NEET student death Case: पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर उसके परिजनों की नाराजगी पुलिस प्रशासन के प्रति लगातार बढ़ती जा रही है. शुक्रवार को डीजीपी से मुलाकात कर जहानाबाद लौटने के बाद छात्रा के माता-पिता ने बिहार पुलिस पर मामले को दबाने और सच्चाई से भटकाने का गंभीर आरोप लगाया है.
भरोसा दिलाने के बजाय समझौते की सलाह
छात्रा की मां ने बताया, कि डीजीपी के बुलावे पर वे लोग पटना गए थे, लेकिन वहां उन्हें न्याय का भरोसा दिलाने के बजाय समझौते की सलाह दी गई. बातचीत के दौरान यह कहा गया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है और इसे साबित करने के लिए एक डायरी दिखाई गई, जिसे छात्रा द्वारा लिखा गया बताया गया. हालांकि, परिजनों का दावा है कि डायरी में ऐसा कोई शब्द या संकेत नहीं है, जिससे आत्महत्या की पुष्टि हो सके.
नहीं माने तो मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा
मां ने आरोप लगाया, कि जब उन्होंने आत्महत्या की बात मानने से इनकार किया, तो उन्हें यह कहकर दबाव में लिया गया कि यदि वे नहीं मानेंगे तो आपके परिवार का ब्लड सैम्पल लिया गया है. परिवार के ही किसी सदस्य ने गलत किया है. इतना ही नहीं, परिजनों को यहां तक कहा गया कि यदि नहीं माने तो यह मामला सीबीआई को सौंप दिया जाएगा और फिर उन्हें दो-तीन वर्षों तक न्याय के लिए भटकना पड़ेगा.
मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश
परिजनों का यह भी कहना है कि बातचीत के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों को लेकर मौखिक रूप से गलत जानकारी दी गई. परिजनों का आरोप है, कि पुलिस शुरू से ही पूरे मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश कर रही है, जबकि कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, कि पुलिस किसी बड़े और प्रभावशाली व्यक्ति को बचाना चाहती है और इसी वजह से केस की लीपापोती की जा रही है. परिजनों का कहना है, कि जब डीजीपी से बात नही बनी तो पुलिस वाले जबरन हमें गृहमंत्री के पास ले जाने का दबाब बनाया. यह भी कहा कि अब उन्हें बिहार पुलिस पर अब भरोसा नहीं रहा। छात्रा के माता-पिता ने निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, वे चुप नहीं बैठेंगे.
न्याय नहीं मिला तो आत्महत्या कर लेगा परिवार
इसके बावजूद भी यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएगा. परिजनों का दर्द छलक पड़ा जब उन्होंने कहा, कि एक ओर उनकी बेटी दुनिया छोड़ चुकी है और दूसरी ओर वे खुद तिल-तिल कर मरने को मजबूर किए जा रहे हैं. अब इस पूरे मामले में डीजीपी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. परिजनों का कहना है, कि वे जानना चाहते हैं कि आखिर किसके दबाव में पुलिस के शीर्ष अधिकारी ऐसा रवैया अपना रहे हैं और किसे बचाने की कोशिश की जा रही है.
इनपुट: मुकेश कुमार
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