Motihari News: बिहार के मोतिहारी में जहरीली शराब ने एक बार फिर परिवारों में मातम पसार दिया है. रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव से शुरू हुई इस त्रासदी में अब तक 4 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 15 लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं. सबसे खौफनाक यह है कि शराब पीने वाले 6 से 7 लोगों की आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है. प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज किया है.
एक-एक कर गिरती गई लाशें
घटना की शुरुआत बुधवार शाम को हुई जब बालगंगा और आसपास के इलाकों में लोगों ने शराब का सेवन किया. गुरुवार को प्रमोद यादव की मौत के बाद मामला संदिग्ध लगा, लेकिन शुक्रवार सुबह होते-होते स्थिति भयावह हो गई. इलाज के दौरान परीक्षण मांझी (46 वर्ष) और हीरालाल महतो ने दम तोड़ दिया. एक अन्य व्यक्ति की मौत भी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई. आशंका जताई जा रही है कि करीब 30 से 40 लोगों ने इस जहरीली खेप का सेवन किया है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है.
'आधे घंटे में ही सब धुंधला हो गया'
इस जहरीली शराब का असर इतना घातक था कि सेवन के कुछ ही देर बाद लोगों को दिखना बंद हो गया. लक्ष्मीपुर गदरिया के राजेंद्र कुमार ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि शराब पीने के महज आधे घंटे बाद ही उनकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा. सदर अस्पताल के डॉ. अनूप गौतम ने पुष्टि की है कि अस्पताल पहुंचे अधिकांश मरीजों में आंखों की रोशनी प्रभावित होने के लक्षण मिले हैं. फिलहाल 15 लोग बीमार हैं, जिनमें से 3 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है.
हत्या का केस दर्ज, SIT करेगी जांच
इस कांड ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. मृतक प्रमोद यादव के परिजनों की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता नागा राय को हिरासत में ले लिया है. साथ ही, 6 अन्य संदिग्ध तस्करों को भी पकड़ा गया है. इतना ही नहीं, परसौना पंचायत के चौकीदार भरत राय को सस्पेंड कर दिया गया है. मामले की गहराई से जांच के लिए सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में SIT (विशेष जांच टीम) का गठन किया गया है.
छिपकर इलाज करा रहे लोगों से पुलिस की अपीलएसपी के निर्देश पर साइबर डीएसपी और डीआईयू (DIU) की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जहरीली शराब की यह खेप कहां से आई थी और इसका मुख्य सप्लायर कौन है? कई लोग लोक-लाज और पुलिस के डर से निजी अस्पतालों में छिपकर इलाज करा रहे हैं, जिनसे प्रशासन ने सामने आकर इलाज कराने की अपील की है ताकि उनकी जान बचाई जा सके.
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