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Home Buying: होमबायर्स के लिए गुड न्यूज, इन 6 बड़े शहरों में अब भी बजट में मिल रहा है घर, कहां सबसे सस्ता?

Property Market Report: नाइट फ्रैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ब्याज दरों में कटौती से देश के 6 प्रमुख शहरों में घर खरीदारों को बड़ी राहत मिली है. जानिए आपके शहर में घर खरीदना कितना सस्ता या महंगा हुआ.

Home Buying: होमबायर्स के लिए गुड न्यूज, इन 6 बड़े शहरों में अब भी बजट में मिल रहा है घर, कहां सबसे सस्ता?
Housing Affordability H1 2026: देश के 6 बड़े शहरों में घर खरीदना हुआ आसान, जानें दिल्ली-मुंबई का हाल

Cheapest City To Buy Home: अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. लेकिन महंगाई और लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किस शहर में आज भी बजट में घर मिल सकता है. अगर आप भी घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है. Knight Frank India की Housing Affordability Index H1 2026 की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि  देश के 8 बड़े शहरों में से 6 शहर ऐसे हैं, जहां घर खरीदना अब  भी किफायती है. वहीं, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई अब भी आम खरीदारों के बजट से बाहर बने हुए हैं.

कौन सा शहर है घर खरीदने के लिए सबसे सस्ता?

रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद देश के 8 बड़े शहरों में घर खरीदने के लिहाज से सबसे किफायती शहर  है. यहां हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रेशियो 23% है. इसका मतलब है कि  औसतन एक परिवार की इनकम का 23% हिस्सा ही होम लोन की EMI पर खर्च होता है.

इसके बाद कोलकाता (25%) और पुणे (28%) का किफायती शहरों की लिस्ट में शामिल हैं. ये शहर भी घर खरीदने वालों के लिए आसान ऑप्शन माने गए हैं.

इन 6 शहरों में अब भी बजट में मिल रहा है घर

Knight Frank India की रिपोर्ट के अनुसार,  ट्रैक किए गए 8 शहरों में से 6 शहर 50% की अफोर्डेबिलिटी लिमिट के भीतर हैं. इसका मतलब है कि इन शहरों में घर खरीदना अभी भी आसान माना जा रहा है.

दिल्ली-NCR और मुंबई अब भी सबसे महंगे

रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) अब भी 50% की अफोर्डेबिलिटी लिमिट से ऊपर हैं, जिससे यहां घर खरीदना दूसरे शहरों की तुलना में अधिक महंगा बना हुआ है.NCR का अफोर्डेबिलिटी रेशियो 65% दर्ज किया गया है, जिससे यह देश के सबसे कम किफायती बाजारों में बना हुआ है. इसका मतलब है कि इन शहरों में किसी एक परिवारों की इनकम का बड़ा हिस्सा होम लोन की EMI चुकाने में खर्च करना पड़ता है.

बेंगलुरु और NCR में थोड़ी और बढ़ी चुनौती

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 के मुकाबले बेंगलुरु (35%) और NCR (65%) में घर खरीदना थोड़ा और महंगा हुआ है. जबकि बाकी शहरों में अफोर्डेबिलिटी का लेवल लगभग स्टेबल बना रहा.

अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स कैसे तय होता है?

Housing Affordability Index यह बताता है कि किसी परिवार की कुल इनकम का कितना प्रतिशत हिस्सा होम लोन की EMI चुकाने में जाता है.यह इंडेक्स बताता है कि घर खरीदना किसी शहर में कितना आसान या मुश्किल है.जितना कम यह प्रतिशत होगा, उतना ही शहर घर खरीदने के लिए किफायती माना जाता है. 

RBI की ब्याज दरों में कटौती से खरीदारों को मिली राहत

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI द्वारा कुल 125 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर कटौती का फायदा होम लोन लेने वालों को मिला है. इससे होम लोन की लागत कम हुई और घर खरीदने की क्षमता को सपोर्ट मिला.  इससे होम लोन अफोर्डेबल बने हैं और रिहायशी घरों की बिक्री 2024 के बाद दर्ज हुए मजबूत स्तर के आसपास बनी रहने की उम्मीद है.रिपोर्ट का अनुमान है कि इसका पॉजिटिव असर  दूसरी छमाही (H2 2026) में भी हाउसिंग डिमांड पर देखने को मिल सकता है.

कोविड  महामारी से लेकर अब तक कैसे बदला अफोर्डेबिलिटी का गणित?

रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान RBI ने रेपो रेट को कई साल के निचले स्तर पर पहुंचा दिया था, जिससे घर खरीदना पहले की तुलना में अधिक किफायती हुआ.लेकिन मई 2022 से बढ़ती महंगाई को देखते हुए RBI ने करीब 9 महीनों में ररेपो रेट में कुल 250 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की. इसका असर होम लोन की EMI पर पड़ा और 2022 में घर  खरीदना पहले के मुकाबले महंगा हो गया.इसके बाद 2023 की शुरुआत से ब्याज दरों में स्थिरता आने से स्थिति संभली, लेकिन लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों ने खासकर NCR में अफोर्डेबिलिटी पर दबाव  बना रहा.

आगे क्या रहेगा रियल एस्टेट मार्केट ट्रेंड?

Knight Frank India के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल के मुताबिक, प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से अफोर्डेबिलिटी में सुधार की रफ्तार कुछ धीमी हुई है.हालांकि मजबूत रोजगार,स्टेबल इनकम और बेहतर फाइनेंसिंग माहौल अब भी हाउसिंग डिमांड को सहारा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि आगे भी अगर इनकम में लगातार बढ़ोतरी होती है और रियल एस्टेट बाजार का बैलेंस बना रहता है, तो घर खरीदने की क्षमता मजबूत रहेगी और लंबे समय तक हाउसिंग मार्केट के ग्रोथ को सपोर्ट मिलता रहेगा.

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