बिहार के सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
- नीतीश ने पासवान के बयान का किया समर्थन
- पासवान ने भाजपा को अल्पसंख्यकों के बारे में पर्सेप्शन बदलने की सलाह दी थी
- नीतीश ने कहा कि उन्होंने कुछ सोच समझकर ही बोला होगा
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पटना:
केंद्र की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भाजपा को अल्पसंख्यकों के बारे में पर्सेप्शन बदलने की सलाह दी थी. पासवान के इस बयान के एक दिन बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके समर्थन में सामने आए. नीतीश ने सोमवार को कहा कि रामविलास पासवान अगर कुछ बोल रहे हैं तो बिना सोचे समझे नहीं बोलेंगे. नीतीश ने पासवान की बात पर मुहर लगाते हुए कहा कि उनकी उनके साथ बातचीत हुई है. अल्पसंख्यक कल्याण के लिए जो काम हो रहा है इस पर भी चर्चा हुई है और उन्होंने सारे दस्तावेज भी दिए हैं.
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नीतीश ने मीडिया के सामने भाजपा के साथ सरकार बनाने के बाद पहली बार कहा कि हम सब लोगों की पृष्टभूमि आप जानते हैं. इसमें और धर्म निरपेक्षता के मुद्दे पर स्टैंड में कोई परिवर्तन नहीं है.नीतीश से जब ये पूछा गया कि क्या इस मुद्दे पर वो भाजपा को कुछ सलाह देंगे, तब उनका कहना था कि उन्हें क्या करना चाहिए हम भाजपा के सदस्य नहीं हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि गठबंधन की सरकार चल रही हैं कोई समझौता नहीं है. इन विषयों पर गठबंधन की बात कीजिएगा.
VIDEO: बिहार में साल 2020 में ही होंगे चुनाव: सीएम नीतीश
लेकिन नीतीश ने भाजपा का बिना नाम लिए सलाह दिया और कहा कि प्रेम सहिष्णुता और सद्भावना से देश आगे बढेगा. नीतीश के रूख से साफ है कि वो भाजपा के साथ गठबंधन पर सभी मुद्दों से संतुष्ट नहीं हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह संदेश भेजा है कि उनके धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए.
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नीतीश ने मीडिया के सामने भाजपा के साथ सरकार बनाने के बाद पहली बार कहा कि हम सब लोगों की पृष्टभूमि आप जानते हैं. इसमें और धर्म निरपेक्षता के मुद्दे पर स्टैंड में कोई परिवर्तन नहीं है.नीतीश से जब ये पूछा गया कि क्या इस मुद्दे पर वो भाजपा को कुछ सलाह देंगे, तब उनका कहना था कि उन्हें क्या करना चाहिए हम भाजपा के सदस्य नहीं हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि गठबंधन की सरकार चल रही हैं कोई समझौता नहीं है. इन विषयों पर गठबंधन की बात कीजिएगा.
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लेकिन नीतीश ने भाजपा का बिना नाम लिए सलाह दिया और कहा कि प्रेम सहिष्णुता और सद्भावना से देश आगे बढेगा. नीतीश के रूख से साफ है कि वो भाजपा के साथ गठबंधन पर सभी मुद्दों से संतुष्ट नहीं हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह संदेश भेजा है कि उनके धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए.
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