- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को सकारात्मक बताया, कहा कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे
- वित्त मंत्री ने आर्थिक विकास के लिए यथार्थवादी और सतर्क लक्ष्य निर्धारित करने की सरकार की नीति को स्पष्ट किया
- उन्होंने ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंश और व्यापार प्रतिबंधों को भारत के आर्थिक जोखिमों का प्रमुख कारण बताया गया
वैश्विक अनिश्चितताओं, शेयर बाजार की उठापटक, विदेशी निवेश के सवाल, टैक्स और सट्टेबाजी की बहस, राज्यों की कर्ज नीति और तमिलनाडु की सियासत... NDTV Profit के 'इंडिया: द रियल डील' कॉन्क्लेव में बतौर चीफ स्पीकर पहुंची वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हर तरह के सवालों के जवाब दिए. बजट के बाद ये उनका सबसे विस्तृत और सबसे शानदार इंटरव्यू रहा. ये सिर्फ बजट के बाद की चर्चा (Post Budget Discussion) नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और राजनीतिक दिशा को समझने की एक चाबी है. NDTV ग्रुप के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने वित्त मंत्री से उन सवालों और संशयों पर तस्वीर साफ करने की कोशिश की, जो देश के लाखों लोगों के मन में चल रहे हैं. इस लंबे संवाद में वित्त मंत्री ने साफ शब्दों में बताया कि सरकार किन जोखिमों को लेकर सतर्क है, किन मोर्चों पर आश्वस्त है और आगे का रोडमैप क्या है.
यहां 15 प्वाइंट्स में जानिए पूरे इंटरव्यू का निचोड़.
1). ट्रेड डील: माहौल सकारात्मक, लेकिन नंबरों से दूरी क्यों?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को वित्त मंत्री ने 'मनोबल बढ़ाने वाला' बताया, खासकर निर्यातकों और नए बाजार तलाशने वालों के लिए. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने GDP ग्रोथ का कोई नया अनुमान देने से इनकार किया. उनका तर्क साफ है-सरकार का काम अनुमान गिनाना नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी रखना है. उनका कहना है कि ट्रेड डील जैसी घटनाएं निश्चित रूप से मदद करती हैं, लेकिन वैश्विक हालात इतने अस्थिर हैं कि जल्दबाजी में आंकड़े तय करना ठीक नहीं.
2). ग्रोथ अनुमान में 'कंजरवेटिव' क्यों दिखती है सरकार
निर्मला सीतारमण ने यह धारणा खारिज की कि सरकार जानबूझकर कम लक्ष्य रखती है. उनके मुताबिक बैंकिंग और फाइनेंस जैसे सेक्टर में ज्यादा आक्रामक अनुमान खतरनाक हो सकते हैं. बीते वर्षों में सरकार ने जो भी अनुमान दिए, वे जमीनी हकीकत पर आधारित थे. उनका मानना है कि यथार्थवादी लक्ष्य तय करना आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है, भले ही इसे बाहर से 'कंजरवेटिव अप्रोच' कहा जाए.

3). आज भी सबसे बड़ा खतरा: बाहरी दुनिया
वित्त मंत्री के अनुसार, घरेलू मोर्चे पर भारत अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है-चाहे वह मैन्युफैक्चरिंग हो, MSME हों या कृषि. लेकिन वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं खत्म नहीं हुई हैं. भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंध और वैश्विक नीति फैसले भारत को भी प्रभावित करते हैं. यही कारण है कि सरकार हर फैसले में 'रिस्क-रेडीनेस' बनाए रखना चाहती है.
4). मजबूत इकोनॉमी के बावजूद FII क्यों जा रहे हैं?
इस सवाल पर निर्मला सीतारमण ने अहम बात कही-फंड फ्लो अब सिर्फ मुनाफे से तय नहीं होते. रणनीतिक और राजनीतिक हित भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतक कई वर्षों से मजबूत हैं, फिर भी निवेश का रुख उम्मीद से कम है. यह भारत-विशेष समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक ट्रेंड है, जहां पूंजी का इस्तेमाल एक टूल की तरह हो रहा है.
5). 'भारत के पास AI स्टोरी नहीं'-इस दावे को क्यों नकारती हैं FM
विदेशी निवेशकों के AI को लेकर संदेह पर वित्त मंत्री ने साफ कहा कि भारत AI-रेडी मैनपावर तैयार करने में तेजी से आगे बढ़ रहा है. उनके मुताबिक, भारत का AI मॉडल सिर्फ चिप्स या डेटा सेंटर तक सीमित नहीं, बल्कि स्किल और टैलेंट पर आधारित है. चीन को छोड़ दें तो बहुत कम देश हैं जो AI के लिए इतने बड़े पैमाने पर मानव संसाधन तैयार कर रहे हों.
6). STT बढ़ाने का मकसद क्या है-कमाई या चेतावनी?
फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT बढ़ाने को लेकर वित्त मंत्री ने साफ किया कि इसका मकसद राजस्व नहीं, बल्कि डिटरेंस है. SEBI के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 90% रिटेल निवेशक F&O में नुकसान उठाते हैं, खासकर कम आय और गैर-मेट्रो क्षेत्रों के लोग. सरकार छोटे निवेशकों को अंधाधुंध सट्टेबाजी से बचाना चाहती है.
