विज्ञापन

Dollar vs Rupee: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, आखिर कब रुकेगी यह गिरावट? जानिए 5 बड़ी वजहें

Dollar VS Indian Rupee: भारतीय करेंसी के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी बड़े झटके से कम नहीं रही है.ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बाद से पिछले कुछ महीनों में ही रुपया 5.5% से ज्यादा टूट चुकी है.

Dollar vs Rupee: डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, आखिर कब रुकेगी यह गिरावट? जानिए 5 बड़ी वजहें
Rupee hits all-time low: यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र है जब रुपये ने गिरावट का नया रिकॉर्ड बनाया है.

Dollar VS Rupee: आज यानी सोमवार, 18 मई को शेयर बाजार में मचे हाहाकार के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (INR vs USD) अपने अब तक के सबसे निचले ऐतिहासिक स्तर (Lifetime Low) पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में रुपया 96.20 प्रति डॉलर के करीब फिसल गया. आखिर रिजर्व बैंक (RBI) के अरबों डॉलर फूंकने और लगातार दखल देने के बाद भी रुपये की सेहत क्यों नहीं सुधर रही है? क्या कच्चा तेल ही इसका एकमात्र विलेन है, या इसके पीछे विदेशी निवेशकों (FPI) की कोई बड़ी चाल है? अगर आप भी यह सोच रहे हैं कि यह गिरावट कब थमेगी और आपकी जेब पर इसका क्या सीधा असर होने वाला है, तो आइए आसान भाषा में समझते हैं रुपये के कमजोर होने की 5  सबसे बड़ी वजहें क्या हैं... 

बता दें कि लगातार महंगे हो रहे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता ने भारतीय करेंसी पर दबाव बढ़ा दिया है.

Latest and Breaking News on NDTV

1. क्रूड ऑयल में तेजी से बढ़ी मुश्किल, डॉलर की भारी डिमांड

ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के चलते ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं.सोमवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी मजबूत बना हुआ है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है.भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. तेल आयात करने के लिए भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. तेल जितना महंगा होगा, देश में डॉलर की मांग उतनी ही बढ़ेगी. ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ रही है यही वजह है कि रुपये में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है.

2. विदेशी निवेशकों (FPI) की रिकॉर्ड  बिकवाली

मिडिल ईस्ट संकट शुरू होने के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से 20 अरब डॉलर (करीब ₹1.6 लाख करोड़) से ज्यादा की रकम निकाल ली है. यह भारत के इतिहास में विदेशी फंड्स की अब तक की सबसे तेज निकासी है. जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर भागते हैं, तो वे अपनी संपत्तियों को डॉलर में बदलकर ले जाते हैं, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ जाता है.

3. बढ़ता हुआ चालू खाता घाटा 

महंगे तेल आयात और कम होते डॉलर इनफ्लो की वजह से देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) इस वित्त वर्ष में जीडीपी के 2% के पार जाने का अनुमान है. बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के मुताबिक, यह साल 2012-13 के बाद का सबसे बड़ा घाटा हो सकता है. यह लगातार तीसरा साल होगा जब भारत 'बैलेंस ऑफ पेमेंट' में घाटे का सामना कर रहा है, जो कि बेहद चिंताजनक है.

4. ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उछाल

युद्ध के चलते वैश्विक अनिश्चितता इतनी बढ़ गई है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सरकारी बॉन्ड की यील्ड (Bond Yields) आसमान छू रही हैं. जब सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी या ग्लोबल बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से अपना जोखिम भरा निवेश निकालकर वहां सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं.

5. विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव

रुपये को बचाने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) लगातार अपने खजाने से डॉलर बाजार में बेच रहा है. संकट शुरू होने से पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) $720 बिलियन के पार था, जो अब घटकर करीब $697 बिलियन पर आ गया है. हालांकि यह अभी भी 11 महीने के आयात के लिए काफी है, लेकिन केंद्रीय बैंक की भी एक लिमिट है और सिर्फ दखल देने से बुनियादी संकट को नहीं टाला जा सकता.

2026 में एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बना रुपया

इस साल अब तक रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली प्रमुख करेंसी बन चुकी है. फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया करीब 5.5% टूट चुका है. सोमवार की गिरावट लगातार पांचवां कारोबारी सत्र था जब रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा.

RBI लगातार कर रहा दखल

बाजार के जानकारों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक लगातार डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है. शुक्रवार को भी केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप की वजह से रुपया 96 के ऊपर बंद होने से बच गया था.रिजर्व बैंक अब तक अरबों डॉलर खर्च कर चुका है. इसके अलावा सट्टेबाजी रोकने और तेल आयातकों के लिए विशेष डॉलर सुविधा जैसे कदम भी उठाए गए हैं.

हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि केवल हस्तक्षेप से रुपये को लंबे समय तक संभालना मुश्किल होगा. जब तक कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी पूंजी निकासी पर नियंत्रण नहीं होता, दबाव बना रह सकता है.

आखिर कब रुकेगी गिरावट और सरकार के पास क्या हैं विकल्प?

एक्सपर्ट्स और नोमुरा (Nomura) के एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में सरकार और आरबीआई को कुछ सख्त और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं.सरकार और रिजर्व बैंक आगे पेट्रोल-डीजल कीमतों में बदलाव, विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर नियंत्रण और एनआरआई जमा आकर्षित करने जैसे कदम उठा सकते हैं.

  • पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ाना ताकि कच्चे तेल के आयात और सब्सिडी के बोझ को कम किया जा सके.
  • विदेश भेजे जाने वाले पैसे (Remittances) पर नियंत्रण कड़ा किया जा सकता है.
  • NRIs को आकर्षित करने के लिए विशेष डॉलर डिपॉजिट स्कीम लाई जा सकती है ताकि देश में डॉलर का इन्फ्लो बढ़े.
  • भविष्य में महंगाई को काबू में करने के लिए आरबीआई ब्याज दरों (Interest Rates) में बढ़ोतरी का फैसला भी ले सकता है.

आम लोगों की जेब पर कैसे पड़ रहा असर?

कमजोर रुपये का असर अब आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है. आयातित कच्चे माल पर निर्भर कंपनियों की लागत बढ़ रही है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है. विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों पर भी इसका असर पड़ा है. शिक्षा सलाहकारों के मुताबिक रुपये की कमजोरी के कारण अमेरिका में पढ़ाई की लागत पिछले साल के मुकाबले 10 लाख रुपये तक बढ़ गई है.

छोटे कारोबार पर सबसे ज्यादा मार

काजू, फूड प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे छोटे और मझोले सेक्टर जो कच्चे माल के आयात पर निर्भर हैं, वे बर्बादी की कगार पर हैं. छोटे कारोबारियों के लिए करेंसी रिस्क को संभालना मुश्किल हो रहा है.केरल के काजू इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि अफ्रीका से आयात महंगा होने के कारण लागत बढ़ गई है और कई प्रोसेसिंग यूनिट्स बंद हो चुकी हैं.

ये भी पढ़ें-  Petrol Diesel Price Today: आज 18 मई को बदल गए पेट्रोल-डीजल के दाम, टंकी फुल कराने से पहले जान लें ताजा भाव

Stock Market Crash: मिडिल ईस्ट संकट से शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्‍स 1000 अंक लुढ़का, 7 लाख करोड़ स्वाहा

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com