भारत में डिजिटल पेमेंट और यूपीआई का डंका बज रहा है तो दूसरी तरफ बाजार में कैश का फ्लो पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा है. लेकिन इसके बावजूद देश में रिकॉर्ड तोड़ कैश होने के बाद भी सड़कों पर लगे एटीएम का इस्तेमाल पहले से कम हुआ है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार देश में कैश इन सर्कुलेशन यानी बाजार में घूमने वाली नकदी पिछले एक दशक में लगभग तीन गुना तक बढ़ी गई है. वित्त वर्ष 2017 में जहां बाजार में 13 लाख करोड़ रुपये का कैश था, वहीं वित्त वर्ष 2026 में ये आंकड़ा बढ़कर 41 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया.

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इसके अलावा नोटों की संख्या के हिसाब से भी देखें तो ये 10 हजार करोड़ पीस से बढ़कर 17 हजार करोड़ पीस से ज्यादा हो चुका है. लेकिन जैसे-जैसे कैश बढ़ा, वैसे ही देश का एटीएम नेटवर्क का इस्तेमाल कम होता चला गया. नतीजन वित्त वर्ष 2023 में देश में एटीएम 2.19 लाख से ज्यादा थे, जो वित्त वर्ष 2026 में कम होकर 2.09 लाख पर आ गए.

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कार्ड छोड़ रहे हैं लोग, घट रहा ट्रांजैक्शन
एटीएम से डेबिट कार्ड के जरिए पैसे निकालने की संख्या में भी कमी आई है. आरबीआई के डेटा के अनुसार वित्त वर्ष 2023 में जहां डेबिट कार्ड से 685 करोड़ बार एटीएम से ट्रांजैक्शन किए थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में ये कम होकर 534 करोड़ रह गया. अगर वैल्यूएशन के हिसाब से देखें तो एटीएम से होने वाली निकासी 32.6 लाख करोड़ रुपये से घटकर 28.6 लाख करोड़ रुपये पर आ गई है. इन आंकड़ों से साफ पता चल रहा है कि देश में कैश तो मौजूद है, लेकिन लोग अब उसे एटीएम से नहीं निकाल रहे हैं.

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बैंक के लिए क्यों घाटे का सौदा बन रहे एटीएम?
आखिर बैंक और ऑपरेटर एटीएम क्यों बंद कर रहे हैं? इसका जवाब देते हुए पंजाब एंड सिंध बैंक के सीनियर मैनेजर दीपक कुमार ने बताया कि, "एटीएम चलाना अब बैंक के लिए आर्थिक रूप से मुश्किल हो चला है. ऐसा इसलिए क्योंकि एटीएम की सेफ्टी के लिए 24 घंटे गार्ड रखना होता है. साथ ही आरबीआई के नियमों के अनुसार ई-सर्विलांस सिस्टम जरूरी है, जिससे बैंक की कॉस्ट बहुत बढ़ जाती है. अभी कुछ समय पहले एक बड़ी एटीएम मेंटेनेंस सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के दिवालिया हो जाने से हजारों एटीएम का कामकाज बंद हो गया था."
आरबीआई के आंकड़ों और बैंक के कर्मचारी के अनुसार आज के समय में एटीएम चलाना बैंकों के साथ कंपनियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. डिजिटल पेमेंट बढ़ने की वजह से लोग कम कैश निकाल रहे हैं, दूसरी तरफ एटीएम चलाने की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में बैंक धीरे-धीरे एटीएम कम कर सकते हैं. इसका सबसे ज्यादा असर शहरों से दूर रह रहे लोगों पर पड़ेगा, जहां पहले से ही एटीएम कम हैं.
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