8th Pay Commission: देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनहोल्डर्स इस समय 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं. जहां एक तरफ कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर को रिकॉर्ड लेवल पर बढ़ाने की डिमांड कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल एक्सपर्ट ने सरकार की मजबूरियों के बारे में जिक्र कर रियलिस्टिक अनुमान सामने रखा है. एक्सपर्ट का साफ मानना है कि अभी के समय में सरकार पर फिस्कल डेफिसिट बहुत ज्यादा है. ऐसे में 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को बहुत ज्यादा बढ़ा पाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा. इसलिए इस बार फिटमेंट फैक्टर 1.90 से 2.10 के बीच रहने की उम्मीद है.
फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?
सीए मोहित गोयल, प्रोपराइटर, मोहित एस गोयल एंड कंपनी ने वेतन आयोग के गणित को समझाते हुए उन्होंने सरकार की स्थिति पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि 8वें वेतन आयोग में सबसे संभावित फिटमेंट फैक्टर 1.90 से 2.10 के दायरे में हो सकता है. सरकार के अभी के समय में फिस्कल डेफिसिट को देखते हुए, इस फैक्टर का 2.30 से ऊपर ले जा पाना, बहुत ही मुश्किल है. हालांकि, केवल फिटमेंट फैक्टर ही पैमाना नहीं माना जाना चाहिए. कर्मचारियों की परचेसिंग पावर और फिस्कल डेफिसिट के बीच बैलेंस बनाना होगा, जिससे सरकार और कर्मचारियों दोनों के लिए रिजल्ट ठीक निकले."
'2.10 का फिटमेंट फैक्टर ज्यादा रियलिस्टिक'
मंजीत सिंह पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने कर्मचारियों की मांग और रियलिस्टिक कंडीशन पर बात की. उन्होंने कहा, "कर्मचारी संगठनों की मांग अपनी जगह है, लेकिन अभी की फाइनेंशियल कंडीशन को देखें तो 2.10 का फिटमेंट फैक्टर ज्यादा रियलिस्टिक लगता है. अगर इसे इस लेवल पर रखा जाता है, तो मिनिमम बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर सीधे 37,800 रुपये के लेवल पर पहुंच जाएगी."
'सैलरी स्ट्रक्चर बदलाव के लिए जरूरी फिटमेंट'
अधिल शेट्टी, सीईओ, बैंकबाजार, ने फिटमेंट फैक्टर की अहमियत के बारे में बात करते हुए कहा, "फिलहाल कोई ऑफिशियल फिटमेंट फैक्टर फिक्स नहीं हुआ है. हालांकि मार्केट में अनुमान 1.90 से लेकर 2.86 तक लगाए जा रहे हैं. पर फाइनल नंबर महंगाई, सरकार की फाइनेंशिल कंडीशन और कर्मचारी संगठनों के साथ होने वाली चर्चाओं पर निर्भर करेगा. अब क्योंकि मकान किराया भत्ता और दूसरे भत्ते बेसिक पे से जुड़े होते हैं, इसलिए कम फिटमेंट फैक्टर के नुकसान को दूसरे भत्ते नहीं संभाल सकते. इस लिहाज से फिटमेंट फैक्टर ही पूरी सैलरी स्ट्रक्चर के बदलाव के लिए जरूरी है.
अलग-अलग फिटमेंट की हो रही मांग
अब एक्सपर्ट कम फिटमेंट फैक्टर का जिक्र कर रहे हैं. पर इससे पहले रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने कमीशन से कहा था कि लेवल के हिसाब से फिटमेंट फैक्टर को फिक्स किया जाए. अभी के समय में एक ही रेट का फैक्टर यानी 'वन फिटमेंट फैक्टर फॉर ऑल' सभी लेवल के कर्मचारियों के लिए लागू होता है.
7वें वेतन आयोग से सरकारी खजाने पर कितना असर पड़ा
7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था, जिससे मिनिमम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 17,990 रुपये हो गई थी. इस बदलाव की वजह से वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार का रेवेन्यू एक्सपेंडिचर पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 4.8% से बढ़कर 9.9% हो गया था. ऐसे में अगर इस बार 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर को ज्यादा बढ़ाया गया, तो राजकोषीय घाटा आउट ऑफ कंट्रोल हो सकता है.
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