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ऑनलाइन शॉपिंग का फर्जीवाड़ा खत्‍म! न हिडेन चार्ज, न सर्च में होगा धोखा, इस तारीख से लागू होंगे नए नियम

Consumer Protection (E-Commerce) (Ammendment) Rules 2026: सरकार ने ई-कॉमर्स यानी ऑनलाइन शॉपिंग में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नए नियम नोटिफाई किए हैं. जानिए आपको क्‍या फायदे होंगे.

ऑनलाइन शॉपिंग का फर्जीवाड़ा खत्‍म! न हिडेन चार्ज, न सर्च में होगा धोखा, इस तारीख से लागू होंगे नए नियम
ऑनलाइन शॉपिंग में अब नहीं होगी धोखाधड़ी
(NDTV File Photo)

Online Shopping New Rules and Regulations: फेस्टिव सीजन की शुरुआत होने वाली है और इसी के साथ शुरू होगी ऑनलाइन फेस्टिव सेल. बड़े-बड़े बैनर लगेंगे, टीवी से लेकर मोबाइल तक... विज्ञापनों की भरमार दिखेगी. सेल-सेल-सेल, 90% तक की छूट. ऑनलाइन ऐप पर आप कोई आइटम सर्च करेंगे तो ऊपर जबरन स्‍पॉन्‍सर्ड प्रॉडक्‍ट दिखाए जाएंगे. 8,000 रुपये से कम की टीवी सर्च करेंगे तो सबसे ऊपर 13,000 वाली टीवी दिखेगी. ऑर्डर करने जाएंगे तो अंट-शंट चार्जेस के साथ 700-800 रुपये एक्‍सट्रा भी लिए जा सकते हैं. 

ऐसे तमाम तरह के झोल-झंझट और फर्जीवाड़े आने वाले दिनों में खत्‍म होने वाले हैं. ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए सरकार ने नए नियम बनाए हैं. ये सारे नियम अमेजन, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा, स्‍नैपडील, शॉप्‍सी, मीशो जैसे ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म पर लागू होंगे. कंपनियां न तो सर्च रिजल्ट में हेरफेर कर सकेंगी, न हिडेन चार्ज ले सकेंगी. स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट को साफ तौर पर बताना होगा, डिस्काउंट के साथ पुरानी कीमत भी दिखानी होगी और ग्राहकों की शिकायतों के लिए सरकार के नेशनल कंज्‍यूमर हेल्‍पलाइन से जुड़ना होगा. 

कब से लागू होंगे ऑनलाइन शॉपिंग के नए नियम?

दरअसल, सरकार उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कंज्‍यूमर प्रोटक्‍शन (E-Commerce) रूल्‍स, 2020 में संशोधन करते हुए कंज्‍यूमर प्रोटक्‍शन (E-Commerce) अमेंडमेंट रूल्‍स, 2026 जारी किए हैं. नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे. सरकार का कहना है कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस में बदलते बिजनेस मॉडल, डिजिटल तरीके और ग्राहकों की शिकायतों को देखते हुए नियमों को मजबूत किया गया है. 

ई-कॉमर्स के नए नियम आसान भाषा में समझें 

सरकार के मुताबिक, 2025 में NCH को कुल 17,71,622 शिकायतें मिली थीं. इनमें से 5,11,196 शिकायतें, यानी करीब 29%, ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़ी थीं. इससे पता चलता है कि ऑनलाइन शॉपिंग में रिफंड, डिलीवरी, गलत प्रोडक्ट, खराब सामान और सेलर से जुड़े विवाद बड़ी समस्या बने हुए हैं. नए नियमों से शिकायतों में कमी आने की उम्‍मीद है. 

