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AI स्टार्टअप Emergent बनी यूनिकॉर्न, 6 महीने में कमाल! जानिए कहां से जुटाए 1200 करोड़ रुपये और आगे क्‍या है प्‍लान

बेंगलुरु के AI कोडिंग स्टार्टअप Emergent ने Series C राउंड में 130 मिलियन डॉलर जुटाकर $1.5 बिलियन की वैल्युएशन हासिल की है. सिर्फ 1 साल पुराने इस स्टार्टअप का सालाना राजस्व 120 मिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है. पढ़ें पूरी खबर.

AI स्टार्टअप Emergent बनी यूनिकॉर्न, 6 महीने में कमाल! जानिए कहां से जुटाए 1200 करोड़ रुपये और आगे क्‍या है प्‍लान
NDTV AI SUMMIT में पहुंचे थे CEO मुकुंद झा
(File Photo)

भारतीय AI स्टार्टअप 'इमर्जेंट' (Emergent) ने सफलता का एक नया इतिहास रच दिया है. कंपनी ने अपने सीरीज C फंडिंग राउंड में 130 मिलियन डॉलर (करीब 1,200 करोड़ रुपये) जुटाए हैं, जिसके साथ ही इसकी कुल वैल्यूएशन 1.5 अरब डॉलर (लगभग ₹12,500 करोड़) पर पहुंच गई है. इस निवेश के साथ ही इमर्जेंट भारत का सबसे नया 'यूनिकॉर्न' (Unicorn) स्टार्टअप बन गया है. दिलचस्प बात ये है कि पिछले महज 6 महीनों में कंपनी की वैल्यूएशन में 5 गुना का भारी उछाल आया है, जो AI स्टार्टअप्स में निवेशकों की भारी दिलचस्पी दिखा रहा है. 

इस ताजा निवेश के बाद इमर्जेंट द्वारा जुटाई गई कुल फंडिंग अब 230 मिलियन डॉलर हो गई है. बेंगलुरु बेस्‍ड इस स्टार्टअप ने साल की शुरुआत में 300 मिलियन डॉलर की वैल्युएशन पर सीरीज बी राउंड में 70 मिलियन डॉलर जुटाए थे.

छोटे व्यवसायों पर फोकस, बड़े निवेशकों का दांव

इस सीरीज सी राउंड का नेतृत्व प्राइवेट इक्विटी फर्म क्रेडिजेस (Creaegis) ने किया. इसके साथ ही एमएनआई वेंचर्स-क्लेपॉन्ड और सेंटिनल ग्लोबल जैसे नए निवेशक भी इस राउंड में शामिल हुए. कंपनी के पुराने निवेशकों-खोसला वेंचर्स, सॉफ्टबैंक विजन फंड 2, लाइटस्पीड और वाई कॉम्बिनेटर ने भी अपना भरोसा बरकरार रखा है.

यह फंडिंग ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में जनरेटिव एआई (Generative AI) के जरिए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को ऑटोमेट करने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. कर्सर, रिपॉजिट और लवेबल जैसे एआई कोडिंग टूल्स के बीच इमर्जेंट की रणनीति थोड़ी अलग है. 

प्‍लान को लेकर क्‍या बोले कंपनी के फाउंडर? 

डेवलपर्स को टारगेट करने के बजाय, यह उन छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMBs) और उद्यमियों को टारगेट कर रही है जो आज भी अपने काम के लिए स्प्रेडशीट, ईमेल और मैसेजिंग ऐप पर निर्भर हैं. को-फाउंडर और CEO मुकुंद झा ने कहा, 'हमारा उद्देश्य गंभीर निर्माताओं के लिए प्रोडक्शन-ग्रेड एप्लिकेशन बनाना है. यह ऐसा है जैसे आपको एक बॉक्स में पूरी इंजीनियरिंग टीम मिल रही हो.'

जून 2025 में हुई थी शुरुआत, आय 120 मिलियन डॉलर के पार

इस स्टार्टअप की शुरुआत जून 2025 में दो भाइयों, मुकुंद झा और माधव झा (CTO) ने की थी. कंपनी ने बताया कि उसका वार्षिक राजस्व रन रेट (ARR) 120 मिलियन डॉलर को पार कर गया है, जिसमें पिछले चार महीनों में 70% की वृद्धि हुई है. वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म के पास दुनिया भर में 2,00,000 से अधिक भुगतान करने वाले ग्राहक (Paying Customers) हैं, जिनमें शिपमेंट-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर बनाने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनियां और ईआरपी सिस्टम बनाने वाली निर्माण फर्में शामिल हैं.

वैश्विक स्तर पर पैर पसारने और हायरिंग की तैयारी

इमर्जेंट की कमाई का एक-तिहाई हिस्सा उत्तरी अमेरिका से और एक-तिहाई यूरोप से आता है, जबकि भारत की हिस्सेदारी लगभग 8% से 9% है. कंपनी अब यूरोप में अपना नया ऑफिस खोलने पर विचार कर रही है. मुकुंद झा के अनुसार, इस नए फंड का उपयोग एआई रिसर्च, प्रॉडक्ट डेवलपमेंट और ओपन-सोर्स एआई मॉडल को सपोर्ट करने के लिए किया जाएगा. वर्तमान में कंपनी के पास 200 कर्मचारी हैं. कंपनी की योजना इस साल के अंत तक अपने सैन फ्रांसिस्को कार्यालय में 30 से 40 नए कर्मचारियों को नियुक्त कर अमेरिका में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की है.

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Video: जब NDTV के AI समिट में पहुंचे थे Emergent Labs AI के CEO

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