जासूसी पर जांच : ममता ने न्यायिक आयोग बनाया, केंद्र ने फिर टरकाया

सरकार ने पेगासस साफ्टवेयर को लेकर न हां कहा है और न इंकार किया है. लेकिन इतने लोगों के नाम और फोन नंबर संभावित लोगों की सूची में आने के बाद भी सरकार जांच की बात नहीं कर रही

जासूसी पर जांच :  ममता ने न्यायिक आयोग बनाया, केंद्र ने फिर टरकाया

पेगसास जासूसी कांड की जांच में एक नया मोड़ आ गया है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले की जांच का ऐलान किया था लेकिन इससे एक कदम आगे जाते हुए बंगाल की सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है. दिल्ली आने से पहले ममता बनर्जी ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया. इस न्यायिक आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन लोकुर को बनाया गया है. कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य भी इस आयोग के सदस्य होंगे.

सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संवैधानिक बेंच ने 24 अगस्त 2017 को निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताकर एक विस्तृत फैसला दिया था. क्या वही सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले का संज्ञान लेगा? सीपीएम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि पूरे मामले की जांच SIT करे. देश की दो दो राज्य सरकारें जांच की बात कर रही हैं. बंगाल ने तो न्यायिक आयोग ही बना दिया है. एक बात का ध्यान रहे. यह जासूसी साफ्टवेयर बेहद ख़तरनाक है. इसे आप सिर्फ फोन की रिकार्डिंग न समझें जैसा पहले के समय में विपक्षी नेताओं का होता था. यह सिर्फ रिकार्ड नहीं करता है बल्कि आपको सोते जागते देख रहा होता है. आप फोन बंद करेंगे तब भी यह फोन का माइक और कैमरा ऑन कर रिकार्डिंग करने लगेगा. आप किसी जगह पर मौजूद हैं, जिसके बारे में नहीं चाहते कि कोई जाने. आपने फोन और जीपीएस दोनों बंद कर दिया है तब भी पेगासस थोड़े समय के लिए जीपीएस चालू कर देगा और जान लेगा कि आप कहां हैं. इसका इस्तेमाल किसी की भी हत्या में हो सकता है. वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल ख़शोग्गी और मेक्सिको के पत्रकार सेसिलीयो पीनेदा बेरतो की हत्या के मामले में पेगासस के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं. यह सॉफ़्टवेयर हर वह जानकारी जो आपने फोन से भेजी है उसका पूरा इतिहास निकाल सकता है.

पेगासस से जुड़ी ख़बरें हर दिन पहले से ज्यादा गंभीर लगने लगी हैं. आखिर कौन है जो विपक्ष के नेताओं के अलावा पत्रकारों, सेना के अधिकारियों, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों और जांच एजेंसियों के अधिकारियों के नंबर की जासूसी कराना चाहता होगा. सरकार क्यों कहती है कि जांच नहीं करेगी. 

फ्रांस के राष्ट्रपति मैकरों ने इज़रायल के प्रधानमंत्री नफताली बेनेट को फोन किया है कि इस मामले की जांच गंभीरता से हो. पेगासस प्रोजेक्ट के पर्दाफाश में यह बात सामने आई है कि मोरक्को के सुरक्षा बलों ने फ्रांस के राष्ट्रपति और उनकी सरकार के 15 लोगों के ख़िलाफ़ पेगासस जासूसी स्पायवेयर का इस्तेमाल किया है. यही नहीं फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री एड्वार्डो फ़िलीप और उनके 14 मंत्रियों की भी जासूसी की जा रही थी. इस पर्दाफाश़ के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति सुरक्षा को लेकर आपातकालीन बैठक भी बुला चुके हैं. रिपोर्ट आने के बाद मैकरों ने अपना फ़ोन भी बदल लिया है. मोरक्को की सरकार और NSO ने इससे इंकार किया है. मोरक्को की सरकार ने ऐम्नेस्टी और फ़ॉर्बिडन स्टोरीज़ पर मुक़द्दमा भी दायर किया है. लेकिन तब भी फ्रांस में जांच हो रही है, इज़रायल में जांच हो रही है. क्या जांच से इंकार करने वाली भारत सरकार को NSO पर इज़रायल और फ्रांस से ज़्यादा भरोसा है? 

