कर्नाटक में ऐसी कौन सी अनहोनी हो गई? जो हुआ है उसकी अटकलें क्या पहले से नहीं थीं. कितनी बार नहीं दुहराया गया था कि जेडीएस के पास सत्ता की चाबी पहुंच सकती है. कई अनुमानों में एक अनुमान यह भी था कि सबसे कम सीटें पाने के बावजूद जेडीएस दूसरे बड़े दलों के साथ मोलतोल करने की स्थिति में आ सकती है. बस तब एक अंदाजा लगाया जाना बाकी रह गया था. वह ये कि जेडीएस किसके साथ जाएगी. उसने अपने पास विकल्प खुले रखे थे, यानी आज जब नतीजे आ गए हैं तब हमें कर्नाटक में कुछ अनहोनी हो जाने की मुद्राएं नहीं बनानी चाहिए. हद से हद हम ये बात कर सकते हैं कि कर्नाटक में जो खंडित जनादेश आया है और उसके हिसाब से जो हो रहा है उसमें कुछ नाजायज़ तो होने नहीं जा रहा है.
इस जनादेश के तीन सरल से मायने
पहली बात ये कि वहां जो सिद्धारमैया सरकार थी उसे वहां की जनता ने दुबारा सत्ता नहीं सौंपी. दूसरी बात ये कि वहां सत्ता में आने के लिए ऐड़ी से चोटी का पूरा दम लगाए रही भाजपा को भी जनता ने सत्ता नहीं सौंपी. वह बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई. तीसरी पार्टी जेडीएस थी. उसे अनुमानों के मुताबिक तीसरे नबंर पर बताया जा रहा था. और वह तीसरे पर ही आई लेकिन अटकलों से कुछ ज्यादा ही सीटें लेकर आ गई. वह इतनी ज्यादा सीटें लेकर आ गई कि दोनों प्रमुख दल बहुमत से दूर रह गए. अब अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन्हीं नजीजों के आधार पर सरकार बनना है सो हिसाब लगाना पड़ रहा है कि आखिर इस जनादेश के मुताबिक कौन सी सरकार बनने का औचित्य है.
जिसे भी जेडीएस का साथ मिले
यानी जनआकांक्षा यही मानी जाएगी कि जेडीएस के साथ से ही कर्नाटक में सरकार बने. लेकिन यहां एक अनहोनी हो गई. कांग्रेस ने जेडीएस का साथ पाने के लिए अनुरोध की बजाए जेडीएस का साथ देने का ऐलान कर दिया. कांग्रेस ने कबूल कर लिया है कि जनता ने उसे बहुमत नहीं दिया लिहाज़ा उसे अपनी सरकार बनाने का नैतिक अधिकार है ही नहीं. उसने बिल्कुल भी कोशिश नहीं की कि जेडीएस का समर्थन हासिल करके सरकार बनाने का दावा करे. और वाकई जो कांग्रेस वहां जेडीएस के विरोध में खड़ी रहकर चुनाव लड़ रही थी वह किस आधार पर जेडीएस समर्थन मांग सकती थी. सवाल यह भी उठेगा कि क्या वह उसे समर्थन दे सकती है? भले ही इस जटिल स्थिति का अनुमान पहले से लगाया जा रहा हो लेकिन अब जब वैसा ही हो गया तो दोनों पार्टियों के एकसाथ आकर सरकार बनाने के पक्ष में कोई तर्क जरूर होना चाहिए.
सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता का तर्क
कर्नाटक की यह गुत्थी का बनना नई नई घटना है. लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान जो कथनोपकथन सुनाई दे रहे थे उनमें एक बात यह भी थी कि धर्मनिरपेक्ष रुझान वाले वोटरों के सामने भाजपा के विरोध में किसी को भी वोट देने का विकल्प था. अगर भाजपा कि विरोध में सत्तर फीसद से ज्यादा वोट पड़े तो ये दोनों दल यानी कांग्रेस और जेडीएस दावा कर सकते हैं कि 63 फीसद जनता ने इसी आधार पर भाजपा को बहुमत से दूर रखा है. यानी धर्मनिरपेक्षता के आधार पर जेडीएस और कांग्रेस साथ आकर सरकार बनाने के पक्ष में एक मजबूत तर्क पेश कर सकती हैं. गौरतलब है कि जेडीएस के नाम में ही सेक्यूलर लगा है. बहस मुबाहिसों में जहां जहां कांग्रेस जेडीएस के साथ को बेमेल बताने के आरोप लगाने की कोशिश होगी वह विचारधारा के आधार पर कमजोर आरोप साबित होंगे. जहां तक बहुमत का सवाल है तो कांग्रेस और जेडीएस का मिलाकर बहुमत का आंकड़ा हासिल किया ही जा चुका है.
2019 के लिहाज से क्या हुआ यह
इसे ज्यादा दोहराने जरूरत नहीं है कि कर्नाटक का यह चुनाव 2019 के लिहाज़ से भी देखा जा रहा था. कांग्रेस का मज़ाक उड़ाने के लिए सिमटते जाने का मुहावरा इसी चुनाव में लाया गया था. लेकिन भाजपा को इस मुहावरे का फायदा तभी होता जब वह कर्नाटक में जीत जाती. या अगर जडीएस अपनी दम पर सत्ता में आ जाती तो भी कहा जा सकता था कि कांग्रेस सिमटकर पीपीपी हो गई. बल्कि यहां हो यह गया कि जनता ने ऐसा जनादेश दे दिया कि कांग्रेस के बिना जेडीएस सरकार बना नहीं सकती. इस तरह से व्याख्या करें तो कर्नाटक में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलने के बावजूद वह वहां अपनी मौजूदगी बनाए हुए है. इसे 2019 के साथ साथ उसके पहले होने वाले विधानसभा चुनावों के नज़रिए से भी देखा जाना चाहिए.
हारकर एक सहयोगी मिल गया
अगर कांग्रेस जीत जाती तो बेशक उसे देश में सिमटते जाने वाले मुहावरे का जवाब देने का तर्क मिल जाता. लेकिन देश में जैसा माहौल बनता जा रहा है उससे साफ है कि 2019 का चुनाव राजनीतिक दलों के ध्रुवीकरण का चुनाव होगा. विपक्ष अभी से उस ध्रुवीकरण की कोशिश में है. अगर वाकई कर्नाटक में जेडीएस कांग्रेस की गठबंधन सरकार बन गई तो क्या इसमें कोई शक है कि ये दोनों दल मिलकर 2019 के दौरान कर्नाटक में गुल खिला सकते हैं.
सुधीर जैन वरिष्ठ पत्रकार और अपराधशास्त्री हैं...
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This Article is From May 15, 2018
कर्नाटक में कौन सी अनहोनी हो गई?
Sudhir Jain
- ब्लॉग,
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Updated:मई 15, 2018 21:19 pm IST
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Published On मई 15, 2018 21:19 pm IST
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Last Updated On मई 15, 2018 21:19 pm IST
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