'जागो गांव' ने फिजियोथेरेपी शिविर लगाकर अंतरराष्ट्रीय वृद्धा दिवस मनाया.
- फिजियोथेरेपी शिविर लगाकर मनाया गया अंतरराष्ट्रीय वृद्धा दिवस
- बेगूसराय के भगवानपुर में मनाया गया वृद्धा दिवस
- 'जागो गांव' ने मनाया अंतरराष्ट्रीय वृद्धा दिवस
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बेगूसराय:
बेगूसराय के भगवानपुर में 'जागो गांव' ने फिजियोथेरेपी शिविर लगाकर अंतरराष्ट्रीय वृद्धा दिवस मनाया. अंतरराष्ट्रीय वृद्धा दिवस बुजुर्गों के सम्मान एवं समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के लिए मनाते हैं. जागो गांव एक राष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था हैं ,जिसका निबंधन 2010 में सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत नई दिल्ली में करवाया गया. संस्था एक समतामूलक समाज का सपना देखती हैं और स्वस्थ भारत की परिकल्पना करती हैं. अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ग्रामीण भारत में सतत प्रयासरत है, इसी क्रम में सोमवार को शिविर लगाया गया. भविष्य में आगे कदम बढ़ाते हुए ,उनके प्रतिभा ,योगदान एवं सहभागिता को जागो गांव सलाम करती हैं, यह विषय बुढ़ापे में पूरे सहयोग और प्रभावी सहभागिता पर केंद्रित है.
तो इसलिए खुद को बदल नहीं पाते बुजुर्ग और नहीं मानते कि वो गलत हैं...
डॉक्टर गुंजन ने लगभग 100 मरीजों को फिजियोथेरेपी द्वारा इलाज किया. साथ ही डॉक्टर गुंजन ने कहा की वृद्ध व्यक्ति में अपनी आयु के अनुभवों के कारण सांसारिक प्रश्नों को समझने और हल करने की विशेष क्षमता होती है. इसीलिए कहा गया है कि "न सा सभा यत्र न संति वृद्धा:". वृद्ध व्यक्ति की नवीन विषयों को समझने की शक्ति भी नहीं घटती. यही पाया गया है कि 82 वर्ष की आयु में व्यक्ति की विषय को ग्रहण करने की शक्ति 12 वर्ष के बालक के समान होती है. यह शक्ति 22 वर्ष की आयु में सबसे अधिक उन्नत होती है. वृद्धावस्था में होनेवाले विशेष रोग ये हैं : धमनी काठिन्य (arteriosclerosis), तीव्र रक्त चाप (high blood pressure), मधुमेह (diabetes), गठिया (gout), कैंसर (cancer) तथा मोतियाबिंद (cataract). इनमें से प्रथम और द्वितीय रोगों का हृदय और शारीरिक रक्त संचरण से सीधा संबंध होने के कारण उनसे अनेक प्रकार से हानि पहुंचने की आशंका रहती है.
आखिर बुढ़ापे से इतना ड़र क्यों... 60 फीसदी लोगों की सोच है नेगेटिव...
वृद्धावस्था में स्वयं व्यक्ति में जीवकोपार्जन की शक्ति नहीं रहती और अधिक आयु होने पर उनके लिए चलना फिरना या नित्यकर्म करना भी कठिन होता है. अतएव वृद्धों को न केवल अपनी उदर पूर्ति के लिये अपितु अपने अस्तित्व तक के लिए दूसरों पर निर्भर करना पड़ता है. समाज के सामने सदा से यह प्रश्न रहा है कि किस प्रकार वृद्धों को समाज पर भार न बनने दिया जाए. उनको समाज का एक उपयोगी अंग बनाया जाए तथा उनकी देखभाल, उनकी आवश्कताओं की पूर्ति तथा सब प्रकार की सुविधाओं का प्रबंध किया जाए. जिससे सशक्त भारत का निर्माण होगा. जनसंख्या गणना वर्ष 2011 के अनुसार, भारत में लगभग 104 मिलियन बुजुर्ग हैं ,बुजुर्गों की 1961 में प्रतिशत 5.6 से बढ़कर वर्ष 2011 में 8.6 प्रतिशत हो गयी.
बेगूसराय जिले के सुधार गृह में बालिका ने की खुदकुशी की कोशिश
भारत सरकार वृद्ध लोगों के लिए एकीकृत कार्यक्रम चला रही हैं ,जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हों . सामाजिक कार्यकर्ता आनंद ने कहा की वरिष्ठ लोगों के लिए हर महीने जागो गांव फिजियोथेरेपी शिविर लगाएगी, जहां वृद्धावस्था से संबंधित बिमारियों का नि:शुल्क इलाज होगा. वैसे तो वरिष्ठजनों का सम्मान हर दिन, हर पल हमारे मन में होना चाहिए, लेकिन उनके प्रति मन में छुपे इस सम्मान को व्यक्त करने के लिए एवं बुजुर्गों के प्रति चिंतन की आवश्यकता के लिए औपचारिक तौर पर भी एक दिन निश्चित किया गया है. अत: प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर का दिन अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस या अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में मनाया जाता है.
