
सर्वानंद सोनोवाल (फाइल फोटो)
गुवाहाटी:
असम विधानसभा की 126 सीटों की चुनावी तस्वीर 19 मई को मतगणना के साथ साफ होगी और यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि क्या भाजपा पहली बार पूर्वोत्तर के किसी राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में होगी और सर्बानंद सोनोवाल के सिर पर ताज सजेगा या दिग्गज नेता तरुण गोगोई के नेतृत्व में लगातार चौथी बार राज्य में कांग्रेस की ही सरकार बनेगी। राज्य में कोई सियासी पार्टी खम ठोककर सरकार बनाने का दावा नहीं कर रही है और एक्जिट पोल में भाजपा के सत्ता में आने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मतगणना गुरुवार सुबह आठ बजे शुरू होगी और तीन बजे तक मतगणना का कार्य पूरा हो जाएगा।
उम्मीद है कि दोपहर 12 बजे तक विजेताओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी और यह साफ हो जाएगा कि पूर्वोत्तर के किसी राज्य में सत्ता पर काबिज होने की भाजपा की कवायद कितनी रंग लाई है।
असम में दो चरणों में हुए मतदान में करीब 82 प्रतिशत मतदान हुआ। कांग्रेस बोडोलैंड क्षेत्र को छोड़कर अन्य भागों में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है जबकि भाजपा ने असम गण परिषद के साथ गठबंधन किया है। जेडीयू और आरजेडी ने बदरूद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ तालमेल किया है।
राज्य में किसी भी पार्टी या गठबंधन के पक्ष में हवा नहीं दिखी। भारतीय जनता पार्टी ने असम गण परिषद (अगप) के साथ गठबंधन किया, जबकि एच मोहिलारी नेतृत्व वाले बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ उसका गठबंधन पहले से था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस और भाजपा दोनों परोक्ष रूप से एआईयूडीएफ नेता बदरूद्दीन अजमल को अपने पाले में करने की कोशिश में थी, लेकिन सार्वजनिक तौर पर ये दोनों पार्टियां मौलाना के खिलाफ ही नजर आई जिसका कारण बांग्लादेशी घुसपैठिये के मुद्दे को बताया जा रहा है। कांग्रेस से 9 विधायकों के साथ हेमंत बिश्व शर्मा के भाजपा में शामिल होने का भी कुछ नुकसान कांग्रेस पार्टी को होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।
भाजपा ने केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है, वहीं कांग्रेस की बागडोर तरूण गोगोई के हाथों में है। असम गण परिषद और बदरूद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ़ पिछली विधानसभा में इन दोनों ही पार्टियों की ताकत क्रमश: 10 और 18 सीट थीं। कांग्रेस का सहयोगी दल रही बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट अपने क्षेत्र में काफी ताकतवर मानी जाती है। इस चुनाव में गोगोई ने बीजेपी को बाहरी बताकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। पूरे चुनाव में गोगोई ने बीजेपी पर असम में घुसपैठ करने का आरोप लगाया है। बिहार चुनाव में नीतीश के नारे का सहारा गोगोई असम चुनाव में लेते दिखे।
समय-समय पर असम की राजनीति में प्रतिबंधित संगठन उल्फा समेत अन्य स्थानीय संगठन इस तरह से असमिया अस्मिता के विषय को पेश करते रहे हैं।
जनजातियों का झुकाव पारंपरिक रूप से कांग्रेस की ओर रहा है, मगर हाल के समय में स्थिति में कुछ बदलाव नजर आया है। ऊपरी असम में सर्वानंद सोनोवाल की वजह से भाजपा इसमें सेंध लगाती दिख रही है लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह वर्ग भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में कितनी मदद करता है।
जहां तक अल्पसंख्यकों का सवाल है तो वे अजमल की पार्टी एआईडीयूएफ और कांग्रेस के बीच में बंटे हुए दिखे।
भाजपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही असम गण परिषद की पहली बार 1985 में और फिर 1996 में सरकार बनी थी। असम की राजनीतिक सत्ता में 1952 से ही कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। सिर्फ तीन बार गैर कांग्रेसी सरकारें बनीं। अगप ने दो बार सरकार बनाई और उससे पहले 1978 में जनता पार्टी की सरकार बनी थी। कांग्रेस ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, आरटीआई एक्टिविस्ट अखिल गगोई की पार्टी गण मुक्ति संग्राम असम और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट यानी बीपीएफ से साथ आने की अपील जरूर की जिसमें सफलता नहीं मिल पाई।
माकपा एवं भाकपा सहित छह वाम दल लेफ्ट यूनाइटेड फोरम के बैनर तले 126 में से 59 विधानसभा सीटों पर एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं।
