बिहार (Bihar) के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय प्रदेश से बाहर हुई घटनाओं में खूब बयान दे रहे हैं. अपराधी को जमीन के नीचे से भी बाहर निकाल लेने की बात बोल रहे हैं लेकिन खुद उनके राज्य में न तो अपराध पर नियंत्रण है और न ही अपराधी पुलिस की पकड़ में आ रहे हैं. इससे पीड़ित परिवार के गांव छोड़ने की नौबत आ रही है. मधेपुरा (Madhepura) में एक रिटायर्ड सैनिक की गोली मारकर हत्या हो जाने के बाद पुलिस कुछ नहीं कर पाई, जिससे दहशत में जी रहे पूरे परिवार को गांव छोड़ना पड़ रहा है. मेजर पिता की हत्या के बाद परिवार की सुरक्षा के लिए उनके फौजी पुत्र ने भी नौकरी छोड़ने का निर्णय ले लिया है.
मधेपुरा के मदनपुर गांव का यह परिवार गांव छोड़कर जा रहा है. दरअसल बीते 13 जून को इस परिवार के मुखिया भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर सियाराम यादव की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. हत्या के बाद परिवार वालों ने शिकायत दर्ज कराई लेकिन गोली मारने वाला लगभग दो महीने बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर है. इतना ही नहीं पीड़ित परिवार की ओर से हत्या में शामिल लोगों के नाम से चार का नाम हटा भी दिया गया है. पुलिस का कोई सहयोग नहीं मिलता देखकर व अपराधियों की मिल रही धमकी से दहशत में जी रहे इस परिवार को गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
मेजर सियाराम यादव ने सेना में 32 वर्षों तक रहकर देश की सेवा की थी. इस दौरान उन्होंने दो-दो बार पाकिस्तान व चीन के विरुद्ध हुए युद्धों में अपनी जांबाजी दिखाई थी. रिटायर होने के बाद वे गांव आकर परिवार के साथ रहकर समाजसेवा कर रहे थे. लेकिन इस बीच फौजी को देश के नहीं, गांव के दुश्मनों ने ही निशाना बना लिया. मृतक सैनिक की विधवा रोती-बिलखती कहती है कि हत्या के बाद सूचना देने पर भी पुलिस नहीं आई. शिकायत तक दर्ज नहीं की जा रही थी. बहुत अनुनय-विनय के बाद एफआईआर दर्ज तो की लेकिन पुलिस हत्यारे को नहीं पकड़ रही है. पुलिस का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है. अब यहां रहे तो परिवार के बाकी बचे लोग भी मारे जाएंगे.
मृतक सैनिक के पुत्र आर्मी इंटेलिजेंस के हवलदार देवकृष्ण ने बताया कि पुलिस मामले को भटका रही है. सही दिशा में कार्रवाई नहीं हो रही है. पुलिस की दोहरी नीति देखकर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सीआईडी जांच की मांग की लेकिन कोई रेस्पॉन्स नहीं मिल रहा है. सेना के जवान ने डीएसपी पर एफआईआर से चार लोगों के नाम हटाने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि परिवार की सुरक्षा के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ने का मन बना लिया है.
इधर एसपी दहशत में जी रहे सैनिक के परिवार को गांव छोड़ने से रोकने की बजाय यह कह रहे हैं कि उनका निर्णय गलत है. गांव छोड़कर वे कहां जाएंगे. देश के किस हिस्से में अपराध नहीं होता है. राज्य सरकार के मुखिया या डीजीपी राज्य में जीरो टॉलरेंस की बात कहकर भले ही अपनी पीठ थपथपा लें. लेकिन वास्तविकता यह है कि राज्य में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है. पुलिस का कहीं कोई नियंत्रण नहीं है. लिहाजा लोग दहशत के साये में जी रहे हैं.
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