
मोहित और गजाला की फाइल फोटो
दो साल पहले राजस्थान में किडनी की बीमारी से परेशान दो लोग अहमदाबाद आए। 28 साल का मोहित शर्मा और 26 साल की गज़ाला। वह अहमदाबाद के अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती हुए। मोहित को उसकी मां ने और उसी तरह गज़ाला को भी उसकी मां ने किडनी दान की।
कुछ दिनों अस्पताल में रहने के बाद, दोनों का किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा, लेकिन इलाज के वक्त के दौरान दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। बस फिर क्या था, जो परिवार दोनों बच्चों की ज़िंदगी की दुआएं करते थे, वही उनकी जान के दुश्मन बन गए।
दोनों तरफ से इस प्यार का विरोध होने लगा, क्योंकि लड़का हिन्दू और लड़की मुस्लिम थी। धर्म प्यार के आड़े आने लगा, लेकिन इस विरोध के बीच दोनों ने दिसंबर 2013 में गुपचुप तरीके से शादी कर ली। तभी से दोनों के परिवारों का विरोध और मुखर हो गया।
लगातार परिवार के लोग दोनों को धमकियां देने लगे और लगातार यह कहा जाता रहा कि लड़की को उसके परिवार वाले ले जाएंगे, जिसमें लड़के का परिवार भी साथ देगा। इन धमकियों के बीच दोनों छुप-छुप कर जीने को मजबूर हुए।
पिछले दो सालों में इन लोगों ने करीब छह से सात ठिकाने बदले, ताकि उन तक विरोधी पहुंच न पाएं। अब थक हारकर दोनों दोबारा जहां ज़िंदगी और प्यार मिला, उस शहर अहमदाबाद आए। एक एनजीओ चलाने वाले वकील राजेन्द्र शुक्ला से दोनों मिले और यहां शरण ली।
गज़ाला को ये दुख है कि जिसने ज़िंदगी दी, वही क्यों जान के दुश्मन बने हुए हैं। स्वास्थ्य और इस मानसिक तनाव के बीच गज़ाला को अपनी बीएड की पढ़ाई भी अधूरी छोड़ देनी पड़ी। अब दोनों अहमदाबाद में ही नौकरी खोज रहे हैं ताकि यहीं पर गुजर बसर कर सकें। लेकिन उनकी दवाईयों का खर्च बहुत ज्यादा है।
इस बीच उनके वकील ने सरकार से गुहार लगाई है कि इनकी मदद की जाए, लेकिन दोनों को उम्मीद है कि शायद वक्त के साथ दोनों परिवारों की नफरत उनकी तरफ दोबारा प्यार में बदल जाएगी और अपने बच्चों को दोनों परिवार फिर अपना लेंगे।
कुछ दिनों अस्पताल में रहने के बाद, दोनों का किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा, लेकिन इलाज के वक्त के दौरान दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। बस फिर क्या था, जो परिवार दोनों बच्चों की ज़िंदगी की दुआएं करते थे, वही उनकी जान के दुश्मन बन गए।
दोनों तरफ से इस प्यार का विरोध होने लगा, क्योंकि लड़का हिन्दू और लड़की मुस्लिम थी। धर्म प्यार के आड़े आने लगा, लेकिन इस विरोध के बीच दोनों ने दिसंबर 2013 में गुपचुप तरीके से शादी कर ली। तभी से दोनों के परिवारों का विरोध और मुखर हो गया।
लगातार परिवार के लोग दोनों को धमकियां देने लगे और लगातार यह कहा जाता रहा कि लड़की को उसके परिवार वाले ले जाएंगे, जिसमें लड़के का परिवार भी साथ देगा। इन धमकियों के बीच दोनों छुप-छुप कर जीने को मजबूर हुए।
पिछले दो सालों में इन लोगों ने करीब छह से सात ठिकाने बदले, ताकि उन तक विरोधी पहुंच न पाएं। अब थक हारकर दोनों दोबारा जहां ज़िंदगी और प्यार मिला, उस शहर अहमदाबाद आए। एक एनजीओ चलाने वाले वकील राजेन्द्र शुक्ला से दोनों मिले और यहां शरण ली।
गज़ाला को ये दुख है कि जिसने ज़िंदगी दी, वही क्यों जान के दुश्मन बने हुए हैं। स्वास्थ्य और इस मानसिक तनाव के बीच गज़ाला को अपनी बीएड की पढ़ाई भी अधूरी छोड़ देनी पड़ी। अब दोनों अहमदाबाद में ही नौकरी खोज रहे हैं ताकि यहीं पर गुजर बसर कर सकें। लेकिन उनकी दवाईयों का खर्च बहुत ज्यादा है।
इस बीच उनके वकील ने सरकार से गुहार लगाई है कि इनकी मदद की जाए, लेकिन दोनों को उम्मीद है कि शायद वक्त के साथ दोनों परिवारों की नफरत उनकी तरफ दोबारा प्यार में बदल जाएगी और अपने बच्चों को दोनों परिवार फिर अपना लेंगे।
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