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बुजुर्ग ने ट्रेन में मांगी साइड लोअर सीट, लड़के ने मना करते हुए कहा- मुझे 1050 रुपए दो और बैठ जाओ

सफर के दौरान जब बुजुर्ग दंपति ने एक नौजवान से सीट बदलने को कहा, तो लड़के ने जो सौदा किया उसने सबको हैरान कर दिया. जानिए 3AC कोच के अपर बर्थ से देखी गई इस दिलचस्प बातचीत की पूरी कहानी.

बुजुर्ग ने ट्रेन में मांगी साइड लोअर सीट, लड़के ने मना करते हुए कहा- मुझे 1050 रुपए दो और बैठ जाओ
लड़के ने बुजुर्ग दंपति की उम्र का ख्याल नहीं किया, उसने सीधे सीट पर खर्च किए पैसे की डिमांड कर दी.

Viral Post: ट्रेन में सफर के दौरान सीट बदलने को लेकर आपने कई किस्से सुने होंगे, लेकिन सोशल मीडिया पर इस समय एक ऐसा मामला गरमाया है जिसने सबको हैरान कर दिया है. क्या आप यकीन करेंगे कि भारतीय रेलवे की 3AC 'साइड लोअर' सीट की अपनी एक अलग कीमत भी हो सकती है? एक सह-यात्री ने बुजुर्ग दंपति को अपनी साइड लोअर सीट देने के बदले सीधे 1,050 रुपये की मांग कर डाली. इस घटना ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या सीट बदलना अब बिजनेस बन चुका है या इसमें थोड़ी इंसानियत बची है. 

पूरा मामला क्या था?

यह पूरा माजरा एक्स यूजर पूजा ने शेयर किया है. वायरल पोस्ट के मुताबिक, पूजा 3AC कोच की अपर बर्थ पर बैठकर इस पूरे ड्रामे को देख रही थीं. सफर के दौरान एक बुजुर्ग कपल ने साइड लोअर बर्थ पर बैठे एक नौजवान से अपनी सीट बदलने का अनुरोध किया. आमतौर पर लोग बुजुर्गों को देखकर सीट छोड़ देते हैं, लेकिन यहां कहानी में एक ट्विस्ट आ गया. नौजवान ने सीधे शब्दों में कहा कि उसने यह सीट 2,100 रुपये में बुक की है. अगर उन्हें सच में यह सीट चाहिए, तो उन्हें टिकट की आधी कीमत यानी 1,050 रुपये चुकाने होंगे.  

लड़के की बात सुनकर अंकल-आंटी सन्न

यह सुनते ही अंकल-आंटी बिल्कुल सन्न रह गए और उन्होंने चुपचाप वहां से हटना ही बेहतर समझा. लड़का आराम से अपनी साइड लोअर सीट पर लेटा रहा. पूजा ने इस पर तंज कसते हुए लिखा कि आज समझ आया कि 3AC में साइड लोअर सिर्फ एक सीट नहीं है, बल्कि एक 'लग्जरी चीज' है. इसे पाना वैसे ही मुश्किल होता है, और बिना किसी फायदे के इसे छोड़ना तो और भी मुश्किल है.  

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इंटरनेट यूजर्स ने बुजुर्ग कपल को सुनाया

इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया दो खेमों में बंट गया है. कुछ लोग इस नौजवान के व्यावहारिक रवैये का समर्थन कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर बुजुर्गों को नीचे की सीट चाहिए थी, तो उन्हें समय रहते पहले से बुकिंग करानी चाहिए थी. किसी दूसरे की पहले से प्लान की गई सीट पर हक जताना सही नहीं है. वहीं, दूसरी तरफ कई लोग इस पर भड़क उठे हैं. उनका मानना है कि हर चीज को पैसों के तराजू में नहीं तौला जा सकता. बुजुर्गों के प्रति थोड़ी हमदर्दी और इंसानियत दिखाना बेहद जरूरी है. कुछ लोगों ने तो यह भी सवाल उठाया कि क्या सीट के बदले पैसे मांगना कानूनी रूप से सही है? रेलवे को ऐसे लोगों पर जुर्माना लगाना चाहिए. 

नियमों की बात करें तो भारतीय रेलवे वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांगों को उपलब्धता के आधार पर लोअर बर्थ प्राथमिकता से देता है. ऐसे में यह बहस जारी है कि सफर में नियम बड़े हैं, पैसा बड़ा है या फिर आपसी समझदारी और इंसानियत. 

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