आज द वायर ने पेगासस फोन जासूसी कांड पर चार रिपोर्ट प्रकाशित की हैं. ये सभी पिछले हफ्ते की रिपोर्ट से और भी ख़तरनाक हैं. रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय के जूनियर अधिकारी से लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक रहे IAS अधिकारी वीरेंद्र जैन का फोन नंबर भी मिला है, जिनकी जासूसी की जानी थी. आखिर इन सभी के नंबर इज़रायल की कंपनी की सूची में क्यों मौजूद हैं, क्या अब भी ये स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के विषय नहीं हैं? क्या जांच से इंकार की ये वजह है कि जासूसी के निशान घर के भीतर तक भी पहुंच रहे हैं.

द वायर में संगीता बरुआ पिशारोती और कबीर अग्रवाल की रिपोर्ट बताती है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ कोर्ट में चुनौती देने वाले सेवारत दो कर्नल और एक सेवानिवृत्त हो चुके खुफ़िया विभाग के अधिकारी के फोन के नंबर भी पेगासस प्रोजेक्ट के डेटा में मिले हैं. इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल BSF के दो सेवारत अफसरों के भी फोन नंबर पेगासस प्रोजेक्ट के डेटा में मिले हैं. पहला नाम और नंबर BSF के पूर्व प्रमुख केके शर्मा का है. शर्मा जब अपने पद पर थे तब 11 फरवरी 2018 को कोलकाता में वर्दी में एक राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया जिसके मंच पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कृष्ण गोपाल और मुरलीधर और बीजेपी के इंटेलेक्चुअल सेल के मोहित रॉय मौजूद थे. इस कार्यक्रम के एक महीने बाद केके शर्मा का फोन नंबर पेगासस की संभावित टारगेट की सूची में शामिल किया जाता है. शर्मा ने द वायर को प्रतिक्रिया नहीं दी और कहा कि वे अपना फोन फोरेंसिक जांच के लिए नहीं देंगे. 2018 में रिटायर होने के बाद केके शर्मा को लोकसभा चुनावों के दौरान बंगाल और झारखंड का विशेष पर्यवेक्षक बनाया जाता है. यह नियुक्ति चुनाव आयोग करता है. ममता बनर्जी ने इस नियुक्ति का विरोध किया था. ममता के विरोध के दो दिन बाद केके शर्मा को हटा दिया गया. आप जान चुके हैं कि उस समय चुनाव आयुक्त के पद पर मौजूद अशोक लवासा का फोन नंबर भी संभावित सूची में है.

सेवा में रहते हुए BSF के प्रमुख का फोन नंबर जासूसी करने की सूची में मिलता है इतना काफी है कि इस मामले की पारदर्शी जांच हो ताकि पता चले कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कोई जानकारी किसी और के हाथ तो नहीं लगी है. यही नहीं BSF के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस जगदीश मैथानी का भी फोन नंबर संभावित सूची में मिला है. मैथानी ने भी वायर को प्रतिक्रिया नहीं दी है. 

2018 में ख़ुफ़िया विभाग RAW के जितेंद्र कुमार ओझा को समय से पहले रिटायर करा दिया गया जिसके ख़िलाफ़ ओझा ने केंद्रीय पंचाट CAT में चुनौती दी और अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जितेंद्र कुमार ओझा को सेवा काल में छह बार अति उल्लेखनीय कार्य की तारीफ़ मिली है. उत्तम सेवा मेडल मिल चुका है. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित आतंक के कई मामलों को सुलझाया है. ओझा और उनकी पत्नी का नंबर पेगासस की संभावित सूची में पाया गया है. 

क्या अब भी सरकार जांच से इंकार करेगी. विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षा लेखी ने कहा है कि आतंकवाद, माओवाद और लेफ्ट पर नज़र रखनी होती है. अपने देश के काबिल अफसर, BSF के चीफ, इंस्पेक्टर जनरल पर भी क्या सरकार शक करती है कि ये लोग आतंकवाद में शामिल हो सकते हैं या इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किसी और काम में हो रहा है. ब्लैकमेल भी एक कारण हो सकता है.

