बिहार के सीएम नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
- नीतीश ने कहा, नोटबंदी की वजह से शराब की बिक्री पर भी असर पड़ा
- शराब की तस्करी में लगे लोगों पर भी सीधा असर पड़ेगा.
- कालाधन रखने वालों की रातों की नींद उड़ गई है.
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नई दिल्ली:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की और अपील की कि नरेंद्र मोदी अब बेनामी संपत्ति पर हमला बोलें.
मद्य निषेद दिवस के मौके पर बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि नोटबंदी की वजह से शराब की बिक्री पर भी असर पड़ा है और कहा कि कालेधन के खिलाफ इस लड़ाई से शराब की तस्करी में लगे लोगों पर भी सीधा असर पड़ेगा.
उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कालाधन पर नोटबंदी के जरिए की गई कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि इससे कालाधन रखने वालों की रातों की नींद उड़ गई है.
जानकारी के लिए बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार द्वारा काला या अघोषित धन पर कार्रवाई करने के लिए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों पर लगाई पर पाबंदी के फैसले से पहले बीजेपी ने राज्य में पार्टी कार्यालयों के कई जमीनें खरीदीं.
जेडीयू का आरोप है कि जमीन खरीद का समय यह दर्शाता है कि सत्तारूढ पार्टी को विमुद्रीकरण के कदम के बारे में सूचना दे दी गई थी, जिससे इस वर्ष अगस्त और सितंबर के बीच 23 जमीन सौदे किए गए. नोटबंदी का ऐलान 8 नवंबर को किया गया.
उधर, विभिन्न शहरों में भाजपा की ओर से जमीन खरीदे जाने को नोटबंदी के फैसले से जोड़ने के कांग्रेस और जेडीयू के आरोपों को 'बकवास' करार देते हुए केंद्र में सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले साल फैसला किया था कि हर जिले में संगठन कार्यालय हो और उसी फैसले के तहत जमीनें खरीदी गईं.
मद्य निषेद दिवस के मौके पर बोलते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि नोटबंदी की वजह से शराब की बिक्री पर भी असर पड़ा है और कहा कि कालेधन के खिलाफ इस लड़ाई से शराब की तस्करी में लगे लोगों पर भी सीधा असर पड़ेगा.
उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कालाधन पर नोटबंदी के जरिए की गई कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि इससे कालाधन रखने वालों की रातों की नींद उड़ गई है.
जानकारी के लिए बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार द्वारा काला या अघोषित धन पर कार्रवाई करने के लिए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों पर लगाई पर पाबंदी के फैसले से पहले बीजेपी ने राज्य में पार्टी कार्यालयों के कई जमीनें खरीदीं.
जेडीयू का आरोप है कि जमीन खरीद का समय यह दर्शाता है कि सत्तारूढ पार्टी को विमुद्रीकरण के कदम के बारे में सूचना दे दी गई थी, जिससे इस वर्ष अगस्त और सितंबर के बीच 23 जमीन सौदे किए गए. नोटबंदी का ऐलान 8 नवंबर को किया गया.
उधर, विभिन्न शहरों में भाजपा की ओर से जमीन खरीदे जाने को नोटबंदी के फैसले से जोड़ने के कांग्रेस और जेडीयू के आरोपों को 'बकवास' करार देते हुए केंद्र में सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले साल फैसला किया था कि हर जिले में संगठन कार्यालय हो और उसी फैसले के तहत जमीनें खरीदी गईं.
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