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RJD प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने थामा BJP का दामन, बोले- अब यहीं जिएंगे और मरेंगे

मृत्युंजय तिवारी ने एक सप्ताह पहले आरजेडी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय तक निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने के बावजूद उन्हें सम्मान नहीं मिला, जिसके कारण उन्होंने यह फैसला लिया.

RJD प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने थामा BJP का दामन, बोले- अब यहीं जिएंगे और मरेंगे
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से इस्तीफा देने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया. मृत्युंजय तिवारी को प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पूर्व मंत्री मंगल पांडेय ने बीजेपी की सदस्यता दिलाई. कमल थामने के बाद मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि मैं लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल से जुड़ा था, लेकिन अब राजद एक ऐसी पार्टी बनकर रह गई है, जिसके पास न नीयत है और न ही नेतृत्व, इसीलिए वहां रहना अब उचित नहीं था.

मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि आज मेरे लिए गर्व का विषय है, आज मैंने भाजपा का दामन थामा है. मैं भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व का धन्यवाद देता हूं. उन्होंने कहा कि मैं चाहे आरजेडी में रहा हूं, लेकिन मेरा परिचय सभी दलों के नेताओं से है.

उन्होंने कहा कि बिहार को विकसित और देश को विकसित बनाने के संकल्प के साथ मैं यहां आया हूं. विपक्ष ने युवाओं और छात्रों को बरगलाने का काम किया है. अब मैं एनडीए में आ गया हूं, अब बीजेपी के लिए ही जिएंगे और मरेंगे.

राजद में 'सम्मान' नहीं मिलने पर मृत्युंजय तिवारी छोड़ा साथ

गौरतलब है कि मृत्युंजय तिवारी ने एक सप्ताह पहले आरजेडी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लंबे समय तक निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने के बावजूद उन्हें सम्मान नहीं मिला, जिसके कारण उन्होंने यह फैसला लिया. अब उनके जैसे समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता के लिए पार्टी में कोई सम्मान नहीं बचा है. ऐसी स्थिति में पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था.

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उन्होंने कहा कि मैंने अपनी नाराजगी और शिकायतों से पार्टी नेतृत्व को कई बार अवगत कराया था. विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सामने अपनी बातें रखीं, लेकिन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. जब किसी कार्यकर्ता की बात लगातार अनसुनी की जाए और उसे सम्मान न मिले, तो उसके लिए राजनीति करना मुश्किल हो जाता है.

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