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यूपी कैसे बनेगा एक ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था, 'योगीनॉमिक्स' से कैसे हो रहा है कायाकल्प

डॉ. मनीष दाभाडे
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जुलाई 14, 2026 10:36 am IST
    • Published On जुलाई 14, 2026 10:36 am IST
    • Last Updated On जुलाई 14, 2026 10:36 am IST
यूपी कैसे बनेगा एक ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था, 'योगीनॉमिक्स' से कैसे हो रहा है कायाकल्प

हर महान सभ्यता के इतिहास में एक ऐसा क्षण आता है जब उसके लोग सामूहिक रूप से यह तय करते हैं कि पिछड़ेपन की पहचान अब स्वीकार्य नहीं. उत्तर प्रदेश के लिए वह क्षण मार्च 2017 में आया, जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. यह महज़ एक सरकार का बदलाव नहीं था, यह उत्तर प्रदेश के इरादे का बदलाव था. नौ साल बाद, जब वे 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं, यह स्पष्ट हो चुका है कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं जिनके पास विजन भी है, प्रशासनिक कौशल भी है और उस विजन को ज़मीन पर उतारने की राजनीतिक इच्छाशक्ति भी. प्रदेश का आर्थिक कायापलट अब केवल राजनीतिक वायदा नहीं, यह एक दस्तावेजी सच्चाई है, जिसे नीति आयोग ने प्रमाणित किया है. ज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने स्वीकार किया है और फरवरी 2026 में विधानसभा में पेश उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक पहले इकोनॉमिक सर्वे ने अभिलेखबद्ध किया है.

उस इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़े किसी भी ऐतिहासिक कसौटी पर असाधारण हैं. राज्य की जीडीपी 2016-17 के 13.30 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 30.25 लाख करोड़ रुपये हो गई है, 10.8 फीसद की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर). 2023-24 में जब देश की जीडीपी 9.6 फीसद की दर से बढ़ी, तब उत्तर प्रदेश ने 11.6 फीसद की दर से राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ा. प्रदेश देश की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से उठकर दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. 2026-27 का बजट 9.12 लाख करोड़ रुपये का है, यानी 2017 में मिले बजट का तीन गुना. यह ग्रोथ अपने आप नहीं हुई, यह योगी आदित्यनाथ के उस गवर्नेंस मॉडल का परिणाम है जो जवाबदेही, प्रौद्योगिकी और क्रियान्वयन को एकसाथ जोड़ता है.

बाहरी सत्यापन और भी ठोस है. नीति आयोग के फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2025 में उत्तर प्रदेश को 18 प्रमुख राज्यों में सातवां स्थान मिला और वह 'फ्रंट-रनर' श्रेणी में पहुंचा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के साथ. नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तर प्रदेश ने 2018 के बाद से सभी राज्यों में सर्वाधिक सुधार दर्ज किया- 25 अंकों की ऐतिहासिक छलांग. क्लीन एनर्जी के एसडीजी गोल 7 में प्रदेश को 100 में से 100 अंक मिले, देश का एकमात्र ऐसा राज्य जिसने अप्रैल 2024 तक प्रत्येक घर में बिजली पहुंचाई. ये आंकड़े कोई सरकार नहीं गढ़ सकती. यह भारत की शीर्ष नीति-संस्था का प्रमाणपत्र है. यह प्रमाणपत्र सीधे सीएम योगी के उस डैशबोर्ड-ड्रिवन गवर्नेंस का परिणाम है जिसमें हर विभाग की प्रोग्रेस हर महीने रिव्यू होती है, हर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर जवाबदेह है और हर स्कीम की डिलीवरी की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होती है.

