देश के बड़े IAS कोचिंग संस्थान वाजीराम एंड रवि पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने कड़ी कार्रवाई की है. सीसीपीए ने छात्रों को गुमराह करने और गलत ऐड दिखाने के मामले में इस संस्थान पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. उपभोक्ता मंत्रालय के अनुसार, जांच में पाया गया कि संस्थान ने अपने एडवरटाइजमेंट में कुछ जरूरी जानकारी छिपाई, जो कानून के खिलाफ है. इसलिए इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का उल्लंघन करने का दोषी माना गया.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में अच्छी रैंकिंग लाने वाले सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों को इस्तेमाल करते हुए बड़े-बड़े दावे किए और इन उम्मीदवारों के चुने गए सिलेबस के बारे में अहम जानकारी छिपाईं. सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि अगर कोई कोचिंग संस्थान ये साफ नहीं बताता कि सफल हुए छात्रों ने कौन सा कोर्स किया था, जैसे वो फुल‑टाइम क्लासरूम के छात्र थे या सिर्फ ऑप्शनल विषय, टेस्ट सीरीज या कुछ दिनों के इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल थे. तो ये भ्रामक विज्ञापन माना जाता है. प्राधिकरण का कहना है कि ऐसी जानकारी छिपाने से नए और अनजान छात्रों को सही फैसला लेने में मुश्किल होती है और उन्हें गुमराह किया जाता है.
60 से ज्यादा कोचिंग संस्थानों पर गिर चुकी है गाज
यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी बड़ी कोचिंग पर इस तरह की कार्रवाई हुई है. अब तक सीसीपीए कई कोचिंग संस्थानों पर सख्ती दिखा चुका है. प्राधिकरण ने निजी कोचिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए ऐसे संस्थानों को 60 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं, जो भ्रामक विज्ञापन या गलत तरीके से बिजनेस कर रहे थे.
1.46 करोड़ रुपये ज्यादा का लग चुका है जुर्माना
इतना ही नहीं, सिविल सर्विस, IIT‑JEE, NEET, RBI जैसी कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थानों पर कुल मिलाकर 1.46 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया जा चुका है. इसका मकसद है कि छात्र किसी भी कोचिंग में दाखिला लेते समय सही और पूरी जानकारी के आधार पर फैसला ले सकें.
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