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रेगिस्‍तान से निकला 'काला सोना',  तेल के 13 नए कुएं! राजस्‍थान से आई गुड न्‍यूज, 70% क्रूड प्रोडक्‍शन बढ़ा, फॉर्मूला क्‍या है?

Crude Oil Record Production: बाघेवाला में 52 कुएं हैं, जिनमें से 33 चालू हैं. ऑयल इंडिया ने 19 कुएं में CSS ऑपरेशन पूरा किया है, जो कि पिछले साल की तुलना में 72% ज्‍यादा है. अधिकारियों ने बताया कि इस साल 13 नए कुएं खोदे गए हैं.

रेगिस्‍तान से निकला 'काला सोना',  तेल के 13 नए कुएं! राजस्‍थान से आई गुड न्‍यूज, 70% क्रूड प्रोडक्‍शन बढ़ा, फॉर्मूला क्‍या है?
Record Oil Production in Rajasthan Desert: ऑयल इंडिया ने रिकॉर्ड तेल उत्‍पादन किया है

Crude Oil Record Production in Rajasthan: ईरान के साथ चल रहे इजरायल और अमेरिका की जंग के चलते दुनियाभर में पैदा हुए तेल संकट के बीच हम भारतीयों के लिए एक अच्‍छी खबर सामने आई है. राजस्‍थान के रेगिस्‍तान 'जैसलमेर' में तेल एक्‍सप्‍लोरेशन करने वाली कंपनी ऑयल इंडिया (Oil India) ने  पिछले साल के 705 बैरल/दिन की तुलना में 1,202 बैरल/दिन का रिकॉर्ड उत्‍पादन हासिल किया है. ये करीब 70 फीसदी की ग्रोथ है. दुनियाभर में पैदा हुए तेल संकट के बीच पब्लिक सेक्‍टर की कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के थार रेगिस्तान से कच्चे तेल के उत्पादन में जिस तरह भारी बढ़ोतरी की है, उसे बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच घरेलू उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. 

जैसलमेर से गुजरात के मेहसाणा और वडोदरा तक 

ऑयल इंडिया, राजस्‍थान जैसलमेर के बाघेवाला क्षेत्र में तेल उत्‍पादन करती है. अधिकारियों के मुताबिक, बाघेवाला क्षेत्र में उत्पादित कच्चे तेल को टैंकरों के माध्यम से गुजरात के मेहसाणा में ओएनजीसी (ONGC) की सुविधाओं तक ले जाया जाता है. और फिर वहां से इसे पाइपलाइन के जरिए वडोदरा  इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की कोयाली रिफाइनरी में भेजा जाता है. सालाना उत्पादन की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में, ऑयल इंडिया के राजस्थान फील्ड ने 43,773 मीट्रिक टन कच्चे तेल का वार्षिक उत्पादन दर्ज किया, जो पिछले वर्ष के 32,787 मीट्रिक टन से काफी अधिक है.

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70% क्रूड प्रोडक्‍शन बढ़ा, क्‍या है फॉर्मूला? 

बाघेवाला में कंपनी ने जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से 1,202 बैरल प्रति दिन का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है.  यह उपलब्धि तकनीकी प्रगति और कुशल संचालन के कारण संभव हुई है. इसके पीछे साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) जैसी रिकवरी तकनीक है. थर्मल एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी की ये तकनीक अत्यधिक गाढ़े कच्चे तेल निकालने के लिए इस्‍तेमाल की जाती है. 

  • अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता का श्रेय साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) जैसी उन्नत रिकवरी तकनीकों को दिया जाता है. ये एक थर्मल एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी तरीका है, जिसका उपयोग अत्यधिक गाढ़े (High-viscosity) कच्चे तेल को निकालने के लिए किया जाता है.
  • कच्चे तेल के अधिक गाढ़ा होने के कारण यहां एक्‍सप्‍लोरेशन के पारंपरिक तरीके यहां काम नहीं कर रहे थे, जिसके कारण कंपनी ने 'डाइलुएंट इंजेक्शन' और 'आर्टिफिशियल लिफ्ट सिस्टम' जैसे इनोवेशन अपनाए.
  • एक अधिकारी ने कहा, 'देश में पहली बार भारी तेल भंडारों के लिए 'फिशबोन ड्रिलिंग' और 'बेयरफुट कंप्लीशन' जैसी उन्नत ड्रिलिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है.'
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कुल 52 कुएं, इस साल 13 नए कुएं खोदे गए 

राजस्थान बेसिन के बीकानेर-नागौर उप-बेसिन में स्थित बाघेवाला तेल क्षेत्र, भारत के उन चुनिंदा ऑनशोर हेवी ऑयल क्षेत्रों में से एक है. 1991 में खोजा गया और 200.26 वर्ग किलोमीटर में फैला बाघेवाला क्षेत्र 2017 से भारी कच्चे तेल का उत्पादन कर रहा है. वर्तमान में यहां 52 कुएं हैं, जिनमें से 33 चालू हैं. 

ऑयल इंडिया ने 19 कुएं में CSS ऑपरेशन पूरा किया है, जो कि पिछले साल की तुलना में 72% ज्‍यादा है. अधिकारियों ने बताया कि इस साल 13 नए कुएं खोदे गए हैं. एक अधिकारी ने कहा, 'थार क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अपरंपरागत संसाधनों (Unconventional Resources) की क्षमता को रेखांकित करता है.'

अधिकारियों का मानना है कि यह उपलब्धि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान में क्रूड ऑयल उत्पादन 705 बैरल से बढ़कर 1202 बैरल प्रति दिन हुआ है, जो करीब 70 प्रतिशत की ग्रोथ है.
तेल उत्पादन बाघेवाला के जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से होता है और तेल गुजरात के मेहसाणा और वडोदरा भेजा जाता है.
साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन, डाइलुएंट इंजेक्शन, आर्टिफिशियल लिफ्ट सिस्टम और फिशबोन ड्रिलिंग जैसी उन्नत तकनीकें उपयोग की जा रही हैं.
बाघेवाला क्षेत्र में कुल 52 कुएं हैं, जिनमें से 33 चालू हैं और इस साल 13 नए कुएं खोदे गए हैं.
यह उत्पादन आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम कर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा.

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