जंग के बीच मई महीने में सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था. देश के रुपये की गिरावट को थामने के लिए फॉरेक्स रिजर्व को बचाना जरूरी था. इसलिए ये कदम उठाया गया. अब इस फैसले का असर आंकड़ों में साफ देखने को मिल रहा है. डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के अनुसार देश ने सिर्फ एक महीने में 2011 मिलियन डॉलर यानी करीब 182,980 करोड़ रुपये बचा लिए हैं.

gold import duty hike impact
समझिए अप्रैल और मई का गणित
मालूम हो कि देश सोने का बड़ा खरीदार रहा है. यहां शादी-ब्याह और त्योहारों पर सोने खरीदने की अपनी परंपरा है. पर इस सोने को बाहर से खरीदने के लिए देश की सरकार को डॉलर में पेमेंट करना होता है. आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल 2026 में भारत ने जहां 5,627 मिलियन यूएस डॉलर का सोना इंपोर्ट किया था, वहीं मई 2026 यानी ड्यूटी बढ़ने के बाद ये आंकड़ा गिरकर 3,616 मिलियन यूएस डॉलर पर आ गया. यानी सीधे 2,011 मिलियन डॉलर की इसमें कमी आई. अब इसे अगर आज के रुपये के भाव से देखें तो ये अमाउंट 18,980 करोड़ रुपये होता है. यानी ये वो पैसा है जो देश से बाहर जाने से बच गया.
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सोने के आयात में 70 फीसदी की गिरावट
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार मई में 15% बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से इसके आयात में बड़ी कमी आई है. पहले जहां देश हर महीने 75 से 100 टन सोना खरीद रहा था, वहां ये नंबर घटकर 15 से 30 टन पर आ गया. यानी मात्रा के हिसाब से सोने के आयात में 70% की बड़ी गिरावट देखी गई है. हालांकि इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें ऊंची होने की वजह से इसके वैल्यू में इजाफा हुआ है. अप्रैल-मई के दौरान सोने का आयात 60.14% बढ़कर 9.04 अरब डॉलर हो गया.
बचे हुए पैसे का इस्तेमाल कहां-कहां हो पाएगा
सोने की खरीद कम होने से जो पैसा बचा उसका इस्तेमाल सरकार कई जरूरी कामों में कर सकती है. मिडिल ईस्ट की टेंशन की वजह से कच्चे तेल को लेकर खूब टेंशन रही. हालांकि अब स्थिति नॉर्मल हो रही है, तो तेल की कीमतें भी पहले के स्तर पर आ गईं हैं. फिर भी अभी इसका असर देश से खत्म होने में समय लग सकता है. इसलिए सरकार इस पैसे से अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीद सकती है. साथ ही किसानों और खेती के लिए जरूरी उर्वरक का ज्यादा आयात कर सकती है. इसके अलावा देश के अंदर मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाने का फैसला भले ही आम नागरिक, जो सोने के शौकीन हैं, उन्हें परेशान करने वाला हो सकता है पर लॉन्ग टर्म में ये भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूत करने के लिए एक अच्छा साबित हो रहा है.
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