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सरकारी जमीन पर भरत तिवारी का स्मारक! प्रशासन के रोक के बाद बिहार के भोजपुर में नया 'बवाल'

भरत तिवारी का जिस जगह एनकाउंटर हुआ. अब उस जगह परिजन और ग्रामीण स्मारक बनाने की तैयारी कर रहे थे. इसके लिए बाकायदा ईंट समेत अन्य सामान इकट्ठा किया गया. पर पुलिस-प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की पूरी तैयारी पर पानी फेर दिया.

सरकारी जमीन पर भरत तिवारी का स्मारक! प्रशासन के रोक के बाद बिहार के भोजपुर में नया 'बवाल'
सरकारी जमीन पर भरत तिवारी का स्मारक!
  • भरत भूषण तिवारी का जहां पर एनकाउंटर हुआ, वहां स्मारक बनाने की तैयारी चल रही थी
  • प्रशासन ने चयनित भूमि को सरकारी बताते हुए स्मारक निर्माण पर रोक लगा दी.
  • परिजन और ग्रामीणों ने भरत तिवारी के स्मारक के लिए वैकल्पिक जमीन की मांग की है.

बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़ सामने आया है. शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में जिस जगह भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई थी. वहां ग्रामीणों भरत तिवारी के स्मारक निर्माण की तैयारी कर रहे थे. हालांकि, प्रशासन ने प्रस्तावित निर्माण पर रोक लगा दी है, जिसके बाद ग्रामीणों और परिजनों में नाराजगी देखने को मिली. भरत तिवारी का स्मारक बनाने से रोकने पर प्रशासन ने तर्क दिया कि जहां स्मारक बनाया जा रहा था, वह सरकारी जमीन है.

जहां हुआ एनकाउंटर, वही स्मारक

ग्रामीणों के अनुसार, घटना स्थल पर भरत भूषण तिवारी की स्मृति में एक स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया था. इसके लिए स्थानीय लोगों ने ईंट, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री भी एकत्र कर ली थी और निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी चल रही थी. इसी बीच अंचल अधिकारी आनंद प्रकाश मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रोकने का निर्देश दिया. परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि अंचल अधिकारी ने यह कहते हुए स्मारक निर्माण पर रोक लगाई कि जिस भूमि का चयन किया गया है, वह सरकारी भूमि है.

रोक के बाद परिजनों ने रखी नई मांग

ऐसे किसी भी निर्माण के लिए जिला प्रशासन से पूर्व अनुमति या अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOCएनओसी) आवश्यक है, जो इस मामले में प्राप्त नहीं किया गया है. प्रशासन की अनुमति के बिना सरकारी भूमि पर किसी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता. भरत भूषण तिवारी के बड़े भाई सहित परिजनों ने कहा कि ग्रामीण केवल अपने दिवंगत परिजन की स्मृति में एक स्मारक बनाना चाहते थे. उनका कहना है कि प्रशासन के इस निर्णय से गांव के लोगों में निराशा है. उन्होंने मांग की कि यदि चयनित भूमि पर निर्माण संभव नहीं है तो प्रशासन स्मारक निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए, ताकि लोगों की भावनाओं का सम्मान हो सके. 

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं कराया जा सकता. ऐसे मामलों में भूमि की प्रकृति, स्वामित्व और आवश्यक अनुमतियों की जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाता है. 

प्रशासन के फैसले से ग्रामीणों में नाराजगी

स्मारक निर्माण पर रोक लगाए जाने की सूचना फैलते ही आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जुट गए. कुछ लोगों ने प्रशासन के फैसले पर असहमति जताई, जबकि कई ग्रामीणों ने कहा कि वे इस संबंध में जिला प्रशासन से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास करेंगे. हालांकि, स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रही और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. 

गौरतलब है कि भरत भूषण तिवारी की मृत्यु के बाद से यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. घटना को लेकर विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी बातें सामने रख रहे हैं और मामले से संबंधित जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी जारी हैं. इसी बीच स्मारक निर्माण को लेकर उत्पन्न विवाद ने पूरे प्रकरण में एक नया आयाम जोड़ दिया है. अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं. परिजन और स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि प्रशासन उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कानून के दायरे में कोई उचित समाधान निकालेगा, जिससे विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से निपटारा हो सके.

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