Dollar Industries Ltd. Founder Deendayal Gupta Death: सलमान खान से लेकर अक्षय कुमार और सैफ अली खान तक और यामी गौतम से लेकर चित्रांगदा सिंह तक, बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज जिस कंपनी के ब्रैंड एंबेसडर रहे, पुरुष और महिलाओं अंडरवियर, इनरवियर, कैमिसोल जैसे होजरी प्रॉडक्ट्स का प्रचार किया, उस 'डॉलर इंडस्ट्रीज' के फाउंडर दीनदयाल गुप्ता (Deendayal Gupta) का शनिवार को निधन हो गया. वे 88 वर्ष के थे और और लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे. वे अपने पीछे पत्नी, चार बेटे-बहुओं और पोते-पोतियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. करीब 54 साल पहले उन्होंने डॉलर इंडस्ट्रीज की नींव रखी थी, जो उस समय भवानी टेक्सटाइल्स हुआ करती थी. आज वो कंपनी 1,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस एंपायर बन चुकी है.
NDTV की स्पेशल सीरीज 'ब्रैंड स्टोरी' (Brand Story) में आज कहानी, दीनदयाल गुप्ता और डॉलर इंडस्ट्रीज के संघर्ष की और उनकी सफलता की.
हरियाणा में जन्मे, कोलकाता पहुंचे और शुरू किया व्यापार
दीनदयाल गुप्ता का जन्म हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था. उनका पैतृक गांव मानहेरू पड़ता है, जहां 13 सितंबर, 1937 को एक सामान्य परिवार में उनका जन्म हुआ. गांव में बहुत कुछ कर पाना संभव नहीं था, तो वे मौकों की तलाश में पहुंचे कोलकाता. साल था- 1962. वहां वे शहर के होजरी इंडस्ट्री में काम करने लगे. करीब एक दशक तक उन्होंने इंडस्ट्री में अनुभव हासिल किया. ग्राहकों की जरूरत समझी, मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के गुर सीखे और फिर अपना व्यवसाय शुरू करने की सोची.

1972 में खुद की कंपनी शुरू की और मेहनत से बढ़ाया कारोबार
होजरी इंडस्ट्री का काम वगैरह समझने के बाद साल 1972 में उन्होंने बहुत कम पूंजी के साथ अपना बिजनेस शुरू किया. उन्होंने तब 'भवानी टेक्सटाइल्स' नाम से एक छोटी-सी होजरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की नींव रखी. शुरुआती वर्षों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. कुछ वर्ष बीते और व्यवसाय धीरे-धीरे खड़ा होने लगा. 1986 में बेटे विनय गुप्ता पिता के कारोबार से जुडे. तब कंपनी का सालाना रेवेन्यू महज 30 लाख रुपये था और ये बड़े ब्रैंड्स से टक्कर ले रही थी.
साल 1991 में उनके बड़े बेटे विनोद भी कंपनी से जुड़े, जो CA यानी चार्टर्ड एकाउंटेंट थे. उन्होंने कंपनी को अपडेट किया और आक्रामक मार्केटिंग शुरू की, जिससे कंपनी की सेल्स बढ़ने लगी और प्रॉफिट भी बढ़ने लगा.

'डॉलर' नाम और टैगलाइन- 'फिट है बॉस' ने किया कमाल
साल 1998 से पहले तक कंपनी का नाम भवानी टेक्सटाइल्स ही था, लेकिन 1998 में कंपनी का नाम बदला गया. ऐसा नाम रखना था, जो सबकी जुबां पर चढ़ जाए. तब दुनिया की सबसे अधिक वैल्यू वाली करेंसी थी- डॉलर (Dollar). ये नाम सबकी जुबां पर चढ़ा हुआ था. ऐसे में कंपनी का नाम बदलकर 'डॉलर' कर दिया गया. ये मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ. फिर कंपनी ने बड़े-बड़े स्टार्स को कैंपेनर और ब्रैंड एंबेसडर के तौर पर जोड़ा.
अक्षय कुमार, सलमान खान, सैफ अली खान, महेश बाबू जैसे स्टार कंपनी के विज्ञापनों में दिखे. कंपनी ने टैगलाइन रखी- फिट है बॉस, और मामला जम गया. डॉलर के अंडरवियर, इनरवियर, महिला-पुरुष की रेंज पॉपुलर होने लगे. समय बीतने के साथ परिवार ने डॉलर मैन, डॉलर वुमन, डॉलर किड्स और 'मिस्सी' (महिलाओं के इनरवियर) जैसे ब्रांड्स के साथ कंपनी के पोर्टफोलियो का विस्तार किया. 2014 के बाद से परिवार की तीसरी पीढ़ी (यानी उनके पोता-पोती अंकित, गौरव, आयुष, वेदिका और पल्लवी गुप्ता) भी बिजनेस से जुड़े और परिधान सेगमेंट को आगे बढ़ाया.

अपने पीछे कितना बडा साम्राज्य छोड़ गए?
दीनदयाल गुप्ता ने जो कंपनी शुरू की, उसे 5 दशक से ज्यादा हो गए हैं. अपने जीवन का लंबा समय उन्होंने 'डॉलर इंडस्ट्रीज' को दिया. अपने पीछे वो 1,700 करोड़ा का बिजनेस एंपायर छोड़ गए हैं. कंपनी के शेयर करीब 300 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे हैं. उनकी सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, मार्केटिंग और ब्रैंडिंग स्ट्रैटजी, रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स का बड़ा नेटवर्क का महत्वपूर्ण रोल रहा है.
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