  1. सर्च रिजल्ट में गड़बड़ी नहीं होगी: वेबसाइट या ऐप आपके सर्च के हिसाब से सही प्रोडक्ट दिखाने के बजाय आपको भटकाने वाले नतीजे नहीं दिखा सकेगी. यानी आप 'मोबाइल कवर' खोजें और प्लेटफॉर्म जानबूझकर असंबंधित या महंगे प्रोडक्ट ऊपर न दिखाए.
  2. विज्ञापन वाले प्रोडक्ट पर साफ जानकारी: जो प्रोडक्ट पैसे देकर ऊपर दिखाए जाते हैं, उन्हें साफ तौर पर ‘Sponsored' या ‘विज्ञापन' लिखकर बताया जाएगा. ग्राहक को समझ आ सकेगा कि वह प्रोडक्ट सर्च में सबसे ऊपर क्यों दिख रहा है.
  3. डिस्काउंट में पुरानी कीमत भी दिखेगी: अगर कंपनी किसी सामान पर छूट का दावा करती है, तो उसे नई कम कीमत के साथ पुरानी कीमत भी बतानी होगी. पुरानी कीमत वही मानी जाएगी, जिस पर वह सामान डिस्काउंट घोषित होने से पहले के 30 दिनों में सबसे कम दाम पर बेचा गया था.
  4. ‘डार्क पैटर्न' पर रोक: ऐप और वेबसाइट ऐसे भ्रामक तरीके नहीं अपना सकेंगी जिनसे ग्राहक अनजाने में कोई चीज खरीद ले या अतिरिक्त पैसा चुका दे. जैसे कार्ट में बिना पूछे प्रोडक्ट जोड़ देना, सब्सक्रिप्शन बंद करने का विकल्प छिपाना या पेमेंट के समय अचानक शुल्क जोड़ देना.
  5. हर साल कंपनियों को अपनी जांच करनी होगी: ई-कॉमर्स कंपनियों को हर साल जांच करनी होगी कि वे डार्क पैटर्न रोकने वाले नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं. इसके बाद उन्हें नियमों के पालन का प्रमाणपत्र वेबसाइट या ऐप पर साफ दिखाई देने वाली जगह पर लगाना होगा.
  6. प्रोडक्ट की पूरी जानकारी मिलेगी: मार्केटप्लेस वेबसाइटों को सामान की best before/use before तारीख, रिटर्न और रिफंड नियम, वारंटी, डिलीवरी का समय तथा पेमेंट से जुड़ी जानकारी देनी होगी. इससे ग्राहक खरीदारी से पहले बेहतर फैसला कर सकेगा.
  7. बेकार के बंडल्‍ड चार्ज नहीं: ऑनलाइन मार्केटप्लेस ऐसी सेवाओं के लिए एक साथ अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकेंगे, जिनका खरीदारी वाली सेवा से सीधा संबंध नहीं है. हालांकि, loyalty या membership programme के लिए नियमों में तय अपवाद लागू रह सकते हैं.
  8. इंपोर्टेड प्रोडक्ट की पहचान साफ होगी: विदेश से आयात किए गए सामान पर यह बताना जरूरी होगा कि वह किस देश में बना है और भारत में उसका आयातक कौन है. इससे ग्राहक को प्रोडक्ट की उत्पत्ति और जिम्मेदार कंपनी की जानकारी मिल सकेगी.
  9. बिना साफ अनुमति डेटा का उपयोग नहीं: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ग्राहक की निजी जानकारी का इस्तेमाल उसकी स्पष्ट सहमति के बिना तय कामों के लिए नहीं कर सकेंगे. केवल पहले से टिक किए हुए बॉक्स या शर्तों में छिपी मंजूरी पर्याप्त नहीं मानी जाएगी.
  10. शिकायत की कॉपी मिलेगी: अगर आप किसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट या ऐप पर शिकायत दर्ज करते हैं, तो कंपनी को उसकी कॉपी आपको देनी होगी. इससे आपके पास यह रिकॉर्ड रहेगा कि शिकायत कब और किस बात को लेकर की गई थी. हर ई-कॉमर्स कंपनी को कंज्‍यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट की नेशनल कंज्यूमर हेल्‍पलाइन से जुड़ना होगा.

अब कुछ उदाहरण से समझ लीजिए  

मान लीजिए किसी मोबाइल कवर को पिछले 30 दिनों में सबसे कम 499 रुपये में बेचा गया था और सेल में उसकी कीमत 399 रुपये कर दी गई. तब वेबसाइट को 399 रुपये की नई कीमत के साथ 499 रुपये की प्रायर प्राइस दिखानी होगी. वह सिर्फ ज्यादा डिस्काउंट दिखाने के लिए किसी काल्पनिक ऊंची कीमत को पुरानी कीमत की तरह नहीं दिखा सकेगी.

इसी तरह मान लीजिए कि आप 1,000 रुपये से कम का वायरलेस ईयरफोन सर्च करते हैं, तो ऐप बिना स्‍पष्‍ट सूचना के 2,500 रुपये वाला स्पॉन्सर्ड ईयरफोन सबसे ऊपर रखकर पेश नहीं कर सकेगा. स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट को स्पष्ट रूप से 'Sponsored' या 'विज्ञापन' जैसे लेबल के साथ दिखाना होगा.

नए नियमों से ऑनलाइन कंपनियों को भी अपने सर्च एल्गोरिद्म, डिस्काउंट दिखाने के तरीके, ग्राहक डेटा के उपयोग, शिकायत निवारण प्रणाली और सेलर डिस्क्लोजर की समीक्षा करनी होगी. सरकार का उद्देश्य ई-कॉमर्स की तेजी से बढ़ती दुनिया में ग्राहक अधिकारों और कारोबार के बीच संतुलन बनाना है.

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