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This Article is From Apr 02, 2014

चुनाव डायरी : प्रचार के लिए जरूरी बनता हेलीकॉप्टर

Akhilesh Sharma
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  • Updated:
    नवंबर 20, 2014 13:07 pm IST
    • Published On अप्रैल 02, 2014 13:29 pm IST
    • Last Updated On नवंबर 20, 2014 13:07 pm IST

मंगलवार को नरेंद्र मोदी बरेली की रैली में दो घंटे देर से पहुंचे, क्योंकि दिल्ली से उनके हेलीकॉप्टर को उड़ने की इजाजत नहीं मिली। बरेली से उनके हेलीकॉप्टर को टेक ऑफ करने के लिए करीब 40 मिनट इंतजार करना पड़ा और इस वजह से मध्य प्रदेश में उन्हें रैलियों में पहुंचने में देरी हुई।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को भी इसी तरह की दिक्कत आई। उन्हें चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए रायपुर से रायगढ़ जाना था, लेकिन 40 मिनट तक इंतजार करते रहे। बाद में रायगढ़ से जांजगीर जाने में भी उन्हें दिक्कत आई।

वहीं, हेलीकॉप्टर में आई खराबी की वजह से राहुल गांधी रांची से गुमला नहीं जा पाए और उन्हें वहां का चुनावी कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। ममता बनर्जी के हेलीकॉप्टर में भी तकनीकी खराबी आई, जिससे पश्चिमी मिदनापुर में उनके चुनावी कार्यक्रम देर से शुरू हुए।

चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के लिए हेलीकॉप्टर बेहद जरूरी है। एक जगह से दूसरी जगह तुरंत पहुंचने के लिए इनका इस्तेमाल होता है। हेलीकॉप्टर की वजह से ही स्टार प्रचारक एक दिन में छह से आठ तक चुनावी सभाएं कर सकते हैं।

विधानसभा चुनावों में इनका ज्यादा इस्तेमाल होता है, क्योंकि वहां बड़े नेताओं को छोटे-छोटे इलाकों में चुनावी सभाओं के लिए पहुंचना होता है। सड़कों के जरिये वे एक दिन में इतनी जगहों पर नहीं पहुंच सकते। हर उम्मीदवार चाहता है कि उसके इलाके में बड़े नेता की सभा हो। यह अलग बात है कि पुराने दिनों में चंद नेताओं को छोड़ ज्यादातर चुनावी प्रचार के लिए ट्रेन, कार या फिर ऐसे ही दूसरे साधनों का इस्तेमाल करते थे।

कांग्रेस और बीजेपी जैसे बड़े राजनीतिक दलों के किराए पर हेलीकॉप्टर देने वाली कंपनियों के साथ अनुबंध होते हैं। इन कंपनियों से चुनावों से पहले ही करार कर लिया जाता है, ताकि जरूरत के वक्त हेलीकॉप्टर आसानी से मिल सके। लेकिन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल इन दो बड़ी पार्टियों के नेताओं तक ही सीमित नहीं रहा है। क्षेत्रीय दलों के मुखिया भी चुनाव प्रचार के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। चुनाव के वक्त हेलीकॉप्टर की मांग बढ़ जाती है।

देश में हेलीकॉप्टरों की संख्या कम है। पहले करीब तीन सौ थे, अब ढाई सौ ही रह गए हैं। इसलिए छह-आठ महीने पहले ही बुकिंग करवा ली जाती है। चुनाव का सीजन हेलीकॉप्टर किराए से देने वाली कंपनियों के लिए कमाई का मौका होता है। एक अंदाजे के मुताबिक इन कंपनियों की चुनावों के दौरान आमदनी 40 से 50 करोड़ रुपये तक बढ़ जाती है।

चुनाव प्रचार के दौरान हेलीकॉप्टर धूल छानते हैं, इसीलिए ऑपरेटर किराए में भी बढ़ोतरी कर देते हैं। वीवीआईपी नेताओं के लिए अब दो पायलटों वाले हेलीकॉप्टर में उड़ना अनिवार्य कर दिया गया है। दोहरे इंजन वाले हेलीकॉप्टरों की संख्या कम है और मांग ज्यादा, लिहाजा चुनाव के वक्त इनका किराया भी बढ़ जाता है। एक अनुमान के मुताबिक ऐसे हेलीकॉप्टरों का किराया दो लाख रुपये से तीन लाख रुपये प्रति घंटे है, जो कि सामान्य से 30 से 50 फीसदी ज्यादा किराया है। इकलौते इंजन वाले हेलीकॉप्टरों का किराया एक लाख रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये प्रति घंटे है।

हेलीकॉप्टरों की उड़ान के साथ ही उनकी सुरक्षा का बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्य के बाद से डीजीसीए और ज्यादा सतर्क हुआ है। इस बार चुनावों के दौरान नेताओं और हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। डीजीसीए में चुनाव के वक्त हेलीकॉप्टरों की उड़ानों पर नजर रखने के लिए और उनकी सुरक्षा जांच पर निगरानी के लिए एक अलग सेल बनाई गई है। ऑपरेटरों को हर सोमवार डीजीसीए में रिपोर्ट देनी होती है कि कहीं चुनाव आयोग ने उनकी उड़ानों या यात्रियों को लेकर कोई ऐतराज तो नहीं किया है।

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