'योगीनॉमिक्स'  से होता यूपी का कायाकल्प

इस कायापलट की जड़ में जो गवर्निंग फिलॉसफी है, उसे विश्लेषक 'योगीनॉमिक्स' कहने लगे हैं. इसकी वैचारिक सुसंगति ही योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों से अलग करती है. उनकी बुनियादी स्थापना सरल किन्तु क्रांतिकारी है: कानून और व्यवस्था केवल एक प्रशासनिक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की अनिवार्य पूर्व शर्त है. निवेशक के आने से पहले, कारखाने खड़े होने से पहले, सप्लाई चेन बनने से पहले, राज्य को यह भरोसा दिलाना होगा कि वह जन और धन की रक्षा करेगा. सीएम योगी ने यह भरोसा दिलाया: डकैती में 85 फीसद की कमी, हत्याओं में 41 फीसद की गिरावट, क्राइम रेट अब राष्ट्रीय औसत से नीचे. आपराधिक गिरोहों से 4,076 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति मुक्त कराई गई.'एक जिला,एक माफिया' की कलंक-पहचान को जानबूझकर 'एक जिला,एक उत्पाद' से बदला गया. यह बदलाव सीएम योगी के उस नेतृत्व का प्रतीक है जो प्रतीक और सार दोनों को एक साथ साधता है.

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ओडीओपी स्कीम इसी सोच का व्यावहारिक विस्तार है.प्रदेश के 75 जिलों की सांस्कृतिक विशिष्टता को एक्सपोर्ट शक्ति में बदलने वाली यह योजना सीएम योगी की सर्वाधिक परिवर्तनकारी नीति है. प्रदेश का निर्यात 86,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गया है. प्रदेश के 1.31 लाख कारीगरों को प्रशिक्षण और टूलकिट मिली, 3.16 लाख नए रोज़गार सृजित हुए और 79 जीआई टैग्स मुरादाबाद के पीतल, भदोही के कालीन और वाराणसी की रेशम को ग्लोबल मार्केट में पहचान दिलाते हैं. केंद्र सरकार ने इसकी सफलता देखकर इसे पूरे देश में लागू किया. एक राज्य की नीति का राष्ट्रीय आदर्श बनना दुर्लभतम उपलब्धि है. यह सीएम योगी की उस प्रशासनिक स्पष्टता और दूरदर्शिता का प्रमाण है जो जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को विजन से जोड़ती है.

यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की क्या प्रगति है

किन्तु उत्तर प्रदेश की आर्थिक गाथा का सबसे रणनीतिक और ऐतिहासिक अध्याय है यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर. यह सीएम योगी का वह दूरदर्शी दांव है जो उत्तर प्रदेश को केवल एक बड़ी उपभोक्ता अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक रणनीतिक औद्योगिक महाशक्ति बनाता है. 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित, लखनऊ, कानपुर, झांसी, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट- इन छह नोड्स में फैले इस कॉरिडोर ने 35,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए हैं. इनमें से 12,000 करोड़ रुपये धरातल पर उतर चुके हैं. 62 कंपनियों को ज़मीन आवंटित, नौ यूनिट्स पूरी तरह चालू और 15 और यूनिट्स शीघ्र उत्पादन शुरू करने की कगार पर हैं. लखनऊ नोड पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस विश्व की सबसे शक्तिशाली सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का निर्माण कर रही है. कानपुर में अडानी डिफेंस सिस्टम्स ने 1,500 करोड़ रुपये का अम्युनिशन प्लांट स्थापित किया है. अलीगढ़ ड्रोन और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी का राष्ट्रीय केंद्र बन रहा है, जहां 24 कंपनियां लॉयटरिंग म्युनिशंस, रडार सिस्टम्स और प्रिसिजन इंस्ट्रूमेंट्स बना रही हैं. चित्रकूट में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड रडार और एयर डिफेंस सिस्टम्स तैयार कर रही है. जनवरी 2026 में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में स्वयं कहा,''विकसित भारत का मार्ग विकसित उत्तर प्रदेश से होकर जाता है.'' वहीं 197 एमओयू से 52,658 रोज़गार सृजित होने की संभावना है और पाइपलाइन में 110 और कंपनियां हैं. सीएम योगी की यह रणनीतिक दांव कि उत्तर प्रदेश की भौगोलिक केंद्रियता और विशाल श्रमशक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा की धुरी बनाया जा सकता है, आत्मनिर्भर भारत के सबसे ठोस उदाहरणों में से एक बन चुकी है.