हिन्दी अख़बारों ने पेगासस जासूसी कांड को रद्दी में ठेल दिया है, हिन्दी प्रदेश की करोड़ों जनता इसके जानकारियों से वंचित है. आज कारगिल विजय दिवस है, सेना के शौर्य की तारीफ हो रही है लेकिन सेना के अधिकारियों के फोन नंबर जासूसी किए जाने की सूची में मिलते हैं इसे लेकर सरकार अपने मोर्चे पर डटी हुई है यही कि जांच नहीं करेंगे. जितेंद्र कुमार ओझा ने द वायर को प्रतिक्रिया दी है - “ये साफ़ तौर पर एक आपराधिक हरकत है, ख़ास तौर पर मेरी पत्नी के नम्बर की निगरानी करना. मुझे शक है कि ये काम अपराधी क़िस्म के अफसरों द्वारा करवाया जा रहा है, ताकि जिस दौरान मैं अपना केस लड़ रहा हूं उस दौरान मुझ पर मानसिक दबाव बनाया जा सके.”

भारतीय सेना के मुकुल देव को कोई फोन क्यों रिकार्ड करना चाहेगा, क्यों उनके फोन में मौजूद निजी बातचीत, निजी तस्वीरों को देखना चाहेगा? सेना के अफसर का नाम और नंबर अगर जासूसी की सूची में हो क्या तब भी इस कांड की जांच नहीं होनी चाहिए? जब 2017 में सेना के अफसरों को मुफ्त राशन की सुविधा बंद की गई थी तब कर्नल मुकुल देव ने रक्षा सचिव को कानूनी नोटिस भेज दिया था. कर्नल मुकुल देव ने द वायर को प्रतिक्रिया दी है कहा है कि इस सरकार में जो भी सवाल करता है, शक की नज़र से देखा जाता है. 

सरकार का यह तर्क जमता नहीं है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए नज़र रखी जाती है. हालांकि अभी तक सरकार ने पेगासस साफ्टवेयर को लेकर न हां कहा है और न इंकार किया है. लेकिन इतने लोगों के नाम और फोन नंबर संभावित लोगों की सूची में आने के बाद भी सरकार जांच की बात नहीं कर रही है.

द वायर की सुकन्या शांथा, अजॉय आशीर्वाद महाप्रशस्त की रिपोर्ट के अनुसार कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच कर रहे प्रत्यर्पण निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी राजेश्वर सिंह, उनकी पत्नी औऱ दो बहनों के फोन नंबर भी संभावित सूची में हैं. राजेश्वर सिंह सहारा और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी के मामलों की जांच में शामिल हैं. द वायर ने लिखा है कि इन सभी की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है. फोरबिडन स्टोरी ने इस मामले में इलेक्ट्रानिक मंत्रालय से जवाब पूछा था तो यही मिला कि किसी भी व्यक्ति का फोन नंबर सर्वेलेंस के लिए नहीं चुना गया है. लेकिन राजेश्वर सिंह की बहन आभा सिंह ने अपने फोन फोरेंसिक जांच के लिए दे दिए थे. चूंकि उनका फ़ोन android था इसलिए कुछ ठोस जानकारी नहीं मिली. आभा सिंह IAS रह चुकी हैं और इस वक्त बांबे हाई कोर्ट में वकालत करती हैं. 

समाचार एजेंसी PTI के एक पत्रकार का भी नंबर है. द वायर की रिपोर्ट के अनुसार यह पत्रकार कश्मीर के हैं. समाचार एजेंसी के सीईओ विजय जोशी ने कहा है कि अगर यह सच है कि तो हम इसकी निंदा करते हैं. यह किसी की निजता का उल्लंघन है. और संविधान ने जो आज़ादी ही है उसका भी हनन है. विजय जोशी ने सरकार से कहा है कि इस मामले में पारदर्शिता बरते और पुष्टि करे कि उनके स्टाफ के फोन नंबर की जासूसी की गई है या नहीं. सरकार तो जांच से ही इंकार कर रही है. इसके भी विपक्ष के सांसद संसद में पेगासस के मुद्दे से पीछे नहीं हट रहे हैं. हर दिन इसे लेकर सदन के भीतर और बाहर आवाज़ उठा रहे हैं.

