Strait of Hormuz Closure: लगभग 5 हफ्तों के बाद जैसे ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की खबर दुनिया के सामने आई, वैसे ही आम लोगों के साथ निवेशकों ने राहत भरी सांस ली. हालांकि ये राहत 24 घंटे भी नहीं चल पाई. ईरान ने एक बार फिर से होर्मुज के रास्ते बंद करने का ऐलान कर दिया. दूसरी तरफ यूक्रेन ने रूस के बड़े तेल डिपो पर ड्रोन हमला कर आग में घी डालने का काम किया. इन दोनों खबरों से साफ है कि कच्चे तेल की कीमतों में आग लगना तय है.
नतीजन देशों के सामने महंगाई का डर मंडराने लगा है. निवेशक फिर शेयर मार्केट में उठा-पटक के दौर को झेलने के लिए तैयार हो रहे है. सवाल यही कि आखिर ईरान ने अपने कदम वापस क्यों लिए? क्या फिर से कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी होने जा रही है? साथ ही इन सभी जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर भारत पर क्या रहने वाला है? इन सभी सवालों के जवाब इस खबर में आपको देते हैं.
होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल चोक पॉइंट है. ओमान और ईरान के बीच मौजूद ये संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक तेल व्यापार का एंट्री गेट है. दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते से जाता है. अमेरिका के ईरानी बंदरगाहो पर नाकाबंदी जारी रखने की बात के बाद ईरान ने इसे एक बार फिर से बंद कर दिया है. जहाजों पर हमलों और रास्ते में रुकावट के बीच समुद्री बीमा की दरें बढ़ा गईं है, जिससे लागत में बड़ा इजाफा हुआ है.

Strait of Hormuz Closure
यूक्रेन का रूसी तेल डिपो पर हमला
इधर मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य हुए नहीं है, दूसरी तरफ यूक्रेन ने रूस के तेल भंडारों और रिफाइनरियों को निशाना बनाया है. मालूम हो कि रूस दुनिया के सबसे बड़े ऑयल प्रोडक्शन देशों में से एक है. उसके सप्लाई नेटवर्क में आने वाली एक छोटी सी रुकावट भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल तक उछाल सकती है.
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कच्चे तेल की कीमतों का हाल
जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की बात कही थी तो अनुबंधित क्रूड ऑयल की कीमतों में 11 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी. अब एक बार फिर तेल की कीमतों में आग लगने की पूरी आशंका है. मई 2026 के अनुबंध के लिए क्रूड ऑयल का वायदा भाव 83.85 डॉलर प्रति बैरल है. हालांकि सोमवार को मार्केट खुलते ही इसमें बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर होर्मुज ऐसे ही पूरा बंद रहता है, तो ये आंकड़ा 120 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकता है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत के लिए ये खबर दोहरी मार के जैसे है. कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत में थोक महंगाई दर (WPI) को करीब 0.9% तक बढ़ा सकती है. अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तो तेल कंपनियों पर कीमतों को बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा. इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर पड़ेगा, जिससे फल, सब्जी और अनाज की कीमतें बढ़ जाएंगी. तेल खरीदने के लिए भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हो सकता है.
करीब 5 हफ्ते से बंद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर स्थिति हर दिन बदल रही है. उम्मीद करते हैं आने वाले समय में इसे लेकर जल्दी से गुड न्यूज आए और दुनियाभर के बाजारों में उठा-पटका का दौर खत्म हो.
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