पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक ग्रोथ की तुलना में भारत ने तेज रफ्तार दिखाई है. लंबे समय तक विदेशी निवेशकों के भरोसे रहने वाला शेयर मार्केट भी अब घरेलू निवेशकों के भरोसे दम भर रहा है. इसी ताकत को पहचानते हुए अब सरकार प्रवासी भारतीयों को निमंत्रण दे रही है. बजट में वित्त मंत्री ने इससे जुड़ा एक बड़ा ऐलान किया गया है. अब भारत से बाहर रहनेवाले भारतीय, अपने स्वदेश में निवेश कर सकेंगे. यानी प्रवासी भारतीयों के लिए मंत्र साफ है- इन्वेस्ट इन इंडिया. यानी घरेलू इंडस्ट्री एफडीआई के भरोसे नहीं रहेगी, उन्हें प्रवासी भारतीयों (PROI-Persons Resident Outside India) का साथ मिलेगा.
बजट में ऐसा क्या ऐलान हो गया?
वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 में एक अहम ऐलान किया है, जिसके तहत भारत से बाहर रहने वाले भारतीय यानी Persons Resident Outside India (PROI) अब सीधे भारतीय इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकेंगे. सरकार ने न केवल निवेश की अनुमति दी है, बल्कि इंडिविजुअल लेवल पर सीमा 5% से बढ़ाकर 10% और कुल निवेश सीमा 10% से बढ़ाकर 24% करने का प्रस्ताव दिया है.
क्यों केवल FDI के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा?
अब तक भारत का विदेशी पूंजी पर भरोसा मुख्य रूप से एफडीआई (Foreign Direct Investment) और एफपीआई (Foreign Portfolio Investment) तक सीमित था. लेकिन इस कदम से प्रवासी भारतीयों (NRIs/OCI card holders) के लिए पूंजी बाजार में सीधे निवेश का दरवाजा खुल जाएगा. ये निवेशक भारत की आर्थिक कहानी का हिस्सा बनने के साथ-साथ लॉन्ग टर्म कैपिटल में स्थिरता लाने में भी योगदान देंगे.
शेयर बाजार को मिलेगी रफ्तार!
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों के लिए सकारात्मक संकेत है. इसका तात्कालिक असर बाजार में विदेशी प्रवाह की संभावनाओं में वृद्धि के रूप में देखा जाएगा. मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि जहां दूसरे देशों में बाजार विदेशी निवेशकों के एग्जिट लेने से बड़ी गिरावट झेलते हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार के साथ ऐसा नहीं होगा.
- आशावाद का माहौल बनेगा: प्रवासी निवेशकों के प्रवेश से बाजार में नई तरलता (लिक्विडिटी) आएगी.
- घरेलू भरोसे को बल: जब भारतीय मूल के लोग ही भारत में निवेश करेंगे, तो यह घरेलू निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करेगा.
- लॉन्ग टर्म स्थिरता: NRI निवेश अपेक्षाकृत स्थिर होता है, जिससे विदेशी फंड्स की अस्थिरता कम होगी.
हालांकि जानकार कुछ संभावित जोखिम की ओर भी इशारा कर रहे हैं. करेंसी दरों में उतार-चढ़ाव से निवेश रिटर्न प्रभावित हो सकते हैं. टैक्स स्ट्रक्चर और अनुपालन की जटिलता शुरुआती चरण में चुनौती बन सकती है.
बावजूद इसके सरकार का ये कदम देश को 'ग्लोबल इंडियन कैपिटल नेटवर्क' से जोड़ने की दिशा में एक साहसिक कदम बताया जा रहा है. जब प्रवासी भारतीयों की बचत भारतीय उद्योग और बाजार में लगेगी तो इससे 'मेक इन इंडिया' और 'विकसित भारत 2047' विजन को भी गति मिलेगी.
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