राज्यसभा में विपक्ष के सांसद पेगासस स्पाइवेयर का बैनर लेकर सदन के बीच में चले गए. प्रधानमंत्री से जवाब मांगने लगे और नारे लगाने लगे. राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भी चर्चा कराने की मांग की है. राज्य सभा में  DMK सांसद तिरुचि शिवा ने भी पेगासस प्रोजेक्ट पर चर्चा की मांग की है. लोक सभा में भी कांग्रेस सासंद मनीष तिवारी ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया कि सारा काम रोक कर पेगासास प्रोजेक्ट पर चर्चा हो. मनीष तिवारी के अलावा कांग्रेस के सांसद मनीकम टगोर ने भी नोटिस दिया है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया है. दो साल पहले कांग्रेस और जेडीएस की सरकार गिराकर येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने थे. इस खेल में भी पेगासस के जासूसी साफ्टवेयर के इस्तेमाल की खबर आई है. कई नेताओं के फोन नंबर संभावितों की सूची में पाए गए हैं. वायर की रिपोर्ट पढ़िए. बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के राकेश तिवारी का नंबर भी संभावितों की सूची में हैं जो BCCI में जय शाह के करीबी बताए जाते हैं. कहीं ऐसा न हो कि हर अपने पराये का नंबर जासूसी की सूची में हो और जासूसी हो भी चुकी हो.

संसद के बाहर राहुल गांधी ट्रैक्टर पर बैठे नज़र आ रहे हैं. राहुल ने कहा कि वे ट्रैक्टर इसलिए चला रहे हैं क्योंकि बताना चाहते हैं कि सरकार को नए कृषि कानून वापस लेने होंगे. राहुल ने ट्वीट किया है कि अगर खेत बेचने पर मजबूर करोगे, तो ट्रैक्टर संसद में चलेगा- सत्य की फ़सल उगाकर रहेंगे! कृषि-विरोधी क़ानून वापस लो. दिल्ली में सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन कर ट्रैक्टर मार्च निकालने पर कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला, युवा कांग्रेस प्रमुख श्रीनिवास बीवी और कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी के मीडिया विभाग के सह प्रभारी प्रणव झा को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया हालांकि कुछ घंटे बाद शाम को पुलिस ने सभी को छोड़ भी दिया.


राहुल गांधी ने कहा “केंद्र सरकार को नए कृषि क़ानूनों को वापस लेना पड़ेगा. ये क़ानून 2-3 बड़े उद्योगपतियों के लिए हैं. ये किसानों के फायदे के लिए नहीं हैं. ये काले क़ानून हैं. मैं किसानों के संदेश को पार्लियामेंट तक लेकर आया हूं.” मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा- हमने ऐसे फोटो ऑप बहुत देखे हैं...कांग्रेस किसानों के आंदोलन को हाईजैक करना चाहती है , किसानों के कंधे पर बंदूक चलाने से उन्हें कोई लाभ नहीं होगा...कांग्रेस कभी जासूसी कांड तो कभी नए कृषि कानूनों पर चर्चा की मांग करती है. 

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मिज़ोरम और असम के मुख्यमंत्री मिज़ोरम-असम सीमा पर तनाव को लेकर  ट्वीटर पर आ गए और  एक दूसरे से उलझ पड़े. यही नहीं गृहमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग कर उनसे मामले को सुलझाने का आग्रह करने लगे. मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक अकाउंट से ट्वीट किया कि श्री अमित शाह जी इन मामलों को देखिए और तुंरत रोकिए. मासूम जोड़ा असम से मिज़ोरम आ रहा था जब उन पर हमला हो गया. मिजो नेशनल फ़्रंट की सरकार भाजपा के साथ गठबंधन में है. असम और मिज़ोरम के बीच सीमा विवाद नया नहीं है. पिछले कुछ महीनों से दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर तनाव है. इस विवाद पर गृह मंत्री अमित शाह ने दो दिन पहले अपने पूर्वोत्तर के दौरे के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों से बातचीत भी की थी. मिजोरम के मुख्य मंत्री के कुछ देर बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर दिया कि माननीय मुख्यमंत्री जी मिज़ोरम की साइड के पुलिस अधीक्षक हम लोगों से कह रहे हैं कि जब तक आप पीछे नहीं हटेंगे तब तक उनके नागरिक न तो सुनेंगे न हिंसा रोकेंगे. ऐसी हालात में हम सरकार कैसे चला सकते हैं. जवाब में मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा ने भी हिमंता बिस्वा शर्मा को टैग किया और लिखा कि अमित शाह जी के साथ हुई सौहार्दपूर्ण बैठक के बाद ये हैरानी की बात है कि असम पुलिस की दो टुकड़ियों और नागरिकों ने मिज़ोरम की सीमा के भीतर घुसकर वहां के निवासियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ दी.