Delivering on our commitment of better service to passengers, railways has improved punctuality of its trains from 60% in April-June '18 to 70% this month.https://t.co/d6U4A8kMNC pic.twitter.com/2byyBh9m9K
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) July 18, 2018
मुमकिन है, रेलमंत्री का आशय यह हो कि जो गाड़ी पहले 20 घंटे की देरी से चल रही थी, वह अब 15 घंटे की देरी से चल रही है. अगर पूर्व और उत्तर की ओर जाने वाली रेलगाड़ियों के लेट चलने का यह प्रतिशत है, तो फिर रेलमंत्री को किस बहीखाते से सुधरा हुआ डेटा मिल जाता है.
केंद्रीय रेलमंत्री ने पिछले दो महीनों में तमाम अख़बारों में जो इंटरव्यू दिए हैं, अगर सबकी कॉपी एक साथ रखकर देखें और उन्हीं अख़बारों में किसी किनारे पर रेल की समस्या को लेकर छपी ख़बरों को देखें, तो पता चलेगा कि कितना अंतर है. लेट चलने के कारणों में भी सुविधानुसार बदलाव नज़र आने लगता है.



जो लोग रेल में चलते हैं, वे भी बताएं कि समय में 10 प्रतिशत का सुधार हुआ है क्या...? हुआ है, तो अच्छी बात है. हम यही चाहते हैं कि रेल मंत्रालय काम करे.
लोको पायलट दो दिन से भूखे रहकर ट्रेन चलाते रहे, उनकी मांगें नहीं मानी गईं. सातवें वेतन आयोग को दो साल हो गए और अभी तक रेलवे के ड्राइवरों का माइलेज भत्ता तय नहीं हुआ है. नई भर्ती के लिए आए फॉर्म बड़ी संख्या में फोटो के कारण छांट दिए गए. जब हमने इस मसले की तरफ ध्यान दिलाया और परेशान बेरोज़गारों ने खुद भी रेलमंत्री को ट्वीट किया, तब जाकर होश आया है.
अंग्रेज़ी दैनिक 'इकोनॉमिक टाइम्स' के अनुसार रिजेक्ट किए गए 70,000 फॉर्म दोबारा भरने का मौका दिया जाएगा. इसके लिए बधाई. इसी तरह हमें जनता की समस्याओं को बताना है और रेलमंत्री को काम करना है. नौजवानों के जीवन से खिलवाड़ ठीक नहीं है.
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