नोएडा की एक प्राइवेट फर्म में काम करने वाले रमेश गुप्ता अभी पिछले दिनों जब अपने होमटाउन गए और पैसे निकालने के लिए मुहल्ले में लगे एटीएम पहुंचे तो वहां 'आउट ऑफ कैश' का बोर्ड लटका मिला. दूसरे और तीसरे एटीएम से भी वो निराश लौटे. चौथे एटीएम में वो कैश निकाल पाए. ये समस्या केवल अकेले रमेशजी की नहीं है. हाल के दिनों में शायद आपने भी ऐसा झेला होगा. हमारी जानकारी में भी कई लोगों ने ऐसी शिकायतें कीं कि कई शहरों में एटीएम में कई बार पैसे ही नहीं होते! जून में भी ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी कि टियर-II और छोटे शहरों में एटीएम, कैश की कमी से जूझ रहे हैं. करीब 3 महीने से ऐसी दिक्कत बनी हुई है.
देश के कई शहरों मेंएटीएम (ATM) में कैश की लगातार हो रही किल्लत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक्शन में आ गया है. हमारी सहयोगी वेवबसाइट NDTV Profit ने मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट किया है कि केंद्रीय बैंक ने अलग-अलग बैंकों की शाखाओं और एटीएम नेटवर्क में उपलब्ध कैश का आकलन शुरू कर दिया है.
छोटे शहरों में भारी किल्लत, SBI कस्टमर भी परेशान
बैंक रेगुलेटर RBI, उन कैश इन्वेंट्री लेवल्स का रिव्यू कर रहा है, जो बैंकों की ओर से बनाए रखना जरूरी होता ह. कारण कि कई टियर-II और छोटे शहरों में एटीएम में कैश डालने (कैश रिप्लेनिशमेंट) में भारी कमी देखी गई है. सूत्रों के मुताबिक, इस अवधि के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सहित कई अन्य बैंकों के ग्राहकों ने एटीएम खाली होने (कैश न होने) की शिकायतें दर्ज कराई हैं.
RBI ने बैंक शाखाओं से मांगी है डिटेल!
सूत्रों के अनुसार, RBI ने बैंक शाखाओं से कैश इन्वेंट्री की डिटेल मांगी है ताकि ये पता लगाया जा सके कि बैंक एटीएम में समय पर कैश लोड करने के लिए पर्याप्त नकदी रख रहे हैं या नहीं.
सूत्रों ने जोड़ा कि अगर बैंक अपने एटीएम नेटवर्क में पर्याप्त कैश उपलब्धता सुनिश्चित करने में विफल पाए जाते हैं, तो आरबीआई इस पर सख्त रुख अपना सकता है.
कैश मैनेजमेंट कंपनियों को भी नुकसान
एटीएम खाली रहने की इस समस्या का असर कैश मैनेजमेंट कंपनियों पर भी पड़ा है. बैंकों द्वारा एटीएम में डालने के लिए पर्याप्त नकदी की आपूर्ति न किए जाने के कारण इन कंपनियों को बिजनेस लॉस उठाना पड़ा है.
बैंकों की दलील: 'कटे-फटे नोट' भी इन्वेंट्री का हिस्सा
दूसरी ओर, बैंकर्स का कहना है कि शाखाओं में बनाए रखे जाने वाले कैश इन्वेंट्री के आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इन आंकड़ों में मैले, कटे-फटे और अनुपयुक्त (Soiled and Unfit) नोट भी शामिल होते हैं, जिन्हें तुरंत ATM में लोड नहीं किया जा सकता. ऐसे में एटीएम के लिए उपलब्ध उपयुक्त (Fit) करेंसी का वास्तविक स्टॉक, कुल दिखने वाले आंकड़ों से काफी कम हो सकता है.
उद्योग जगत के अधिकारियों ने ATM बिजनेस में संरचनात्मक चुनौतियों की ओर भी इशारा किया. बैंकरों के अनुसार, एटीएम का संचालन तेजी से एक खर्चीला (Expenditure-Heavy) व्यवसाय बनता जा रहा है, जबकि एटीएम नेटवर्क को बनाए रखने और उसका विस्तार करने के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन (Incentives) अभी भी पर्याप्त नहीं हैं. इसने बैंकों के लिए इस व्यवसाय के व्यावसायिक आकर्षण को कम कर दिया है.
इन राज्यों में सबसे ज्यादा खाली रहे एटीएम
'कॉन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री' (CATMi) ने पहले भी बैंकों के सामने यह मुद्दा उठाया था. जून में, इस उद्योग निकाय ने 'भारतीय बैंक संघ' (IBA) को पत्र लिखकर बैंकों से एटीएम रिप्लेनिशमेंट के लिए पर्याप्त कैश उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया था.
CATMi के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान एटीएम कैश फुलफिलमेंट (पूर्ति) का स्तर केवल 57% से 64% के बीच था, जो दर्शाता है कि कैश की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा पूरा नहीं हो सका. उद्योग निकाय ने कहा कि इस अवधि के दौरान कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में एटीएम खाली रहने (Dry ATMs) के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए.
RBI और SBI ने खबर प्रकाशित होने तक इस मामले पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है.
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