देश दुनिया में मशहूर इस पशु मेले में लाखों देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं (फाइल फोटो)
हाजीपुर:
बिहार में गंगा और गंडक नदी के संगम पर ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व वाले सोनपुर क्षेत्र में एक महीने तक चलने वाले प्रसिद्ध सोनपुर मेले में भी नोटबंदी का असर साफ देखने के मिल रहा है. मेले में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी खिलौने, खेल-तमाशा और पशुओं का बाजार सजा है, परंतु इन सामानों के खरीदार नहीं आ रहे.
प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले शुरू होने वाले इस मेले में लाखों देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. यह मेला आज एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के रूप में विख्यात है. विश्व प्रसिद्ध यह मेला पूरी तरह सज-धज कर तैयार है, लेकिन बाहर से आने वाले दुकानदारों में मायूसी है. मेले का औपचारिक उद्घाटन 12 नवंबर को ही हो चुका है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन से ही यहां मेला देखने वालों का रेला उमड़ता है. कहा जाता है कि इस मेले में सुई से लेकर हाथी तक मिलता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की आधी रात से 500 और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया. उल्लेखनीय है कि इस मेले में लोग एटीएम और क्रेडिट कार्ड से खरीदारी नहीं करते.
उत्तर प्रदेश के बलिया से खिलौना बाजार में आए परशुराम सिंह पिछले 30 वर्षों से यहां खिलौने की दुकान लगाते आ रहे हैं, लेकिन इस साल उन्हें फायदा नजर नहीं आ रहा. उन्होंने कहा, 'बीते सालों में पूर्णिमा के दिन से ही प्रतिदिन तीन से चार हजार के खिलौने बिक जाते थे. इस बार प्रतिदिन 500 रुपये के खिलौने बेचना भी मुश्किल हो रहा है.'
जम्मू एवं कश्मीर से गर्म कपड़े लेकर आए मोहम्मद फिरोज भी इस वर्ष मेले से नाखुश हैं. फिरोज के मुताबिक, खरीदारों की कम दिलचस्पी के कारण उन्हें अपने गर्म कपड़ों की कीमत कम रखनी पड़ी है, फिर भी खरीददार नहीं आ रहे. उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि लोग यहां नहीं आ रहे. मेले में लोग आ रहे हैं, परंतु मेला घूमकर वापस जा रहे हैं, खरीदारी नहीं कर रहे.
मेले के पशु बाजार में नोटबंदी का असर साफ तौर पर दिख रहा है. सारण जिले के दिघवारा से आए पशु व्यापारी सुबोध राय बताते हैं, 'हम लोग बहुत परेशान हैं. 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट कोई नहीं ले रहा. गाय खरीदने जा रहे हैं तो लोग 'नयका' नोट मांग रहे हैं. इस कारण से यहां गाय बहुत कम है.'
इधर, गांवों से आने वाले ऑटो और मिनी बसों पर भी यात्रियों की संख्या कम है. एक ऑटो चालक ने बताया कि अन्य वर्षो में महुआ-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग में अवस्थित कटहारा, करौना, प्रखंड मुख्यालय, मुस्तफापुर, खाजेचांद छपरा, सुमेरगंज सहित अन्य चौक चौराहों से 10 से 20 मिनट के अंतराल पर सोनपुर मेले के लिए विशेष बस, ऑटो सहित अन्य गाड़ियां मिलती थीं. परंतु इस वर्ष नोटबंदी के कारण लोगों में उत्पन्न आर्थिक समस्या के चलते मेले में जाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है.
वहीं, मेले में पटना से आए चूड़ी व्यापारी आकाश ने उम्मीद जताई कि सब ठीक हो जाएगा. मेले में चूड़ियांे के दुकान लगाए आकाश ने कहा कि दो-चार दिनों की बात है. स्थिति ठीक हो जाएगी. अभी तो मेला शुरू हुए पांच दिन ही गुजरे हैं.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले शुरू होने वाले इस मेले में लाखों देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. यह मेला आज एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के रूप में विख्यात है. विश्व प्रसिद्ध यह मेला पूरी तरह सज-धज कर तैयार है, लेकिन बाहर से आने वाले दुकानदारों में मायूसी है. मेले का औपचारिक उद्घाटन 12 नवंबर को ही हो चुका है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन से ही यहां मेला देखने वालों का रेला उमड़ता है. कहा जाता है कि इस मेले में सुई से लेकर हाथी तक मिलता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की आधी रात से 500 और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया. उल्लेखनीय है कि इस मेले में लोग एटीएम और क्रेडिट कार्ड से खरीदारी नहीं करते.
उत्तर प्रदेश के बलिया से खिलौना बाजार में आए परशुराम सिंह पिछले 30 वर्षों से यहां खिलौने की दुकान लगाते आ रहे हैं, लेकिन इस साल उन्हें फायदा नजर नहीं आ रहा. उन्होंने कहा, 'बीते सालों में पूर्णिमा के दिन से ही प्रतिदिन तीन से चार हजार के खिलौने बिक जाते थे. इस बार प्रतिदिन 500 रुपये के खिलौने बेचना भी मुश्किल हो रहा है.'
जम्मू एवं कश्मीर से गर्म कपड़े लेकर आए मोहम्मद फिरोज भी इस वर्ष मेले से नाखुश हैं. फिरोज के मुताबिक, खरीदारों की कम दिलचस्पी के कारण उन्हें अपने गर्म कपड़ों की कीमत कम रखनी पड़ी है, फिर भी खरीददार नहीं आ रहे. उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि लोग यहां नहीं आ रहे. मेले में लोग आ रहे हैं, परंतु मेला घूमकर वापस जा रहे हैं, खरीदारी नहीं कर रहे.
मेले के पशु बाजार में नोटबंदी का असर साफ तौर पर दिख रहा है. सारण जिले के दिघवारा से आए पशु व्यापारी सुबोध राय बताते हैं, 'हम लोग बहुत परेशान हैं. 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट कोई नहीं ले रहा. गाय खरीदने जा रहे हैं तो लोग 'नयका' नोट मांग रहे हैं. इस कारण से यहां गाय बहुत कम है.'
इधर, गांवों से आने वाले ऑटो और मिनी बसों पर भी यात्रियों की संख्या कम है. एक ऑटो चालक ने बताया कि अन्य वर्षो में महुआ-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग में अवस्थित कटहारा, करौना, प्रखंड मुख्यालय, मुस्तफापुर, खाजेचांद छपरा, सुमेरगंज सहित अन्य चौक चौराहों से 10 से 20 मिनट के अंतराल पर सोनपुर मेले के लिए विशेष बस, ऑटो सहित अन्य गाड़ियां मिलती थीं. परंतु इस वर्ष नोटबंदी के कारण लोगों में उत्पन्न आर्थिक समस्या के चलते मेले में जाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है.
वहीं, मेले में पटना से आए चूड़ी व्यापारी आकाश ने उम्मीद जताई कि सब ठीक हो जाएगा. मेले में चूड़ियांे के दुकान लगाए आकाश ने कहा कि दो-चार दिनों की बात है. स्थिति ठीक हो जाएगी. अभी तो मेला शुरू हुए पांच दिन ही गुजरे हैं.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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