- बेतिया में मैट्रिक परीक्षा केंद्रों पर 1 मिनट की देरी से पहुंची छात्राओं को प्रवेश नहीं मिला, जिससे हंगामा हुआ
- एक छात्रा ने सेंट टेरेसा स्कूल की दीवार फांदकर अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोका
- उर्दू आमना हाई स्कूल में भी दो छात्राएं देर से पहुंचीं, गेट बंद होने के कारण उन्हें परीक्षा देने नहीं दिया गया
बेतिया: बिहार में मैट्रिक (Matric) की बोर्ड परीक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती एक छात्रा पर इस कदर भारी पड़ी कि उसकी साल भर की मेहनत आंखों से बहते आंसुओं में तब्दील हो गई. बेतिया में परीक्षा केंद्र पर महज कुछ मिनट की देरी से पहुंची छात्राओं को प्रवेश नहीं मिला, जिसके बाद केंद्रों के बाहर भारी हंगामा और भावुक मंजर देखने को मिला.
दीवार फांदकर अंदर जाने की कोशिश
शहर के सेंट टेरेसा स्कूल परीक्षा केंद्र पर एक छात्रा निर्धारित समय से थोड़ी ही देर बाद पहुंची थी. गेट बंद होने के बाद छात्रा इतनी हताश हो गई कि उसने स्कूल की दीवार फांदकर अंदर दाखिल होने की कोशिश की. हालांकि, वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों ने उसे रोक दिया. इस दृश्य को देख वहां मौजूद अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने थोड़ी देर के लिए हंगामा भी किया.
VIDEO | Bettiah, Bihar: Students reach exam centre late after getting caught in traffic, disallowed entry.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 17, 2026
A student says, "Three to four girls also arrived late. We are being denied entry as they say we came late and will not be allowed."
(Full video available on PTI Videos -… pic.twitter.com/AybhT3M7ck
उर्दू आमना हाई स्कूल: गेट बंद, उम्मीदें खत्म
ऐसा ही नजारा उर्दू आमना हाई स्कूल के बाहर भी दिखा. यहां दो छात्राएं परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले पहुंचीं, लेकिन गेट बंद हो चुका था. प्रशासन की सख्त गाइडलाइंस के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई. परीक्षा केंद्र के बाहर छात्राएं बिलख-बिलख कर रोती नजर आईं. 'एक मिनट' की देरी उनके भविष्य पर भारी पड़ गई और उन्हें बिना परीक्षा दिए ही वापस घर लौटना पड़ा.
प्रशासन की सख्ती और नियमों का हवाला
मैट्रिक परीक्षा को कदाचार मुक्त और समयबद्ध बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर आया. अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश था कि गेट बंद होने के बाद किसी भी परिस्थिति में परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा. केंद्रों पर मौजूद अभिभावकों ने गुहार लगाई कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए चंद मिनटों की रियायत दी जानी चाहिए, लेकिन नियमों की कड़ाई के आगे किसी की एक न चली.
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