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This Article is From Jan 26, 2026

जब नवादा को जिला बनाने के लिए मंत्री पद से इस्तीफा देने पर अड़ गए थे शत्रुघ्न

26 जनवरी 1973 को गया जिले से अलग नवादा जिला घोषित किया गया था. 1865 में बिहार जिला का विभाजन हुआ. तब गया जिला का निर्माण हुआ था, उस समय नवादा गया में था.

जब नवादा को जिला बनाने के लिए मंत्री पद से इस्तीफा देने पर अड़ गए थे शत्रुघ्न
  • 1973 में नवादा को गया जिले से अलग कर जिला का दर्जा दिया गया, शत्रुघ्न शरण सिंह के प्रयासों से यह संभव हुआ
  • नवादा जिले का गठन 26 जनवरी 1973 को हुआ, जिसमें 13 प्रखंड शामिल थे और बाद में चार नए प्रखंड बनाए गए
  • नवादा जिले के पहले जिलाधिकारी नरेंद्र पाल सिंह थे, जिन्होंने 26 जनवरी 1973 को पदभार ग्रहण किया था
नवादा:

53 साल पहले की बात है. औरंगाबाद और नवादा को जिला बनाया जाना था. औरंगाबाद को जिला का दर्जा घोषित कर दिया गया था. लेकिन नवादा को जिला का दर्जा नही दिया जा रहा था. तब बिहार के सहकारिता मंत्री रहे हिसुआ के तत्कालीन विधायक शत्रुघ्न शरण सिंह उर्फ शत्रुघ्न बाबू अड़ गए थे. लिहाजा, गया से अलग नवादा को जिला का दर्जा मिला था. इसलिए स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के तत्कालीन मंत्री शत्रुघ्न शरण सिंह का नाम आज भी श्रद्धा से लिया जाता है.

दरअसल, नवादा को कम आबादी बताकर जिला से वंचित किया जा रहा था. तब शत्रुघ्न शरण सिंह ने मंत्री पद त्याग देने की धमकी दे दी थी. लिहाजा, तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय ने नवादा को जिला का दर्जा प्रदान किया था. 3 मार्च 1973 को केदार पांडेय खुद उदघाटन किए थे. स्वतंत्रता सेनानी डॉ. अलख नारायण वर्मा मुख्य संरक्षक और शत्रुघ्न शरण सिंह स्वागताध्यक्ष थे. तब लोक गायक जयराम सिंह ने एक गीत प्रस्तुत किया था, जिसमें कहा था- 'कइलन शत्रुघ्न पूरा वादा...बन गेल जिला नवादा हो दादा...'

बता दें कि 21 नवंबर 1972 को बिहार मंत्रिपरिषद ने गया जिले को नवादा, गया और औरंगाबाद के तीन जिलों में पुनर्गठित करने का निर्णय लिया था. तब नवादा अनुमंडल क्षेत्र के अलावा गया सदर अनुमंडल के अतरी, वजीरगंज और फतेहपुर को शामिल किया गया था. तब नवादा अनुमंडल में नवादा, हिसुआ, नरहट, सिरदला, रजौली, अकबरपुर, गोविंदपुर, कौआकोल, पकरीबरावां और वारिसलीगंज था.

1845 में नवादा को मिला था अनुमंडल का दर्जा

1845 में नवादा को अनुमंडल का दर्जा मिला था. तब नवादा गया जिले का हिस्सा था. बता दें कि 1865 के पहले तक नवादा बिहार जिला में सम्मिलित था. 1865 में बिहार जिला का विभाजन हुआ. तब गया जिला का निर्माण हुआ था, उस समय नवादा गया में था. 26 जनवरी 1973 को गया जिले से अलग नवादा जिला घोषित किया गया था. तब नवादा में 13 प्रखंड था. फिलहाल, 14 प्रखंड है. रोह, काशीचक, नारदीगंज और मेसकौर चार नए प्रखंड बनाए गए हैं. जबकि गया के तीन प्रखंड बाद में गया जिले का हिस्सा बन गया.

नवादा के पहले डीएम थे नरेंद्र पाल

18 दिसंबर 1972 को नरेंद्र पाल सिंह ने विशेष पदाधिकारी सह एडीएम के रूप में पदभार ग्रहण किया था. नरेंद्र पाल सिंह 26 जनवरी 1973 को नवादा जिले के पहले जिलाधिकारी के रूप में पदभार ग्रहण किया था. तब प्रथम उप जिला पदाधिकारी राधाकांत राय थे. जबकि एसडीओ मसूद हुसैन थे. पहले जिला पदाधिकारी के रूप में नरेंद्र पाल सिंह का उल्लेखनीय योगदान रहा है.

नवादा इज ए स्मॉल मार्केट विलेज

26 जनवरी 1973 को नवादा जिला बना. 2026 के 26 जनवरी को 54वां स्थापना दिवस है. 1811 में फ्रांसिस बुकानन ने लिखा था कि नवादा इज ए स्मॉल मार्केट विलेज. बहरहाल, जिले की आबादी पांच दशक में करीब ढ़ाई गुना हो गई है. हालांकि उस अनुपात में नवादा जिले का समुचित विकास नही हुआ. फिलहाल, नवादा देश के 112 पिछड़े जिले में शुमार है.

1973 में थी 246 ग्राम पंचायत

सरकारी आकड़े के मुताबिक, 1973 नवसृजित नवादा जिले का क्षेत्रफल 8,99,328 एकड़ या 1405.2 वर्गमील था. तब नवादा जिले में 246 ग्राम पंचायत थी. तब जिले की जनसंख्या 12.39 लाख थी. प्रति वर्ग मील 545 व्यक्ति रहते थे. 2011 की जनगणना के मुताबिक, 22.19 लाख पहुंच गया. अब नवादा की आबादी करीब 30 लाख आंका जा रहा है. वही जनसंख्या घनत्व 890 पहुंच गया है. 182 ग्राम पंचायत, तीन नगर परिषद और एक नगर पंचायत है. जिले में 1099 राजस्व गांव है.

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