Bihar News: बिहार पुलिस मुख्यालय ने सोशल मीडिया पर वर्दी का रौब झाड़ते हुए रील्स और वीडियो बनाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. जिसमें सबसे चर्चित नाम पूर्णियां की तत्कालीन महिला थानाध्यक्ष शबाना आजमी का है, जो सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता के लिए जानी जाती थीं. दरअसल मुख्यालय के निर्देश पर विभिन्न जिलों के एसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रील बनाने वाले 50 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है.
शबाना आजमी: रील्स ने चमकाया फिर डुबोया
पूर्णियां की महिला थानाध्यक्ष रहीं शबाना आजमी इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी सक्रिय रहती थीं. उनकी पहचान एक 'पीपुल्स कॉप' (People's Cop) के रूप में बन गई थी और सोशल मीडिया पर उनके 15 हजार से अधिक फॉलोवर्स हैं. लेकिन, पुलिसिंग के साथ-साथ रील्स बनाने का उनका शौक उनके करियर के लिए मुसीबत बन गया. उनकी इसी कार्यशैली को लेकर पूर्णियां पुलिस अधीक्षक (SP) स्वीटी सहरावत ने उन्हें निलंबित कर पुलिस लाइन हाजिर कर दिया है. एसपी सहरावत ने स्पष्ट किया है कि रील बनाने के मामले में यह कार्रवाई की गई है और शबाना से सात दिनों के अंदर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है.
क्यों हुई कार्रवाई? नियम और SOP ने फंसाया पेंच
दरअसल, बिहार पुलिस मुख्यालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. मुख्यालय का मानना है कि वर्दी पहनकर ऐसी हरकतें पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करती हैं और यह विभागीय एसओपी (SOP) के पूरी तरह विपरीत है.

पुराना है विवादों से नाता, माफी भी नहीं आई काम
शबाना आजमी पहले भी रील्स बनाने को लेकर विवादों में रह चुकी हैं. जब वह फणीश्वरनाथ टीओपी की प्रभारी थीं, तब उन्होंने अपने ऑफिस चैंबर में प्रभारी की कुर्सी पर अपने परिजनों को बैठाकर तस्वीरें खिंचवाई थीं और रील्स बनाई थीं.
यह मामला खूब सुर्खियों में रहा था और इसे पुलिस मैनुअल का खुला उल्लंघन माना गया था. तब बड़े अधिकारियों ने उनसे स्पष्टीकरण पूछा था और शबाना ने लिखित माफी मांगकर वह पोस्ट सोशल मीडिया से डिलीट कर दी थी. लेकिन, इस चेतावनी के बावजूद उनका रील्स बनाना जारी रहा, जिसका नतीजा अब निलंबन के रूप में सामने आया है.
जानें सिपाही से दरोगा तक का सफर
शबाना आजमी मूल रूप से आरा जिले की रहने वाली हैं और एक निहायत ही सामान्य परिवार से आती हैं. बचपन से मेधावी रहीं शबाना का सपना पुलिस अधिकारी बनने का था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बिहार पुलिस में सिपाही (Constable) के पद से की थी. औरंगाबाद में पदस्थापन के दौरान, उन्होंने अपनी ड्यूटी के साथ-साथ सबइंस्पेक्टर (दरोगा) की तैयारी जारी रखी.
वर्ष 2018 में उनका सपना पूरा हुआ और वह सबइंस्पेक्टर बन गईं. पूर्णियां जिला में उनकी पहली पोस्टिंग कसबा थाना में हुई, फिर वह सहायक खजांची थाना में रहीं और वर्ष 2025 में उन्हें फणीश्वरनाथ रेणु टीओपी की कमान मिली. कुछ समय पहले ही उन्होंने महिला थानाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हासिल की थी, लेकिन अब उनका करियर सोशल मीडिया के 'क्रेज' की वजह से विवादों में है.
यह भी पढ़ें- IAS आरती डोगरा के खिलाफ एसीबी जांच पर लगी रोक, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दिया फैसला
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं