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This Article is From Feb 19, 2015

मनोरंजन भारती की कलम से : क्या बीजेपी पार लगा पाएगी मांझी की नैया?

Manoranjan Bharti
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  • Updated:
    फ़रवरी 19, 2015 17:43 pm IST
    • Published On फ़रवरी 19, 2015 17:23 pm IST
    • Last Updated On फ़रवरी 19, 2015 17:43 pm IST

बिहार में जीतन राम मांझी अब खुलकर विधायकों से अपील कर रहे हैं कि यदि मंत्री बनना हो, तो हमारे साथ आओ यानी दल-बदल की खुलेआम अपील की जा रही है। बिहार में ऐसा कम ही देखने को मिलता है।

बिहार के विधायकों की चांदी है। उनके दोनों हाथ में लड्डू हैं, क्योंकि नीतीश और मांझी दोनों कैंप से उनके पास मंत्री पद का ऑफर है। मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीजेपी इस आग में घी क्यों झोंक रही है? क्या बीजेपी को यह नहीं पता कि उनकी संख्या जोड़ दें, उसके बावजूद बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो रहा।

बीजेपी को लगता है कि मांझी 30 से अधिक विधायकों को तोड़ लेंगे, तो बात बन सकती है। बिहार में कुल 38 ऐसी सीटें हैं, जो दलितों के लिए रिर्जव हैं। यदि सारे दलित विधायक और कुछ ऐसे विधायक, जिन्हें लगता है कि नीतीश कुमार उन्हें टिकट नहीं देंगे, साथ आ जाएं, तो मांझी की नैया पार लगा सकते हैं।

अभी जेडीयू के पास 19, बीजेपी के पास 18 और आरजेडी के पास एक दलित विधायक हैं, यानी जेडीयू के सभी दलित विधायक मांझी के साथ चले भी जाएं, तो भी मांझी को 15 गैर-दलित विधायकों का समर्थन चाहिए।

बीजेपी से मांझी की नजदीकियां 1991 से है। 1991 में मांझी गया लोकसभा का उपचुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे। उस वक्त बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने मांझी को समर्थन दिया था और बीजेपी का उम्मीदवार हार गया था। यही नहीं मांझी ने अपने सबसे बड़े बेटे को संघ परिवार को दान में दिया हुआ है। ये सब बातें बिहार के लोग जानते हैं। मांझी जब दिल्ली में मुख्यमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री से मिले, तो कहा, मैं आपकी वजह से ही मुख्यमंत्री बना हूं। इस पृष्ठभूमि में मांझी का बीजेपी के दामन में बैठना कोई ताज्जुब की बात नहीं है।

बीजेपी नहीं चाहती है कि किसी भी हालत में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठें, क्योंकि यदि नीतीश ने अच्छा काम किया और हालात को संभाल लिया, तो बीजेपी के लिए काफी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी की सारी ताकत बिहार में ही लगने वाली है।

अब शुक्रवार को होने वाले विश्वास मत के दौरान स्पीकर पर काफी कुछ निर्भर करेगा, क्योंकि स्पीकर ने जेडीयू को विपक्षी दल का दर्जा दे दिया है, यानी मांझी की नैया बीजेपी पार लगाती है या फिर मांझी अपनी नैया खुद डुबोते हैं।

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