बुनियादी ढांचे का रिकॉर्ड सीएम योगी की प्रशासनिक गति का दर्पण है.  उत्तर प्रदेश अब भारत के समूचे एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 42 फीसद है. प्रदेश के बजट (2026-27) में कुल व्यय का 19.5 फीसद करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये- सड़क, लॉजिस्टिक्स और एयरपोर्ट के लिए निर्धारित हैं. गंगा एक्सप्रेसवे शुरू हो चुका है और जेवर में बना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पांच रनवे तक विस्तारित हो रहा है.

इसके साथ-साथ सीएम योगी ने एक और दांव खेला- आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ा. महाकुंभ 2025 में 66 करोड़ श्रद्धालु पधारे, प्रति श्रद्धालु 5,877 रुपये के व्यय के साथ 3.88 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधि हुई जबकि सरकार ने मात्र 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए. अयोध्या, काशी और मथुरा धार्मिक पर्यटन की अर्थव्यवस्था के स्तंभ बन चुके हैं. पर्यटकों की संख्या 23 करोड़ से बढ़कर 156 करोड़ हो गई है. किसी और मुख्यमंत्री ने आस्था और वित्त को इस दक्षता से नहीं जोड़ा.

यूपी कैसे बनेगा एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था

एक ट्रिलियन डॉलर के टारगेट का ईमानदार मूल्यांकन भी ज़रूरी है. आज की करीब 356 बिलियन डॉलर की जीडीपी से इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर साल 15-16 फीसद की नॉमिनल ग्रोथ आवश्यक है. सीएम योगी ने स्वयं टाइमलाइन 2029-30 तक संशोधित की है. प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये दोगुनी तो हुई, पर नेशनल एवरेज 1.84 लाख रुपये से अभी पीछे है. कृषि और गुणवत्तापूर्ण रोजगार में संरचनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं. किन्तु इन चुनौतियों को स्वीकार कर उनसे लड़ना परिपक्व नेतृत्व की पहचान है. विकसित उत्तर प्रदेश @2047 डॉक्युमेंट में 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य रखा गया है. भारत की अनुमानित 30 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी में 20 फीसद का योगदान. यह सोच सीएम योगी की उस दूरदर्शी राजनीति का परिचय देती है जो चुनावी चक्रों से परे, आने वाली पीढ़ियों की दृष्टि से सोचती है.

यही इस कहानी का सबसे गहरा महत्त्व है. यदि भारत का सबसे बड़ा राज्य पिछड़ा रहे तो विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा. देश की 17 फीसद आबादी वाले उत्तर प्रदेश का विकास केवल एक राज्य का मसला नहीं यह समूचे राष्ट्रीय मानव विकास का प्रश्न है. पीएम आवास योजना में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, 6 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर, बेरोज़गारी 6.2 फीसद से घटकर 2.24 फीसद, ये उपलब्धियां सीएम योगी के डबल इंजन शासन की देन हैं, जहां केंद्रीय योजनाएं और राज्य का क्रियान्वयन एक साथ चलते हैं. जब नीति आयोग उत्तर प्रदेश को एसडीजी इंडेक्स में देश का सर्वाधिक प्रगतिशील राज्य घोषित करता है, और रक्षामंत्री स्वयं कहते हैं कि विकसित भारत का रास्ता विकसित उत्तर प्रदेश से होकर जाता है तो, यह सिद्ध हो जाता है कि सीएम योगी का यह प्रयोग अब केवल उत्तर प्रदेश का नहीं, पूरे गणतंत्र का सबसे महत्त्वपूर्ण डेवलपमेंट स्टोरी है.
2027 में मतदाताओं के सामने प्रश्न यह नहीं होगा कि एक ट्रिलियन डॉलर का टारगेट किस साल पूरा होगा. प्रश्न होगा- क्या विजन सही है? क्या नींव ठोस है? और क्या इस भव्य संरचना को पूरा करने के लिए वास्तुकार सही है? आँकड़े, संस्थाएं और इतिहास, तीनों का उत्तर एक समान है.

(डिस्क्लेमर: लेखक द इंडियन फ्यूचर्स थिंक टैंक के संस्थापक और दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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