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लो भई! अब साबुन-शैंपू हुआ महंगा, इस कंपनी ने बढ़ा दिए दाम, जानिए कितना बढ़ गया आपके बाथरूम का खर्च 

Soap-Shampoo Prices Hike: आपका मासिक बजट बढ़ने वाला है. देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी ने अपने साबुन और शैंपू ब्रैंड्स की कीमतों में 3% से 5% तक की बढ़ोतरी कर दी है. अंदर प‍ढें पूरी डिटेल.

लो भई! अब साबुन-शैंपू हुआ महंगा, इस कंपनी ने बढ़ा दिए दाम, जानिए कितना बढ़ गया आपके बाथरूम का खर्च 
HUL Soap Brands Prices Hike: साबुन ब्रैंड्स के दाम बढ़े

Soap-Shampoo Prices Hike: खुदरा महंगाई और थोक महंगाई बढ़ने की खबर के बाद एक और खबर आई है, जो मिडिल क्‍लास फैमिली को हल्‍का झटका दे सकती है. किचन का खर्च बढ़ने के बाद अब आपके बाथरूम का खर्च बढ़ सकता है. बहुत सारे घरों में इस्‍तेमाल किया जाने वाला साबुन और शैंपू महंगा हो गया है. दरअसल, HUL यानी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने साबुन ब्रैंड्स की कीमतों में बढ़ोतरी की है. NDTV Profit ने मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से बताया है कि कंपनी ने कंपनी ने कच्चे माल और पैकेजिंग लागत के बढ़ते दबाव का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का फैसला लिया है. 

3% से 5% तक बढ़ गए दाम

अगर आप डव (Dove), पियर्स (Pears) या लिरिल (Liril) जैसे साबुन का इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी होगी. देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी (FMCG) कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने अपने लोकप्रिय साबुन ब्रांडों की कीमतों में 3% से 5% तक की बढ़ोतरी कर दी है. खबरों के मुताबिक, शैंपू की कीमतें भी 4 से 6 फीसदी बढ़ी हैं. मिडिल क्‍लास परिवारों के लिए ये खबर उनके टॉयलेटरी बजट को प्रभावित करने वाली है.

अब कितने में मिलेंगे साबुन- शैंपू?

HUL ने अपने चुनिंदा ब्रांडों में प्रति 100 ग्राम 2 से 3 रुपये की बढ़ोतरी की है.

  • लिरिल (Liril): 100 ग्राम का पैक अब 39 रुपये के बजाय 41 रुपये का मिलेगा.
  • पियर्स (Pears): इसकी कीमत 50 रुपये से बढ़कर 52 रुपये हो गई है.
  • डव (White): डव के सफेद वेरिएंट की कीमत 60 रुपये हो गई है.
  • डव (Pink): सबसे ज्यादा बढ़ोतरी डव पिंक में देखी गई है, जो अब 70 रुपये प्रति 100 ग्राम के भाव पर मिलेगा.
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साबुन-शैंपू के दाम बढ़ने की 3 वजहें  

साबुन की कीमतों में इस इजाफे के पीछे तीन मुख्य वजहें हैं, जिन्‍हें समझना आपके लिए भी जरूरी है. 

  1. कच्चे माल का संकट: साबुन बनाने में इस्तेमाल होने वाला मुख्य तत्व 'पाम फैटी एसिड' (PFAD) वैश्विक बाजार में महंगा हो गया है. पाम तेल की कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर आपकी खरीदारी पर पड़ रहा है.
  2. पैकेजिंग कॉस्ट: सामान को पैक करने वाले कागज और प्लास्टिक की कीमतों में 15% से 50% तक का भारी उछाल आया है.
  3. जियो-पॉलिटिकल टेंशन: मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे तनाव के कारण रसायनों की सप्लाई बाधित हुई है और माल ढुलाई (Freight) का खर्च बढ़ गया है.

कमजोर मॉनसून और गांवों में खपत से कनेक्‍शन 

चिंता की बात केवल कीमतों का बढ़ना नहीं है. मौसम विभाग (IMD) ने 2026 के लिए सामान्य से कम मॉनसून का अनुमान जताया है. इसका मतलब है कि ग्रामीण इलाकों में खेती पर असर पड़ेगा और लोगों की खर्च करने की क्षमता कम होगी. कम मांग और बढ़ती लागत के बीच, कंपनियां आने वाले समय में अन्य उत्पादों के दाम भी बढ़ा सकती हैं.

आप ऐसे कम कर सकते हैं अपना खर्च

एक औसत परिवार, जहां महीने में 5 से 10 साबुन की खपत होती है, उनके बजट में सालाना तौर पर 200 से 400 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है. जानकार सलाह देते हैं कि ऐसे समय में 'कॉम्बो पैक' या 'फैमिली पैक' खरीदना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि सिंगल यूनिट के मुकाबले इनमें प्रति ग्राम कीमत थोड़ी कम पड़ती है. साथ ही, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर मिलने वाले ऑफर्स और डिस्काउंट का लाभ उठाकर भी आप इस महंगाई से थोड़ी राहत पा सकते हैं.

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