7). क्या टैक्स बढ़ाने से सट्टेबाजी रुक जाएगी?
निर्मला सीतारमण ने माना कि STT कोई 'मैजिक सॉल्यूशन' नहीं है. इससे सट्टेबाजी पूरी तरह खत्म नहीं होगी, लेकिन सरकार मूकदर्शक भी नहीं बन सकती. SEBI और सरकार-दोनों अपने-अपने स्तर पर सीमित दखल दे रहे हैं. फिलहाल इससे आगे कोई सख्त कदम उठाने का इरादा नहीं है.
8). क्रिप्टो और गेमिंग: सरकार क्यों बीच का रास्ता चुन रही है
क्रिप्टो और रियल मनी गेमिंग पर टैक्स नीति को लेकर उन्होंने कहा कि इसका फायदा यह है कि कम से कम गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है. कुछ कंपनियों के बाहर जाने के बावजूद टेक्नोलॉजी की कोई सीमा नहीं होती. अगर वे भारतीय बाजार को सर्व कर रही हैं, तो भारत को फायदा मिलेगा. सरकार संतुलन चाहती है-न आंख मूंदकर छूट, न पूरी तरह बंदिश.
9). कैपेक्स क्यों प्राथमिकता, रेवेन्यू खर्च में क्यों कसावट
वित्त मंत्री ने कहा कि कैपेक्स भविष्य की क्षमता निर्माण का आधार है, इसलिए इसमें कटौती नहीं की गई. रेवेन्यू खर्च में बदलाव नए वित्त आयोग चक्र और स्कीम्स की समीक्षा से जुड़ा है. कई मदों में जीरो-बेस्ड अप्रोच अपनाई जा रही है, ताकि खर्च सिर्फ जरूरत के हिसाब से बढ़े.
10). तमिलनाडु की राजनीति पर FM क्यों इतनी मुखर दिखीं
तमिलनाडु पर बोलते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि DMK का व्यवहार उसकी घबराहट दिखाता है. मुफ्त घोषणाएं, मंदिर दौरे और केंद्र-विरोधी बयान-ये सब संकेत हैं कि राज्य की राजनीति अब बदल रही है. उनके मुताबिक मतदाता अब सिर्फ 'केंद्र बनाम राज्य' नहीं, बल्कि स्थानीय प्रदर्शन पर भी सवाल कर रहे हैं.
11). दक्षिणी राज्यों से भेदभाव? FM ने किया खंडन
उन्होंने माना कि दक्षिणी राज्यों ने बेहतर प्रदर्शन किया है और इसी वजह से 16वें वित्त आयोग ने GDP योगदान को वेटेज दिया. लेकिन 'उत्तर बनाम दक्षिण' जैसे नारेटिव को उन्होंने राजनीतिक हथकंडा बताया. उनके अनुसार, केंद्र की ओर से कोई भेदभाव नहीं है, बल्कि राज्यों की दलीलों को संस्थागत मान्यता मिली है.
12). फ्रीबीज पर सख्त लाइन: कर्ज से वादे खतरनाक
वित्त मंत्री ने साफ कहा कि अगर राज्य के पास संसाधन हैं और विधानसभा की मंजूरी है, तो फ्रीबीज पर आपत्ति नहीं. लेकिन PSU और बोर्ड्स से कर्ज लेकर योजनाएं चलाना गलत है. इससे FRBM कानून टूटता है और आने वाली पीढ़ियों पर बोझ पड़ता है. केंद्र कई राज्यों की कर्ज पुनर्संरचना में मदद भी कर रहा है.
13). डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन का असली मतलब
सरकार अब 'स्ट्रैटेजिक बनाम नॉन-स्ट्रैटेजिक' की बहस से आगे बढ़ चुकी है. नॉन-कोर सेक्टर में सरकार की मौजूदगी न्यूनतम होगी. जहां हिस्सेदारी बहुत ज्यादा है, वहां पहले पब्लिक फ्लोट बढ़ाया जाएगा. जिन मामलों में कैबिनेट की मंजूरी है, वहां पूरी बिक्री या निजीकरण किया जाएगा.
14). प्राइवेट कैपेक्स पर सीधा संदेश
वित्त मंत्री ने उद्योग जगत से साफ कहा-मांग मजबूत है, माहौल अनुकूल है. अगर पॉलिसी में कोई रुकावट है तो बताइए, सरकार सुधार करेगी. लेकिन निवेश से पीछे हटने का अब कोई ठोस कारण नहीं बचा है. भारत की ग्रोथ में निजी क्षेत्र को पूरी ताकत से हिस्सेदारी निभानी होगी.
15). टैक्स, डेटा और निवेशकों का भविष्य
आने वाले समय में टैक्स कलेक्शन में डेटा-आधारित 'नज' का इस्तेमाल बढ़ेगा, ताकि ईमानदार करदाताओं को सहूलियत मिले. SIP और म्यूचुअल फंड्स की बढ़ती ताकत को वित्त मंत्री ने भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. अब जरूरत है निवेशक शिक्षा, भरोसे और पारदर्शिता को और मजबूत करने की.
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