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बता दें कि अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने की शुरुआत सन् 1990 में की गई थी. विश्व में बुजुर्गों के प्रति होने वाले दुर्व्यवहार और अन्याय को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए 14 दिसंबर 1990 को यह निर्णय लिया गया. तब यह तय किया गया कि हर साल 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में मनाया जाएगा और 1 अक्टूबर 1991 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस या अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया गया. इस अवसर पर पासोपुर के कई कार्यकर्ताओं द्वारा सहयोग प्रदान किया गया.
तो इसलिए खुद को बदल नहीं पाते बुजुर्ग और नहीं मानते कि वो गलत हैं...
डॉक्टर गुंजन ने लगभग 100 मरीजों को फिजियोथेरेपी द्वारा इलाज किया. साथ ही डॉक्टर गुंजन ने कहा की वृद्ध व्यक्ति में अपनी आयु के अनुभवों के कारण सांसारिक प्रश्नों को समझने और हल करने की विशेष क्षमता होती है. इसीलिए कहा गया है कि "न सा सभा यत्र न संति वृद्धा:". वृद्ध व्यक्ति की नवीन विषयों को समझने की शक्ति भी नहीं घटती. यही पाया गया है कि 82 वर्ष की आयु में व्यक्ति की विषय को ग्रहण करने की शक्ति 12 वर्ष के बालक के समान होती है. यह शक्ति 22 वर्ष की आयु में सबसे अधिक उन्नत होती है. वृद्धावस्था में होनेवाले विशेष रोग ये हैं : धमनी काठिन्य (arteriosclerosis), तीव्र रक्त चाप (high blood pressure), मधुमेह (diabetes), गठिया (gout), कैंसर (cancer) तथा मोतियाबिंद (cataract). इनमें से प्रथम और द्वितीय रोगों का हृदय और शारीरिक रक्त संचरण से सीधा संबंध होने के कारण उनसे अनेक प्रकार से हानि पहुंचने की आशंका रहती है.
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वृद्धावस्था में स्वयं व्यक्ति में जीवकोपार्जन की शक्ति नहीं रहती और अधिक आयु होने पर उनके लिए चलना फिरना या नित्यकर्म करना भी कठिन होता है. अतएव वृद्धों को न केवल अपनी उदर पूर्ति के लिये अपितु अपने अस्तित्व तक के लिए दूसरों पर निर्भर करना पड़ता है. समाज के सामने सदा से यह प्रश्न रहा है कि किस प्रकार वृद्धों को समाज पर भार न बनने दिया जाए. उनको समाज का एक उपयोगी अंग बनाया जाए तथा उनकी देखभाल, उनकी आवश्कताओं की पूर्ति तथा सब प्रकार की सुविधाओं का प्रबंध किया जाए. जिससे सशक्त भारत का निर्माण होगा. जनसंख्या गणना वर्ष 2011 के अनुसार, भारत में लगभग 104 मिलियन बुजुर्ग हैं ,बुजुर्गों की 1961 में प्रतिशत 5.6 से बढ़कर वर्ष 2011 में 8.6 प्रतिशत हो गयी.
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भारत सरकार वृद्ध लोगों के लिए एकीकृत कार्यक्रम चला रही हैं ,जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हों . सामाजिक कार्यकर्ता आनंद ने कहा की वरिष्ठ लोगों के लिए हर महीने जागो गांव फिजियोथेरेपी शिविर लगाएगी, जहां वृद्धावस्था से संबंधित बिमारियों का नि:शुल्क इलाज होगा. वैसे तो वरिष्ठजनों का सम्मान हर दिन, हर पल हमारे मन में होना चाहिए, लेकिन उनके प्रति मन में छुपे इस सम्मान को व्यक्त करने के लिए एवं बुजुर्गों के प्रति चिंतन की आवश्यकता के लिए औपचारिक तौर पर भी एक दिन निश्चित किया गया है. अत: प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर का दिन अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस या अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में मनाया जाता है.
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बता दें कि अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने की शुरुआत सन् 1990 में की गई थी. विश्व में बुजुर्गों के प्रति होने वाले दुर्व्यवहार और अन्याय को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए 14 दिसंबर 1990 को यह निर्णय लिया गया. तब यह तय किया गया कि हर साल 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में मनाया जाएगा और 1 अक्टूबर 1991 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस या अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया गया. इस अवसर पर पासोपुर के कई कार्यकर्ताओं द्वारा सहयोग प्रदान किया गया.
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