बिहार में 9 लाख की आबादी वाले शेखपुरा जिला की पुरानी पहचान गुलाबी प्याज और पत्थर उत्खनन के रूप में रही है. मगर बदलते जीवन शैली के इस नए युग में जिला की एक भयावह नई पहचान उभर रही है. यह भयावह नई पहचान HIV संक्रमितों की बढ़ती संख्या के रूप में उभर रही है. इस भयावह खतरे का अंदाजा इस आंकड़े से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने मार्च में जिला में HIV से संक्रमित 10 नए मरीजों की पहचान हो चुकी है.
एचआईवी का हाट स्पॉट बनने की आशंका
जनवरी से लेकर 18 अप्रैल यानी साढ़े 3 महीने में इस जानलेवा संक्रमण के 21 नए मरीज चिन्हित हो चुके हैं. इससे पहले जिला में एचआईवी से संक्रमित 500 मरीजों का इलाज चल रहा है. यह समूचा आंकड़ा सिर्फ सरकारी है और अधिकांश लोग इसकी जांच ही नहीं कराते हैं. तेजी से बढ़ रहे संक्रमितों के इस भयावह आंकड़ों से शेखपुरा के एचआईवी का हाट स्पॉट बनने की आशंका जताई जाने लगी है.
कभी महिला तो कभी पति नहीं कराते जांच
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की महिला एडवाइजर प्रो सुनीता कुमारी ने बताया कि सरकार ने सभी गर्भवती तथा उनके पति की HIV जांच को अनिवार्य और मुफ्त किया हुआ है. लेकिन इसके बावजूद आधी गर्भवती महिलाएं भी इसकी जांच नहीं कराती हैं. जबकि जो गर्भवती इसकी जांच कराती हैं, उसमें आधे के पति अपनी जांच से भाग जाते हैं.
साढ़े तीन महीने में 13 महिला और 8 पुरुष संक्रमित
उन्होंने बताया कि मार्च में 10 संक्रमित की पहचान-एचआईवी संक्रमण को लेकर पिछला मार्च महीना सबसे खतरों वाला साबित हुआ है. मार्च महीने में 10 नए संक्रमित मिले हैं. इस वर्ष जनवरी से अब तक जिला में एचआईवी के 21 नए संक्रमित मिले हैं. इसमें एक गर्भवती सहित 13 महिला तथा 8 पुरुष शामिल हैं. संक्रमित गर्भवती महिला को स्पेशल केयर में रखकर दवा दी जा रही है. जिला में इससे पहले लगभग 500 ऐसे व्यक्ति का निःशुल्क इलाज और दवा चल रहा है,जो एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एचआईवी संक्रमित मिले हैं.
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