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बिहार में जमीन खरीदने-बेचने के नियम बदल जाएंगे! रजिस्ट्री से पहले खरीददार को मिलेगी जमीन की पूरी कुंडली

पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड को देखते हुए बिहार के लिहाज से नई व्यवस्था अहम मानी जा रही है. विभाग को उम्मीद है कि इससे आपराधिक मामलों में भी कमी आएगी.

बिहार में जमीन खरीदने-बेचने के नियम बदल जाएंगे! रजिस्ट्री से पहले खरीददार को मिलेगी जमीन की पूरी कुंडली
प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार में जमीन खरीदने-बेचने के लिए नई व्यवस्था लागू होने वाली है. इस व्यवस्था के तहत अब खरीददार को जमीन से जुड़ी सारी जानकारी पहले ही ऑनलाइन मिल जाएगी. इससे खरीददार को यह फायदा होगा कि जमीन बेचने वाले व्यक्ति के बारे में पूरी डिटेल उसके भी पास होगी. ऐसे में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या फ्रॉड से बचा जा सकेगा. अब रजिस्ट्री से पहले जमीन से जुड़ी 13 तरह की जानकारियां आवेदन के साथ देनी होगी. इसमें विक्रेता की जानकारी, जमीन का खाता नम्बर, खसरा, रकबा जैसी जानकारियां शामिल हैं. इसी महीने 15 मई को नियम लागू हो सकते हैं. नए नियमों के संबंध में विभाग ने अंचलाधिकारियों को (CO) को ट्रेनिंग भी दे दी है.

आवेदन के साथ अपलोड करनी होगी ये जानकारियां 

प्रक्रिया के अनुसार, तमाम जानकारियों के साथ आवेदन अपलोड करना होगा. इसके 10 दिनों के भीतर ही अंचलाधिकारी आवेदन की जांच करेंगे. अंचलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर ही जमीन खरीदने वाला व्यक्ति यह तय कर सकता है कि उसे सही जमीन मिल रही या नहीं. जो जानकारियां उसे विक्रेता ने दी थी, वह कितनी सही या गलत थी, इसका पता इस रिपोर्ट से चल जाएगा. संभावना है कि इससे जमीन विवाद में कमी आएगी. क्योंकि कई मामले ऐसे आते हैं, जिसमें भूमाफिया  कर्मचारियों की मदद से दूसरे की जमीन बेच देते थे. विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से इस पर रोक लगेगी.

जमीन विवाद में मर्डर के मामलों में बिहार टॉप पर

इस व्यवस्था को बिहार के लिहाज से अहम माना जा रहा हैं. क्योंकि जमीन विवाद के मामले में सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं बिहार में ही होती हैं. एनसीआरबी के आंकड़े भी कुछ ऐसी ही सच्चाई बयां करते हैं. साल 2024 में 2787 में 424 मर्डर के मामले में जमीन विवाद ही वजह रही. इस मामले में बिहार पहले, ओडिशा दूसरे और यूपी तीसरे नंबर पर है. विभाग को उम्मीद है कि नई पहल से इन आंकड़ों में कमी आएगी.

व्यवस्था में चुनौतियां भी कम नहीं 

इस नई व्यवस्था के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं. बिहार में आखिरी लैंड सर्वे 1970-71 में हुआ. अनुमान के मुताबिक, करीब 70 फीसदी रैयतों की जमीन उनके पूर्वजों के नाम पर है. ऐसे में जमीन बेचने का  विक्रेता का नाम कुछ और होता है और जमीन बेचने वाले लोग कोई और. यानी दादा और पिता की जमीन का सौदा उनके पौते और बेटे करते हैं. कई जानकारों का मानना है कि बिना सर्वे के यह पहल नाकाफी होगी. इसका असर बड़े पैमाने पर नहीं दिखेगा. 

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