गुजरात में बीजेपी को चुनौती देने की आधी ईमानदार कोशिश भी कांग्रेस के लिए गेम चेंजर साबित होती. यह असंतुष्ट पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नया जोश पर देती जो लगातार मिल रही हार के कारण धीरे-धीरे पार्टी से दूर होते जा रहे हैं और जिन्होंने राहुल गांधी को नेता के रूप में और गंभीरता से लेने का मौका दिया.
तो आप सोचेंगे कि गांधी परिवार के वंशज और उनकी पार्टी इस साल के आखिर में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए कड़ा परिश्रम कर रहे हैं जिसकी उन्हें जरूरत है. लेकिन अब कांग्रेस वैसी नहीं होगी, क्या होगी?
बीजेपी के दलबदलू और अब कांग्रेस के बागी शंकरसिंह वाघेला की मंगलवार को सार्वजनिक रूप से अपनी ताकत दिखाने की योजना है जिसमें वह दिखाना चाहते हैं कि पार्टी के 57 विधायक उनके साथ हैं. गुजरात में कांग्रेस के प्रभारी और पार्टी के महासचिव अशोक गहलोत रविवार को भरतसिंह सोलंकी के साथ वाघेला के घर लंच पर गए थे. सोलंकी गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और वाघेला के मुख्य प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं.
सोलंकी ने फोन पर बताया, 'मुझे अभी तक नहीं पता कि बापू (वाघेला) की समस्या क्या है. मैं तीसरी पीढ़ी का कांग्रेसी हूं और गुजरात में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हूं. मैं आपसे पहली बार कह रहा हूं कि मैंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है और मैंने पार्टी को यह भी बता दिया है कि मुख्यमंत्री पद के लिए मैं कोई दावेदार नहीं हूं. इस सबके बावजूद अगर उनको कोई दिक्कत है, तो अब मैं और क्या कह सकता हूं?'
उन्होंने आगे कहा, 'गुजरात में जबरदस्त सरकार विरोधी लहर है और पूरी टीम क्षेत्र में यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि हम जीतें. अगर कोई इस लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहता, तो मैं क्या कह सकता हूं? बापू मुझसे कहीं बड़े हैं, मैं उनका आदर करता हूं.'
वाघेला ने सोलंकी की टिप्पणी पर या फिर अपनी योजनाओं पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उनके सहयोगियों ने बताया कि मंगलवार को उनका शक्ति प्रदर्शन पार्टी को उनका जवाब होगा. (7 हफ्ते पहले भी अपने घर पर उन्होंने ऐसी ही बैठक बुलाई थी जिसमें कांग्रेस के 57 में से 37 विधायक शामिल हुए थे.) वाघेला ने कथित रूप से मांग की है कि सोलंकी की जगह उन्हें गुजरात में कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए और साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए.
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस सोलंकी को अध्यक्ष पद से हटाने को तैयार है लेकिन उनकी जगह वाघेला जो कि एक राजपूत नेता हैं, को नहीं बल्कि सोलंकी की तरह ही किसी ओबीसी नेता को राज्य में पार्टी की कमान सौंपना चाहती है. राहुल गांधी इस बात को लेकर अड़े हुए हैं कि वह वाघेला को चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित नहीं करेंगे. सभी वर्तमान विधायकों को टिकट देने की सार्वजनिक घोषणा कर कांग्रेस को यकीन है कि उसने वाघेला के विद्रोह को दबा दिया है.
वाघेला के सहयोगी इस पर हंसते हैं और कहते हैं, विधायक जीतना और सरकार का हिस्सा बनना चाहते हैं लेकिन दिल्ली के नेता संभवत: दो दशकों से राज्य में सत्ता पर काबिज बीजेपी सरकार के खिलाफ सत्ताविरोधी लहर को भुनाने का मौका गंवा रही है. वाघेला ने राहुल गांधी के साथ अपनी नाखुशी खुले तौर पर जाहिर कर दी है. वह राहुल के साथ होने वाली मुलाकातों में नहीं पहुंचे, ट्विटर पर उन्हें अनफॉलो भी कर दिया और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ खुलेआम बात भी की. बीजेपी भी राज्य में कांग्रेस पार्टी को तोड़ने के लिए उत्सुक हैं, क्योंकि गुजरात चुनाव अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है और कांग्रेस में फूट पड़ने के बाद मिलने वाली यह जीत दोनों के लिए ज्यादा ही मीठी होगी.
बीजेपी के सूत्र दावा करते हैं कि अमित शाह का सपना भी खुद गुजरात का मुख्यमंत्री बनने का है, लेकिन फिलहाल उनके लिए निश्चित रूप से मिशन 2019 से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है.
गुजरात के एक कांग्रेस नेता ने कहा, 'यूपी में जहां कि चतुष्कोणीय मुकाबला था, अपनी सारी ऊर्जा खर्च करने की बजाय राहुल गांधी को गुजरात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था, जहां बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस अकेली पार्टी है, विशेषकर पाटीदार आंदोलन और मेहसाणा में दलितों के प्रदर्शन के बाद.' राहुल गांधी को साल भर के लिए गुजरात में ही रहना चाहिए था और खुद इन प्रदर्शनों का नेतृत्व करना चाहिए था. हमने उन्हें राजी करने की कोशिश की थी लेकिन नाकाम रहे. इसलिए अब हम परिचित परिदृश्य की ओर देख रहे हैं, यानी - हार.'
गुजरात के एक स्थानीय नेता ने बताया, 'वास्तव में पाटीदारों के युवा नेता हार्दिक पटेल को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा तब झिड़की मिली थी जब उन्होंने अपने संदेशवाहकों को भेजा था, जिसके बारे में बताया भी नहीं जा सकता.'
उनमें से एक ने व्यंग्यपूर्वक कहा, 'इस उम्र में भी बापू में सत्ता की जबर्दस्त भूख है. ऐसा लगता है कि हमारे नेताओं में सत्ता पाने की इच्छा ही नहीं है. गोवा के मामले को ही देखें, जहां हमने हार को जीत में बदल दिया.'
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कहते हैं, अफवाहें जैसे कि वरिष्ठ पार्टी नेता अहमद पटेल के बेटे फैसल भी गुजरात चुनाव लड़ेंगे, जो कि बिल्कुल गलत है, का भी कांग्रेस द्वारा खंडन नहीं किया जा रहा है. एक कांग्रेसी नेता ने कहा, 'वे (बीजेपी) इन चीजों का इस्तेमाल हमें वंशवादी पार्टी बताकर खारिज करने के लिए कर रहे हैं और हम उसका माकूल जवाब तक नहीं दे रहे.'
गुजरात में दिसंबर से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं, और मौजूदा स्थिति के अनुसार अक्टूबर में राहुल गांधी कांग्रेस की कमान संभालने वाले हैं. जब तक कोई चमत्कार न हो, उनके अध्यक्ष पद के कार्यकाल की शुरुआत एक और हार से हो सकती है.
(स्वाति चतुर्वेदी लेखिका और पत्रकार हैं. वह 'द इंडियन एक्सप्रेस', 'द स्टेट्समैन' और 'द हिंदुस्तान टाइम्स' में काम कर चुकी हैं)
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This Article is From Jun 12, 2017
गुजरात के कांग्रेसी नेताओं ने कहा, राहुल गांधी फिर गलती कर रहे हैं
स्वाति चतुर्वेदी
- ब्लॉग,
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Updated:जून 12, 2017 20:11 pm IST
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Published On जून 12, 2017 19:56 pm IST
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Last Updated On जून 12, 2017 20:11 pm IST
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