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Apple Survival Story: बंद होने वाली थी एप्पल, सैलरी देने को नहीं थे पैसे, माइक्रोसॉफ्ट की मदद और स्टीव जॉब्स के आइडिया ने किया कमाल

Apple Survival Story: जानिए कैसे 1997 में दिवालिया होने की कगार पर खड़ी एप्पल ने स्टीव जॉब्स की वापसी और माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक ऐतिहासिक समझौते के दम पर खुद को दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनाया.

Apple Survival Story:  बंद होने वाली थी एप्पल, सैलरी देने को नहीं थे पैसे, माइक्रोसॉफ्ट की मदद और स्टीव जॉब्स के आइडिया ने किया कमाल

Apple Survival Story: आज जब हम किसी बड़ी कंपनी को देखते हैं, तो बस उसकी सफलता ही हमें नजर आती है. पर इस सफलता के पीछे ना जानें कितनी हार होती है, जिसे चीरते हुए एक छोटा आइडिया बड़ी कंपनी का रूप ले लेता है. हर बिजनेस में उतार-चढ़ाव का दौर आता है. जब लगता है कि बिजनेस ठप होने वाला है तभी एक नई सोच ऐसा चमत्कार करती है कि बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाती है. एनडीटीवी इंडिया पर आप उन कंपनियों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने बंद होने की कगार पर पहुंचे अपने कारोबार को दुनिया के सामने मिसाल के रूप में खड़ा कर दिया. चलिए शुरू करते हैं.  

क्या आपको पता है एक समय एप्पल कंपनी बंद होने वाली थी. हां, वही एप्पल, जिसके आईफोन लॉन्च होते ही दुनिया के लगभग हर स्टोर पर लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं. जब हम अपने हाथ में आईफोन (iPhone) पकड़ते हैं या मैकबुक (MacBook) पर काम करते हैं, तो शायद ही कोई ये सोच सकता है कि दुनिया की दिग्गज कंपनी को भी कभी पैसे की तंगी थी . बात साल 1997 की है. ये साल एप्पल के इतिहास का काला साल बोला जा सकता है, क्योंकि कंपनी के पास सिर्फ और सिर्फ 90 दिनों के लिए सर्वाइव करने के लिए कैश बचा था. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने ना केवल एप्पल को बचाया, बल्कि पूरी तकनीक की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया. 

जब एप्पल पर मंडरा रहा था बंद होने का खतरा

1990 के दशक में एप्पल एक ऐसी कंपनी बन चुकी थी, जिसकी कोई दिशा नहीं थी. स्टीव जॉब्स को कंपनी से निकाले जाने के बाद, एप्पल ने कई ऐसे प्रोडक्ट्स मार्केट में उतारे जो पूरी तरह फेल रहे, जिसमें एप्पल न्यूटन (Apple Newton) डिवाइस भी शामिल था. ये एक हैंडहेल्ड डिवाइस था लेकिन अपनी कमियों के चलते मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पाया. इतना ही नहीं, एप्पल का ऑपरेटिंग सिस्टम (System 7) उस समय माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज 95 (Windows 95) के सामने बहुत पुराना और धीमा सा लगता था. इन सभी खामियों के चलते साल 1997 में एप्पल को करीब 1 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम नुकसान हुआ. कंपनी की हालत इतनी खराब थी कि उसके पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए भी पैसे नहीं थे. क्या आप सोच सकते हैं आज जो एप्पल सभी के दिलों में राज कर रही है, कभी उसकी स्थिति इतनी नाजुक थी.

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फिर ऐसे आया गेम में कमबैक

जब सभी ने मान लिया था कि एप्पल का अंत नजदीक है, तब कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स की वापसी हुई. जॉब्स ने आते ही सबसे पहले कंपनी की गलतियों को सुधारना शुरू कर दिया. उन्होंने कंपनी के सभी आंकड़े मंगवाए. रिपोर्ट्स देखी, रिव्यू जानें, इसके बात पता चला कि एप्पल जरूरत से ज्यादा फालतू प्रोडक्ट्स बना रही है. बिना किसी देरी के जॉब्स ने कई प्रोजेक्ट्स और प्रोडक्ट्स को फौरन बंद कर दिया. उन्होंने कंपनी को अपनी ताकत पर खेलने का मंत्र दिया, जिसमें सिर्फ 4 कंप्यूटर शामिल थे. उन्होंने कहा कि कई सारे बेकार के प्रोडक्ट्स बनाने से अच्छा है कि कुछ दमदार डिवाइस बनाई जाएं.

...और फिर आया वो ऐतिहासिक समझौता

एप्पल की इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब स्टीव जॉब्स ने अपने सबसे बड़े कॉम्पिटिटर बिल गेट्स (Bill Gates) के साथ पार्टनरशिप की. साल 1997 के मैकवर्ल्ड एक्सपो में जब जॉब्स ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ समझौते का ऐलान किया, तो हर कोई हैरान रह गया था. माइक्रोसॉफ्ट ने उस समय एप्पल में 150 मिलियन डॉलर का निवेश किया. इस निवेश ने एप्पल को ना सिर्फ ऑक्सीजन दी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी वापस दिलाया. साथ ही माइक्रोसॉफ्ट ने ये भी कहा कि वो अगले पांच सालों तक मैक के लिए ऑफिस (Office) सॉफ्टवेयर बनाएगा.

माइक्रोसॉफ्ट ने क्यों की ये डील?

एक सवाल सभी के दिमाग में जरूर आएगा कि जब माइक्रोसॉफ्ट एप्पल की सबसे बड़ी कॉम्पिटिटर थी तो उसने डूबती एप्पल को क्यों बचाया? दरअसल माइक्रोसॉफ्ट पर उस समय मोनोपॉली के आरोप लग रहे थे, ऐसे में एप्पल को सपोर्ट करके माइक्रोसॉफ्ट ये दिखा दिया कि वो कॉम्पिटिशन को खत्म नहीं कर रहा है. इसके अलावा दोनों कपंनियों के बीच सॉफ्टवेयर और पेटेंट को लेकर कई केस चल रहे थे, इस समझौते से सभी कानूनी समस्याएं खत्म हो गईं. इसके अलावा एप्पल ने माइक्रोसॉफ्ट की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया, जिससे मार्केट उसकी वैल्यू और बढ़ गई.

iMac से आईफोन तक का सफर

माइक्रोसॉफ्ट से मिली मदद और जॉब्स की नई प्लानिंग का असर जल्द ही दिखने लगा. 1998 में एप्पल ने iMac लॉन्च किया, जो अपने कलर और ट्रांसपेरेंट डिजाइन की वजह से सुपरहिट रहा. इसके बाद 2001 में iPod ने म्यूजिक की दुनिया बदली और 2007 में iPhone ने तो जैसे स्मार्टफोन सेगमेंट में एक नई क्रांति की ही शुरुआत कर दी. आज एप्पल ना केवल एक कंपनी है, बल्कि इनोवेशन और लग्जरी का उदाहरण बन चुकी है. 

एप्पल की मार्केट वैल्यू आसमां पर

साल 2026 में एप्पल की मार्केट वैल्यू करीब 3.9 से 4.0 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है. अब हर साल टेक लवर्स को एप्पल के नए डिवाइस का इंतजार बेसब्री से रहता है और कंपनी भी अपने ग्राहकों को निराश नहीं करती है. 90 दिनों की मोहलत से लेकर ट्रिलियन डॉलर की वैल्यूएशन तक का ये सफर हर बिजनेसमैन के लिए एक प्रेरणा है.

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