Newborn Baby Girl Found: मां, आखिर मेरी क्या गलती थी…? यह सवाल उन निहारती आंखों में था, जो अभी ठीक से खुली भी नहीं थीं. बिहार के रोहतास जिले के संझौली थाना क्षेत्र से सामने आई यह घटना न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता और दोहरे चरित्र को भी उजागर करती है. नौ महीने तक कोख में पालने के बाद, असहनीय पीड़ा सहकर जन्म देने वाली मां ने आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी देखी कि अपनी नवजात बच्ची को कचरे के ढेर पर फेंक दिया.
यह घटना उस समाज पर सवाल खड़े करती है, जहां एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के नारे गूंजते हैं, वहीं दूसरी ओर ममता को शर्मसार करने वाले ऐसे कृत्य सामने आते हैं. नवजात बच्ची को ठंड के मौसम में बिना कपड़ों के, कांटों से घिरे कचरे के ढेर पर छोड़ दिया गया था, मानो यह मान लिया गया हो कि वह जीवित नहीं बचेगी.
कचरे के ढेर में मिली नवजात बच्ची
संझौली के बीच गांव में शुक्रवार की सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने कचरे के ढेर से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनी. पास जाकर देखा तो वहां एक नवजात बच्ची पड़ी थी. उसके चारों ओर कूड़ा और कांटे थे. यह दृश्य जिसने भी देखा, वह सिहर उठा. मानवता को शर्मसार करने वाली यह तस्वीर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई. ग्रामीणों का कहना है, कि बच्ची को जानबूझकर ऐसी जगह फेंका गया, जहां कांटों से उसे गंभीर चोट लग सकती थी. शायद यह सोचकर कि नवजात अधिक देर तक जीवित नहीं रह पाएगी. लेकिन कहते हैं न- ‘जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई.' वही कहावत इस बच्ची पर सच साबित हुई.
बच्ची को देख उमड़ी भीड़, अस्पताल में भर्ती
बच्ची के मिलने की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई. लोगों ने तुरंत मानवीयता दिखाते हुए बच्ची को उठाया और संझौली अस्पताल पहुंचाया. चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि बच्ची का जन्म बुधवार की रात ही हुआ था और वह महज दो से तीन घंटे की थी. राहत की बात यह रही कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ पाई गई. अस्पताल प्रशासन ने तत्काल इसकी सूचना संझौली थाना पुलिस को दी. पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की. इलाज के बाद नवजात बच्ची को सुरक्षित रूप से चाइल्ड केयर सेंटर भेज दिया गया, जहां उसकी देखरेख की जा रही है.
पुलिस जांच में जुटी, आशा समेत कई लोगों से पूछताछ
संझौली थानाध्यक्ष पूनम कुमारी ने बताया, कि बच्ची के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था. प्रथम दृष्टया यह मामला अमानवीय कृत्य का प्रतीत होता है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किस निर्दयी मां ने नवजात को इस हाल में छोड़ा. गांव की आशा कार्यकर्ता सहित अन्य स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है, ताकि बच्ची की मां और परिजनों का पता लगाया जा सके. थानाध्यक्ष ने कहा, कि पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है. यह भी देखा जा रहा है कि कहीं सामाजिक दबाव, अवैध संबंध या अन्य कारणों से तो ऐसा नहीं किया गया. दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
समाज के लिए आईना है यह घटना
यह घटना केवल एक नवजात के परित्याग की नहीं, बल्कि समाज की सोच पर एक गहरा सवाल है. बेटी को बोझ मानने वाली मानसिकता आज भी कहीं न कहीं जीवित है. जरूरत है कि ऐसे मामलों में सिर्फ कानून ही नहीं, बल्कि समाज भी आत्ममंथन करे, ताकि ‘मां' शब्द कभी कलंकित न हो और हर बेटी को जीने का पूरा हक मिल सके.
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