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शिफ्ट खत्‍म होते ही सैलरी! किसे वीकेंड से पहले और किसे 7 तारीख तक मिलेगी पगार, सरकार ने बता दी डेडलाइन

Salary On Time: केंद्र सरकार ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हित में कड़े नियम बनाए हैं, जिससे उन्‍हें समय पर पगार मिलेगी. डेली बेस पर काम करनेवालों को तो शिफ्ट पूरी होते ही पैसे देना जरूरी होगा. क्‍या है पूरा नियम, यहां डिटेल में पढ़ें.

शिफ्ट खत्‍म होते ही सैलरी! किसे वीकेंड से पहले और किसे 7 तारीख तक मिलेगी पगार, सरकार ने बता दी डेडलाइन
Outsourcing Staff Salary Rules: केंद्र सरकार ने ठेके वाले कर्मचारियों की सैलरी पर भी नियम बना दिए हैं, जो कर्मियों के लिए बड़ी राहत की बात होगी.

सरकारी कर्मियों की तरह अब आउटसोर्स कर्मचारियों को भी समय पर सैलरी मिलेगी. ठेके पर बहाल दैनिक कर्मचारियों के लिए भी ये नियम लागू होंगे. मासिक वेतन पाने वाले कर्मियों को 7 दिन के भीतर सैलरी देनी होगी. इसी तरह डेली वेजेज यानी दैनिक मजदूरी में लगे कर्मियों और साप्‍ताहिक या पाक्षिक यानी 7 दिन और 15 दिन पर वेतन पाने वाले कर्मियों के लिए भी समयसीमा तय की गई है. केंद्र सरकार ने इसके लिए सख्‍त नियम बनाए हैं. आउटसोर्सिंग कंपनियां अगर इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन्‍हें सरकार ब्‍लैकलिस्‍ट कर देगी. 

दरअसल, वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि वेतन संहिता 2019 के तहत सभी श्रेणियों के श्रमिकों को समय पर वेतन का भुगतान अनिवार्य है.  

वेतन भुगतान के लिए सख्त समयसीमा

नए नियमों के अनुसार, विभिन्न कार्य अवधियों के लिए भुगतान की समयसीमा निर्धारित की गई है. 

  • इसके तहत दैनिक वेतन शिफ्ट खत्म होने पर दिया जाना चाहिए. 
  • साप्ताहिक वेतन साप्ताहिक अवकाश से पहले दिया जाए. 
  • पाक्षिक वेतन पखवाड़ा समाप्त होने के 2 दिन के भीतर दिया जाए. 
  • मासिक वेतन अगले महीने की 7 तारीख तक दे दिया जाना चाहिए.  

ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही

केंद्र के निर्देश के अनुसार, ठेकेदारों को अनिवार्य रूप से बैंक ट्रांसफर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वेतन का भुगतान करना होगा. मुख्य नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुबंध करने से पहले पर्याप्त बजट उपलब्ध हो और वे GeM पोर्टल या अन्य माध्यमों पर पूरे अनुबंध काल के लिए फंड ब्लॉक करें.  

ठेकेदारों को महीने की 10 तारीख तक अपने बिल जमा करने होंगे, जिन्हें संबंधित डीडीओ द्वारा 15 तारीख तक हर हाल में पास करना होगा.  

दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

यदि कोई ठेकेदार वेतन भुगतान में देरी करता है, तो मुख्य नियोक्ता सीधे श्रमिकों को भुगतान करेगा और ऐसी स्थिति में ठेकेदार को संबंधित मंत्रालय द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. बार-बार उल्लंघन करने पर जीएफआर (GFR) 2017 के नियमों के तहत ठेकेदार को भारत सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा.  

सभी मंत्रालयों के सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी मासिक बैठकों में वेतन भुगतान की स्थिति की समीक्षा करें. यह कदम देश के लाखों संविदा कर्मियों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

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