मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आईपीओ पर देरी की तलवार लटक रही है. ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि कंपनी अप्रैल से पहले अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. हालांकि यह पूरी तरह सरकारी नोटिफिकेशन पर निर्भर करेगा.
रिलायंस की किसी बड़ी यूनिट की पिछले करीब 20 साल में यह पहली लिस्टिंग होगी. अनुमान है कि यह भारत का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है. निवेश बैंकरों ने कंपनी के लिए 170 अरब डॉलर तक के वैल्यूएशन का ऑफर दिया है. यह निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है.
माना जा रहा है कि जियो अगर उच्चतम वैल्यूएशन पर न्यूनतम हिस्सेदारी बेचती है तो वह करीब 4.3 अरब डॉलर जुटा सकती है. इससे जियो बाजार मूल्य के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो जाएगी. बता दें 2020 में मेटा और अल्फाबेट जैसी दिग्गज कंपनियों ने जियो में 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया था.
ब्लूमबर्ग का दावा है कि सरकार द्वारा लिस्टिंग नियमों में बदलाव को औपचारिक रूप देने में हो रही देरी की वजह से जियो के आईपीओ को तय टाइम पर लाना मुश्किल लग रहा है. रिलायंस को फिलहाल नियमों के औपचारिक नोटिफिकेशन का इंतजार है ताकि बैंकर्स की नियुक्ति और ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके.
दरअसल सेबी ने सितंबर में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए नियमों में संशोधन को मंजूरी दी थी. नए नियमों के तहत ऐसी कंपनियां आईपीओ में 5 पर्सेंट के बजाय सिर्फ 2.5 पर्सेंट हिस्सेदारी बेच सकेंगी. सेबी की मंजूरी के बाद वित्त मंत्रालय द्वारा इस नियम को आधिकारिक गजट में अधिसूचित करना है, जिसमें समय लग रहा है.
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