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This Article is From Nov 18, 2019

मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी परीक्षा शुल्क वृद्धि वापस ली और इसी के साथ मैंने नौकरी सीरीज़ बंद कर दी

Ravish Kumar
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    नवंबर 18, 2019 23:08 pm IST
    • Published On नवंबर 18, 2019 23:04 pm IST
    • Last Updated On नवंबर 18, 2019 23:08 pm IST

माननीय मुख्यमंत्री कमलनाथ जी

आपका बहुत शुक्रिया. आपने एक फ़ेसबुक पोस्ट के आधार पर फार्म की फ़ीस वृद्धि का फ़ैसला वापस लिया. छात्र जिस तरह से राहत महसूस कर रहे हैं उससे पता चलता है कि उनके लिए 1000-2000 की फ़ीस बड़ी बात थी. उन्हीं ने बताया है कि आपने बढ़ी हुई फ़ीस वापस ले ली है. अब 250 और 500 में फार्म भरे जा सकेंगे. 2000 नहीं देने पड़ेंगे.

यह पत्र इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि फ़ेसबुक पर ही लिखा था कि आपकी सरकार के तहत मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने फार्म की फ़ीस बढ़ा दी है. तो यहां के पाठकों को बताना ज़रूरी है. उसी दिन पता चल गया था कि आपने यह जान कर नाराज़गी ज़ाहिर की थी कि यह उचित नहीं है. तभी छात्रों ने उम्मीद जताई थी कि आप फ़ीस वृद्धि वापस लेंगे.

देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है. जनता आर्थिक चोट से कराह रही है. आप सोच भी नहीं सकते कि ज़मीन पर लोगों की क्या हालत है. ऐसे में 2000 रुपये फार्म के फ़ीस लेना भयानक कष्टकारी था.

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मेरा मानना है कि मध्य प्रदेश ही नहीं पूरे भारत में ख़ासकर हिन्दी प्रदेशों में सरकारी भर्तियों की परीक्षा का हाल बहुत बुरा है. इसमें सुधार की ज़रूरत है. उसकी विश्वसनीयता ऐसी हो कि कोई उंगली न उठा सके. परीक्षा लेने से लेकर ज्वाइनिंग लेटर देने की प्रक्रिया भी तय हो ताकि किसी को परेशानी न हो. वैकेंसी न हो तो साफ़ साफ़ कह दें कि नहीं है लेकिन जब हो तो उसे समय सीमा के भीतर ईमानदारी से संपन्न कराने की ज़िद हो.

आयोग की ख़राब छवि की क़ीमत अंत में निर्वाचित प्रतिनिधी ही चुकाते हैं. इसलिए सावधान रहने की ज़रूरत है. मुझे उम्मीद है अब आपका ध्यान इस ओर होगा.

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा जी का शुक्रिया जिन्होंने मेरे पोस्ट के बाद ट्वीट किया कि सरकार संवेदनशील है. उन्होंने मेरे पीछे लोगों को नहीं लगाया कि फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ लिख रहा है तो इसे गाली दो. जेएनयू की फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ लिखने पर आईटीसेल ऐसे पीछे पड़ा है जैसे कोई अपराध कर दिया. आनंद राय का भी शुक्रिया. हमारे सहयोगी अनुराग द्वारी का भी. आपके मीडिया सलाहकारों का भी शुक्रिया जिन्होंने आपकी सरकार की सख़्त आलोचना में लिखे गए फ़ेसबुक पोस्ट उठा कर आप तक पहुंचा दिया. आमतौर पर मीडिया सलाहकार ऐसी आलोचना को छुपा लेते हैं और सरकार को नुक़सान हो जाता है.

त्वरित कार्रवाई के लिए आपका शुक्रिया. अब अगले सवाल की प्रतीक्षा करें. और इसी तरह हर सवाल के एवज़ में कदम उठाते रहें.

रवीश कुमार

नोट:
1. शुक्रिया का यह पत्र मध्य प्रदेश सरकार के सिर्फ़ इस एक कदम तक ही सीमित है.
2. मैंने नौकरी सीरीज़ बंद कर दी है. अब इस मामले में किसी भी राज्य से छात्र मुझसे संपर्क न करें.
3. मुझे गाली देने वाले छात्र इस फ़ैसले से खुश हो सकते हैं.

जिस देश के नौजवानों की राजनीतिक समझ थर्ड क्लास और सांप्रदायिक हो जाए उन्हें हनुमान जी संजीवनी देकर भी नहीं बचा सकते हैं. आप नौजवानों को शर्म आनी चाहिए कि रात रात भर जाग कर किए गए हमारी मेहनत में आपको मोदी विरोध नज़र आता है. जेएनयू की फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ़ स्टैंड लेने पर गाली दी जाती है और आप चुप रहकर सहमति देते हैं.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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