अब इन हालात में नतीजे वाले दिन 19 मई को ही पता चलेगा कि किसका पासा सही पड़ा और जनता ने किस पर भरोसा जताया है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मतगणना गुरुवार सुबह आठ बजे शुरू होगी और तीन बजे तक मतगणना का कार्य पूरा हो जाएगा।
उम्मीद है कि दोपहर 12 बजे तक विजेताओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी और यह साफ हो जाएगा कि पूर्वोत्तर के किसी राज्य में सत्ता पर काबिज होने की भाजपा की कवायद कितनी रंग लाई है।
असम में दो चरणों में हुए मतदान में करीब 82 प्रतिशत मतदान हुआ। कांग्रेस बोडोलैंड क्षेत्र को छोड़कर अन्य भागों में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है जबकि भाजपा ने असम गण परिषद के साथ गठबंधन किया है। जेडीयू और आरजेडी ने बदरूद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ तालमेल किया है।
राज्य में किसी भी पार्टी या गठबंधन के पक्ष में हवा नहीं दिखी। भारतीय जनता पार्टी ने असम गण परिषद (अगप) के साथ गठबंधन किया, जबकि एच मोहिलारी नेतृत्व वाले बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ उसका गठबंधन पहले से था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस और भाजपा दोनों परोक्ष रूप से एआईयूडीएफ नेता बदरूद्दीन अजमल को अपने पाले में करने की कोशिश में थी, लेकिन सार्वजनिक तौर पर ये दोनों पार्टियां मौलाना के खिलाफ ही नजर आई जिसका कारण बांग्लादेशी घुसपैठिये के मुद्दे को बताया जा रहा है। कांग्रेस से 9 विधायकों के साथ हेमंत बिश्व शर्मा के भाजपा में शामिल होने का भी कुछ नुकसान कांग्रेस पार्टी को होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।
भाजपा ने केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है, वहीं कांग्रेस की बागडोर तरूण गोगोई के हाथों में है। असम गण परिषद और बदरूद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ़ पिछली विधानसभा में इन दोनों ही पार्टियों की ताकत क्रमश: 10 और 18 सीट थीं। कांग्रेस का सहयोगी दल रही बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट अपने क्षेत्र में काफी ताकतवर मानी जाती है। इस चुनाव में गोगोई ने बीजेपी को बाहरी बताकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। पूरे चुनाव में गोगोई ने बीजेपी पर असम में घुसपैठ करने का आरोप लगाया है। बिहार चुनाव में नीतीश के नारे का सहारा गोगोई असम चुनाव में लेते दिखे।
समय-समय पर असम की राजनीति में प्रतिबंधित संगठन उल्फा समेत अन्य स्थानीय संगठन इस तरह से असमिया अस्मिता के विषय को पेश करते रहे हैं।
जनजातियों का झुकाव पारंपरिक रूप से कांग्रेस की ओर रहा है, मगर हाल के समय में स्थिति में कुछ बदलाव नजर आया है। ऊपरी असम में सर्वानंद सोनोवाल की वजह से भाजपा इसमें सेंध लगाती दिख रही है लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह वर्ग भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में कितनी मदद करता है।
जहां तक अल्पसंख्यकों का सवाल है तो वे अजमल की पार्टी एआईडीयूएफ और कांग्रेस के बीच में बंटे हुए दिखे।
भाजपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही असम गण परिषद की पहली बार 1985 में और फिर 1996 में सरकार बनी थी। असम की राजनीतिक सत्ता में 1952 से ही कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। सिर्फ तीन बार गैर कांग्रेसी सरकारें बनीं। अगप ने दो बार सरकार बनाई और उससे पहले 1978 में जनता पार्टी की सरकार बनी थी। कांग्रेस ने ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, आरटीआई एक्टिविस्ट अखिल गगोई की पार्टी गण मुक्ति संग्राम असम और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट यानी बीपीएफ से साथ आने की अपील जरूर की जिसमें सफलता नहीं मिल पाई।
माकपा एवं भाकपा सहित छह वाम दल लेफ्ट यूनाइटेड फोरम के बैनर तले 126 में से 59 विधानसभा सीटों पर एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं।
अब इन हालात में नतीजे वाले दिन 19 मई को ही पता चलेगा कि किसका पासा सही पड़ा और जनता ने किस पर भरोसा जताया है।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
विधानसभा चुनाव 2016, विधानसभा चुनाव परिणाम, असम विधानसभा चुनाव, असम विधानसभा चुनाव परिणाम, तरुण गोगोई, सर्वानंद सोनोवाल, Assembly Polls 2016, Assembly Polls Results, Assam Assembly Polls Results, Tarun Gogoi, Sarbananda Sonowal