए गए शेयरों की बिक्री से मिले पैसे का इस्तेमाल उसी दिन की खरीद के लिए कर सकेंगे. यानी अब उन्हें हर ट्रांजैक्शन अलग-अलग सेटल करने की बजाय केवल नेट (बचा हुआ) पैसा ही चुकाना होगा.

अब तक अलग-अलग करना होता था पेमेंट 

अभी तक FPI को हर ट्रेड का पूरा भुगतान अलग-अलग करना पड़ता था, जिससे ज्यादा पैसे की जरूरत होती थी, लागत बढ़ती थी और विदेशी मुद्रा में नुकसान भी होता था. बाजार के लोगों ने लंबे समय से इस समस्या की शिकायत की थी, खासकर उन दिनों में जब इंडेक्स रीबैलेंसिंग के कारण ट्रेडिंग बहुत ज्यादा होती है और कामकाज मुश्किल हो जाता है.

कब तक लागू होगया नया सिस्‍टम? 

सेबी ने कहा कि ये नया सिस्टम 31 दिसंबर 2026 तक लागू कर दिया जाएगा. रेगुलेटर ने साफ किया कि यह सुविधा केवल 'आउट्राइट ट्रांजैक्शन' पर लागू होगी, यानी जब एक ही सिक्योरिटी में केवल खरीद या केवल बिक्री की गई हो.

अगर एक ही सिक्योरिटी में एक ही समय में खरीद और बिक्री दोनों होती है, तो उस पर यह सुविधा लागू नहीं होगी और पुराने तरीके से ही सेटलमेंट होगा. सेबी ने यह भी बताया कि अगर बिक्री की रकम खरीद से कम होती है, तो बाकी रकम FPI को खुद देनी होगी.

वहीं, अगर बिक्री की रकम ज्यादा है, तो अतिरिक्त पैसा किसी अन्य खरीद को एडजस्ट करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. रेगुलेटर ने यह भी स्पष्ट किया कि फंड भले ही नेट किए जा सकें, लेकिन शेयरों का सेटलमेंट पहले की तरह अलग-अलग (ग्रॉस बेसिस) पर ही होगा. इसके अलावा, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और स्टाम्प ड्यूटी जैसे टैक्स पहले की तरह ही लागू रहेंगे.

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